विश्व पर्यटन दिवस विशेष: भारत में रोजगार का प्रमुख साधन है पर्यटन उद्योग, जानिए आंकड़े और भविष्य की संभावनाएं

विश्व पर्यटन दिवस विशेष: भारत में रोजगार का प्रमुख साधन है पर्यटन उद्योग, जानिए आंकड़े और भविष्य की संभावनाएं

विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर रमेश सर्राफ धमोरा ने अपने लेख में बताया है कि देश के लिए बहुमूल्य विदेशी मुद्रा की कमाई करने में पर्यटन उद्योग का अच्छा खासा महत्व है। पर्यटन को चिमनी विहीन उद्योग के नाम से भी जाना जाता है। यह आज भी लाखों लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध करा रहा है। भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में से है जहां कलात्मक, धार्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर दर्शनीय स्थलों एवं कृतियों की कमी नहीं है। यही कारण है कि हजारों मील दूर रहने वाले विदेशी लोग भी पर्यटन के लिए यहां आने का लोभ छोड़ नहीं पाते हैं। देशी पर्यटक भी बड़ी तादाद में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक फैले देश के विभिन्न पर्यटन केंद्रों पर देखे जा सकते हैं।

विश्व पर्यटन दिवस का उद्देश्य और इतिहास

विश्व पर्यटन दिवस मनाने का उद्देश्य वैश्विक उद्योग के रूप में पर्यटन के महत्व तथा इसके सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देना है। इससे हमें पर्यटन के हम पर और हमारे आसपास की दुनिया पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलती है। इसमें विश्व भर में आर्थिक प्रभाव के साथ-साथ नैतिक, सामाजिक विचार भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन ने विश्व पर्यटन दिवस की स्थापना की थी। 1980 से हर साल 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है। इसी दिन यूनाइटेड नेशंस वर्ल्ड टूरिज्म ऑर्गनाइजेशन के कानूनों को अपनाया गया था। हर साल विश्व पर्यटन दिवस एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है। विश्व पर्यटन दिवस 2026 का आधिकारिक विषय संयुक्त राष्ट्र पर्यटन के अनुसार पर्यटन क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन को अपनाना और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के एकीकरण को बढ़ावा देना है। यह विषय इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे आधुनिक तकनीक और नवाचार मिलकर पर्यटन के भविष्य को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और सुलभ बना रहे हैं।

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भारत में पर्यटन उद्योग की स्थिति और आंकड़े

भारत में पर्यटन सबसे बड़ा सेवा उद्योग है। इसका राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में 6.23 प्रतिशत और भारत के कुल रोजगार में 8.78 प्रतिशत योगदान है। भारत में वार्षिक तौर पर 50 लाख विदेशी पर्यटकों का आगमन और 56 करोड़ घरेलू पर्यटकों द्वारा भ्रमण परिलक्षित होता है। विश्व यात्रा एवं पर्यटन परिषद की नवीनतम आर्थिक प्रभाव प्रवृत्ति रिपोर्ट के अनुसार भारत ने 2025 में विश्व की सबसे बड़ी पर्यटन अर्थव्यवस्थाओं में अपने पिछले दसवें स्थान से 8वें स्थान पर एक महत्वपूर्ण छलांग लगाई है। रिपोर्ट में वैश्विक यात्रा क्षेत्र में भारत के बढ़ते कद पर प्रकाश डाला गया है और अनुमान है कि अगले दशक में यह चौथे स्थान पर होगा। भारत का पर्यटन क्षेत्र 2025 में 231.6 अरब डॉलर का योगदान देगा जो बुनियादी ढांचे, विपणन और सेवा वितरण में मजबूत वृद्धि और रणनीतिक विकास को दर्शाता है।

वैश्विक स्तर पर पर्यटन का प्रभाव

यूपीय देश जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, इटली और स्पेन प्रमुख खिलाड़ी बने हुए हैं। हांगकांग एसएआर, मलेशिया और फिलीपींस जैसे एशियाई गंतव्य पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन खर्च में तीव्र वृद्धि देखने वाले देशों में सऊदी अरब, तुर्की, केन्या, कोलंबिया और मिस्र शामिल हैं। आज के समय में जहां हर देश की पहली जरूरत अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है वहीं आज पर्यटन के कारण कई देशों की अर्थव्यवस्था पर्यटन उद्योग के इर्द-गिर्द घूमती है। यूरोपीय देश, तटीय अफ्रीकी देश, पूर्वी एशियाई देश, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया आदि ऐसे देश हैं जहां पर पर्यटन उद्योग से प्राप्त आय वहां की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करती है। पर्यटन विश्व का सबसे बड़ा क्षेत्र है जो वैश्विक स्तर पर सकल घरेलू उत्पाद में 11 प्रतिशत योगदान देता है।

पर्यटन क्षेत्र में रोजगार और भविष्य की संभावनाएं

देश की अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर नजर रखने वाले अर्थशास्त्रियों और नीति निर्धारकों ने लगभग एकमत से स्वीकार किया है कि देश में उपलब्ध पर्यटन क्षमता का समुचित रूप से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। इस दिशा में अधिक प्रभावी व कारगर कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। इसी नीति के तहत विभिन्न पर्यटन केंद्रों को प्रमुख छोटे-बड़े शहरों से जोड़ने के लिए दूरसंचार, सड़क और वायु परिवहन की अधिकाधिक सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भारी निवेश की व्यवस्था की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी दस वर्षों में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था में भारत का स्थान विश्व में तीसरा हो जाएगा। देश में इस दौरान लगभग एक करोड़ नए रोजगार का इस क्षेत्र में सृजन होने की उम्मीद है। अभी देश में लगभग चार करोड़ लोग टूर एंड टूरिज्म इंडस्ट्री के माध्यम से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष तौर पर आजीविका हासिल कर रहे हैं।

पर्यटन शिक्षा और स्वरोजगार के अवसर

देश में पर्यटन से जुड़े लगभग सभी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम ग्रेजुएशन के बाद के स्तर के हैं। विश्वविद्यालयों में पर्यटन क्षेत्र के भावी विस्तार को भांपते हुए पर्यटन शिक्षा विभाग तेजी से विकसित हो रहे हैं। इनमें मास्टर आफ टूरिज्म एडमिनिस्ट्रेशन सरीखे स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। टूर ऑपरेटर और ट्रैवल एजेंट जैसे काम बहुत कम पूंजी से शुरू किए जा सकते हैं। आज अधिकांश सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों में पर्यटन प्रशिक्षण के कोर्स चलाए जा रहे हैं। राजस्थान पर्यटन विभाग समय-समय पर प्रदेश में गाइडों के प्रशिक्षण शिविर आयोजित करता है जिसमें प्रशिक्षण प्राप्त कर चयनित गाइडों को विभाग द्वारा गाइड का प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है। देश के अन्य राज्यों में भी इसी तरह के विभिन्न पाठ्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है जहां अध्ययन व प्रशिक्षण प्राप्त कर व्यक्ति पर्यटन के क्षेत्र में अपना कैरियर बना सकता है। आलेख के लेखक रमेश सर्राफ धमोरा राजस्थान सरकार से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं।

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