नरवाना में शिव महापुराण कथा का समापन, आचार्य राजेंद्र जी महाराज ने ॐ नमः शिवाय को बताया कलियुग का सार तत्व

शिव महापुराण कथा का सप्तम दिवस: ॐ नमः शिवाय मंत्र कलियुग में सार तत्व — आचार्य राजेंद्र जी महाराज
प्रधान कैलाश सिंगला ने श्रद्धालुओं का नरवाना शहर को वृन्दावन बनाने के लिए किया धन्यवाद
नरेंद्र जेठी नरवाना /20 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
श्री सिद्धिविनायक सेवा समिति, नरवाना की ओर से हुड्डा ग्राउंड, रेलवे रोड पर आयोजित श्री शिव महापुराण कथा का आज सप्तम दिवस संपन्न हो गया। वृंदावन से पधारे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शिव पुराण आचार्य परम पूजनीय श्री राजेंद्र जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भगवान शिव की महिमा, ज्ञान, वैराग्य और शिव नाम के महत्व का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। इस अवसर पर कथा के सप्तम दिवस के यजमान मुकेश गोयल, नविंदू सिंगला, हंसराज समैण, तथा सतनारायण बंसल रहे।
कथा निरंतर चलती है, केवल विश्राम लेती है
कथा के दौरान आचार्य श्री राजेंद्र जी महाराज ने कहा कि कथा कभी समाप्त नहीं होती है। वह निरंतर चलती रहती है। कथा केवल विश्राम लेती है। श्री शिव महापुराण का श्रवण एवं अध्ययन करने से मनुष्य के मन को शांति प्राप्त होती है। इसके अलावा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

कलियुग में ॐ नमः शिवाय मंत्र ही है सार तत्व
सप्तम दिवस की कथा के अंतिम चरण में महाराज जी ने श्रद्धालुओं को जीवन में ज्ञान और वैराग्य को आत्मसात करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि कलियुग में भगवान शिव का नाम ही सार तत्व है। जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करता है, उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं। साथ ही उसे मानसिक शांति की अनुभूति होती है। आचार्य जी ने भगवान शिव के अनंत स्वरूपों का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों के स्मरण, पूजन और आराधना से जीव को अलग-अलग प्रकार के आध्यात्मिक फल प्राप्त होते हैं। शिव महापुराण के श्रवण मात्र से मनुष्य के कष्टों का निवारण होता है तथा मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। कथा के दौरान भगवान शिव की महिमा का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। कथा के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने नम आंखों से महाराज जी को विदाई दी। इसके साथ ही ‘हर-हर महादेव’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयकारों से कथा स्थल को गुंजायमान कर दिया।

द्वादश ज्योतिर्लिंगों की महिमा और नियमित आराधना का महत्व
महाराज जी ने भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों की महिमा का भी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भारत के विभिन्न राज्यों में भगवान शिव के ये 12 ज्योतिर्लिंग अत्यंत पवित्र एवं दिव्य स्वरूप माने जाते हैं। इनके दर्शन, स्मरण और पूजन का सनातन परंपरा में विशेष महत्व है। उन्होंने प्रमुख ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि सोमनाथ ज्योतिर्लिंग गुजरात में तथा श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश में स्थित है। इसी प्रकार भारत के विभिन्न क्षेत्रों में भगवान शिव के अन्य ज्योतिर्लिंग भी श्रद्धा एवं आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। आचार्य श्री राजेंद्र जी महाराज ने कहा कि जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की आराधना, पूजा और भजन करता है, उसे जीवन में आध्यात्मिक शक्ति और शांति प्राप्त होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान शिव के नाम का निरंतर स्मरण करने तथा धर्म एवं सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। कथा के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और भक्ति का वातावरण बना रहा। हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा कथा पंडाल भक्तिमय हो उठा। आचार्य जी ने श्रद्धालुओं को भगवान शिव की नियमित आराधना करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सोमवार भगवान शिव को समर्पित दिन माना जाता है। इसके साथ ही प्रदोष, महाशिवरात्रि तथा मासिक शिवरात्रि जैसे अवसरों पर श्रद्धा एवं विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है।

कैलाश सिंगला ने किया धन्यवाद और गणमान्य लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम के प्रधान कैलाश सिंगला ने सभी श्रद्धालुओं, अतिथियों एवं सहयोगियों का नरवाना शहर को वृन्दावन बनाने के लिए धन्यवाद किया। ब्राह्मणों, टेंट, साउंड, और म्यूजिक वाले को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में प्रधान कैलाश सिंगला, पूर्व प्रधान नरेश जैन, राकेश शर्मा, संयोजक विनोद मंगला, कैशियर जयपाल बंसल, सलाहकार देवीराम गर्ग, सतीश बंसल, जितेंद्र जिंदल, राजेश बाता, पवन मित्तल, पंडित रोशन लाल वेदपाठी, तेजवंत राय गोयल, जियालाल गोयल, धौला नैन, महावीर नैन, संजीव धमतान, रोशनलाल पूर्व प्रधान उचाना, मा0 किशोरी लाल, संजय दीवान, गंगा सिंह मोर, अमन जांगड़ा, रमेश लोधर, अर्जुन गोयल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक भगवान शिव का स्मरण किया और ॐ नमः शिवाय के जयघोष से पूरा कथा स्थल भक्तिमय हो उठा।