गुरुग्राम में सहस्र चंडी महायज्ञ का समापन, युवा पीढ़ी में संस्कार और राष्ट्र प्रेम जगाने का आह्वान

गुरुग्राम के पंचकोशी मार्ग स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में चल रहे सहस्र चंडी महायज्ञ का समापन हो गया है। इस समापन अवसर पर काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने महत्वपूर्ण विचार रखे। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में यज्ञ को लोककल्याण और विश्वशांति का माध्यम माना गया है। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया जाना चाहिए। इसके साथ ही युवा पीढ़ी में संस्कार और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध जागृत करने का भी प्रयास होना चाहिए।
राष्ट्र की एकता और अखंडता सर्वोपरि
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने राष्ट्र की एकता और अखंडता को सर्वोपरि बताया है। उन्होंने समाज से आपसी मतभेद भुलाकर संगठित रहने का आह्वान किया है। संत समागम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे संत-महात्माओं ने हिस्सा लिया। इन संतों ने सनातन संस्कृति के संरक्षण, धार्मिक एवं सामाजिक मूल्यों को मजबूत करने तथा समाज में समरसता स्थापित करने पर जोर दिया। महायज्ञ के दौरान राष्ट्रविरोधी एवं विघटनकारी शक्तियों के उन्मूलन के लिए प्रार्थना की गई। साथ ही देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए विशेष प्रार्थना और आहुतियां भी समर्पित की गईं। आयोजक मंडल के प्रवक्ता द्वारा यह सारी जानकारी मीडिया को दी गई।
संत समागम और विशेष अनुष्ठान
काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के सानिध्य में भव्य संत समागम का आयोजन किया गया। देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे संत-महात्माओं ने इस धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता की। इन संतों ने सनातन संस्कृति, सामाजिक सद्भाव तथा राष्ट्र की एकता एवं अखंडता के विषय पर अपने विचार रखे। महायज्ञ के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजन-अर्चन एवं हवन संपन्न हुआ। राष्ट्र की एकता, अखंडता, सुरक्षा और समृद्धि की कामना को लेकर विशेष आहुतियां समर्पित की गईं। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि धार्मिक अनुष्ठानों का उद्देश्य केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सद्भाव, संस्कार, सेवा और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना भी है।
प्रसाद वितरण और प्रमुख संतों की उपस्थिति
समापन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। वैदिक मंत्रोच्चार, हवन एवं धार्मिक अनुष्ठानों से पूरा परिसर आध्यात्मिक वातावरण से ओतप्रोत रहा। संत समागम के उपरांत श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण भी किया गया। इस अवसर पर यमुनेश्वर आश्रम के महंत वैभव गिरी महाराज, स्नेहानंद महाराज मुंबई, शिवानंद पुरी, अवध बिहारी दास, महंत रामेश्वर दास, महंत सियाराम दास, महंत श्रवण दास, महंत कोतवाल मोहनदास, कोठारी जी जूना अखाडा, निर्वाणी महा निरंजन आवाहन अखाड़ा, दामोदर प्रपन्नाचार्य और विद्यभूषण महाराज सहित सैकड़ों संत समागम में शामिल हुए। डॉ विनय मिश्रा ने सभी संतों का स्वागत सत्कार किया। बृजभूषणानंद महाराज ने समागम का संचालन किया। यज्ञ आचार्य तेजमणि त्रिपाठी के आचार्यत्व पूजन में यह पूरा अनुष्ठान संपन्न हुआ।