वेदपाठी वासुदेव पंडित के जीवन पर आधारित पुस्तक का भव्य लोकार्पण, बाबा नीम करौली महाराज से जुड़े थे तार

प्रसिद्ध संत बाबा नीम करौली महाराज के पुरोहित एवं शिष्य रहे वेदपाठी वासुदेव पंडित के जीवन, व्यक्तित्व और आध्यात्मिक साधना पर केंद्रित पुस्तक ‘वेदपाठी वासुदेव पंडित’ का लोकार्पण आज किया गया है। इस पुस्तक के लेखक धर्म समाज कॉलेज के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. प्रभाकर शर्मा हैं। लोकार्पण समारोह में साहित्य, धर्म एवं आध्यात्मिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य लोगों ने सहभागिता की है। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि वासुदेव पंडित का जीवन भारतीय सनातन परंपरा, वेदाध्ययन, संस्कार और आध्यात्मिक साधना का एक प्रेरक उदाहरण है। बाबा नीम करौली महाराज के साथ उनके संबंधों तथा उनकी धार्मिक एवं सामाजिक भूमिका को इस पुस्तक में पूरी तरह से समाहित किया गया है।
लेखक का उद्देश्य और नई पीढ़ी के लिए संदेश
लेखक डॉ. प्रभाकर शर्मा ने कहा कि इस पुस्तक को लिखने का मुख्य उद्देश्य वासुदेव पंडित के जीवन और उनके व्यक्तित्व से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। इससे भारतीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े ऐसे महान व्यक्तित्वों का परिचय व्यापक समाज को मिल सकेगा। इस समारोह में प्रोफेसर डॉ वेद प्रकाश अमिताभ ने अपने अध्यक्षीय भाषण में बताया कि इस जीवनी के माध्यम से डॉक्टर प्रभाकर शर्मा ने पुत्र रूप में अपने तीनों ऋण यानी देव ऋण, ऋषि ऋण और पित्र ऋण एक साथ चुका दिए हैं।
विद्वानों की राय और समारोह के प्रमुख अतिथि
डॉ ए के सिंह ने कहा कि यदि आपको उपन्यास, कहानी, आलोचना और संस्मरण आदि विधाओं का एक साथ आनंद लेना है, तो डॉक्टर प्रभाकर शर्मा द्वारा लिखित यह जीवनी अवश्य पढ़ना चाहिए। प्रो. डॉ प्रेम कुमार ने इस कृति को एक मील का पत्थर बताया है। इस पुस्तक की भूमिका लिखने वाले गजलकार सुरेश कुमार ने बहुत ईमानदारी से यह स्वीकार किया कि उनके कारण ही यह पुस्तक दो वर्ष के बाद प्रकाशित हो पाई है। लोकार्पण समारोह के साक्षी बनने वाले प्रमुख विद्वानों में डॉ राजेश कुमार, प्रोफेसर डॉ प्रेम कुमार, पर्यावरण विद् सुबोध नन्दन शर्मा, डॉ अजय बिसारिया, डॉ राजीव लोचन शुक्ला, चिंतन शर्मा, विकांक्षा, मोना, वेदांश और डॉ सुनीता सहित अनेक लोग उपस्थित रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन भास्कर शर्मा द्वारा किया गया है, जिन्होंने यह महत्वपूर्ण जानकारी दी कि चारों वेदों के ज्ञाता और उसका सस्वर पाठ करने वाला व्यक्ति वेदपाठी कहलाता है। अंत में श्रीमती डॉ उषा पाठक ने उपस्थित सभी अतिथियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया है।