विश्व रोगी सुरक्षा दिवस: स्वास्थ्य सेवा में सुधार और मरीजों की सुरक्षा के लिए बड़े कदम

विश्व रोगी सुरक्षा दिवस स्वास्थ्य सेवा की आत्मा है। डॉक्टर को धरती पर भगवान कहा जाता है, पर भगवान से भी गलती हो सकती है। एक गलत दवा, एक गलत इंजेक्शन और एक गलत रिपोर्ट पूरे परिवार का जीवन बदल सकती है। इसी सत्य को समझकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 17 सितम्बर को विश्व रोगी सुरक्षा दिवस घोषित किया है। इस दिन का उद्देश्य केवल डॉक्टरों को दोष देना नहीं है, बल्कि एक ऐसी स्वास्थ्य प्रणाली बनाना है जहाँ गलती की गुंजाइश ही न रहे। स्वास्थ्य सेवा में एक गलती केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि एक जीवन है। इस वर्ष 2025-26 की थीम इंगेजिंग पेशेन्ट्स फार पेशेन्ट सेफ्टी है और नारा है कि रोगी को केवल बिस्तर पर लेटा व्यक्ति न समझो, उसे सुरक्षा की प्रक्रिया में भागीदार बनाओ। वर्ष 2019 में 72वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में इस दिवस की स्थापना की गई थी। 17 सितम्बर का दिन इसलिए चुना गया क्योंकि इसी दिन डबल्यूएचओ ने रोगी सुरक्षा को वैश्विक स्वास्थ्य प्राथमिकता घोषित किया था। पहला दिवस 2019 में रोगी सुरक्षा - एक वैश्विक स्वास्थ्य प्राथमिकता थीम के साथ मनाया गया था।
असुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं के आंकड़े और मुख्य चुनौतियां
डबल्यू एच ओ के अनुसार दुनिया भर में हर साल असुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं के कारण लाखों लोगों की मौत होती है। निम्न और मध्यम आय वाले देशों में हर दस में से चार मरीज को स्वास्थ्य सेवा के दौरान नुकसान पहुंचता है। भारत जैसे विशाल देश में यह आंकड़ा और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। रोगी सुरक्षा का सीधा अर्थ है कि स्वास्थ्य सेवा के दौरान रोगी को होने वाले अनावश्यक नुकसान को रोका जाए। नुकसान कई प्रकार के हो सकते हैं जिनमें सबसे पहला दवा सुरक्षा है। डबल्यू एच ओ के अनुसार दवा संबंधी त्रुटियां दुनिया में सबसे बड़ी रोकथाम योग्य चिकित्सा त्रुटि हैं। गलत दवा, गलत खुराक, गलत समय पर दवा देना और दो दवाओं का आपस में रिएक्शन होना भारत में सबसे आम कारण है। इसमें दिखने में एक जैसी दवाओं को गलत उठा लेना भी शामिल है। दूसरा बड़ा खतरा संक्रमण नियंत्रण का है जो अस्पताल में भर्ती होने के बाद होता है। इसमें सर्जरी के बाद घाव में संक्रमण, वेंटिलेटर पर मरीज को होने वाला निमोनिया और कैथेटर से होने वाला संक्रमण शामिल है। भारत में आईसीयू में भर्ती मरीजों में यह संक्रमण दर 10 से 15 फीसदी तक पाई जाती है। तीसरा खतरा सर्जिकल सुरक्षा से जुड़ा है जिसमें गलत जगह ऑपरेशन हो जाना, ऑपरेशन के बाद शरीर में गॉज या औजार रह जाना और खून चढ़ाने में गलती होना शामिल है। इसके लिए डबल्यू एच ओ ने सर्जिकल सेफ्टी चेकलिस्ट बनाई है जिसे अब भारत में कई बड़े अस्पताल अपनाने लगे हैं। चौथा खतरा निदान में त्रुटि का है जिसमें गलत रिपोर्ट आना, लैब में सैंपल बदल जाना और एक्स-रे गलत पढ़ना शामिल है। पांचवा खतरा मरीज की पहचान में गलती होना है जहाँ एक ही नाम के दो मरीजों में दवा या खून बदल जाता है।
वैश्विक और भारतीय चिकित्सा प्रणालियों में सुरक्षा के उपाय
डबल्यू एच ओ के अनुसार हर साल 134 मिलियन प्रतिकूल घटनाएं निम्न-मध्यम आय वाले देशों के अस्पतालों में होती हैं, जिनमें 2.6 मिलियन मौतें दर्ज की जाती हैं। असुरक्षित देखभाल से होने वाला नुकसान दुनिया में मृत्यु के शीर्ष 10 कारणों में से एक है। भारत में मेडिकल काउंसिल के अनुसार 5 फीसदी से अधिक शिकायतें लापरवाही से जुड़ी होती हैं जिनमें से अधिकांश को रोका जा सकता था। भारत में रोगी सुरक्षा की चुनौती दोहरी है क्योंकि एक तरफ सरकारी अस्पतालों में भारी भीड़ और संसाधनों की कमी है, तो दूसरी तरफ निजी क्षेत्र में महंगी और कभी-कभी अनावश्यक जांचें कराई जाती हैं। सरकार ने इस दिशा में कई कदम उठाए हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पतालों के लिए एन ए बी एच मान्यता लेनी आवश्यक कर दी गई है जिसमें रोगी सुरक्षा के सौ से अधिक मानक तय किए गए हैं। भारत सरकार ने पहली बार रोगी सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय ढांचा बनाया है जिसमें दवा सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण और सुरक्षित इंजेक्शन प्रथाओं पर विशेष जोर दिया गया है। इसके अलावा कायाकल्प अभियान के जरिए सरकारी अस्पतालों में स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड के माध्यम से डिजिटल हेल्थ मिशन के तहत अब हर मरीज की दवा का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में तैयार हो रहा है जिससे दवा से जुड़ी गलतियां कम होंगी।
रोगी और डॉक्टरों के लिए सुरक्षा के पांच महत्वपूर्ण सूत्र
पहले यह माना जाता था कि रोगी सुरक्षा केवल डॉक्टर और नर्स की ही जिम्मेदारी है। पर अब डबल्यू एच ओ का कहना है कि रोगी खुद अपना सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। इसके लिए मरीजों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले डॉक्टर से अपनी दवा का नाम, उसकी खुराक और वह दवा क्यों दी जा रही है, इस बारे में सवाल पूछना चाहिए। डॉक्टर साहब यह दवा किस तरह की है यह पूछना हर मरीज का अधिकार है। दूसरी बात यह है कि अपनी पुरानी बीमारियों, एलर्जी और इस समय चल रही सभी दवाओं की सूची हमेशा अपने साथ रखें। तीसरी बात यह है कि अस्पताल में भर्ती होने पर अपने परिवार के एक व्यक्ति को देखभाल की पूरी प्रक्रिया अच्छी तरह समझा दें। चौथी बात यह है कि जब भी डॉक्टर या नर्स आपके पास आएं तो आप विनम्रता से पूछ सकते हैं कि उन्होंने हाथ धोए हैं या नहीं। अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि जहाँ मरीज सक्रिय रूप से भाग लेते हैं वहाँ चिकित्सा त्रुटियों में 30 फीसदी तक की कमी आ जाती है। डॉक्टरों और अस्पतालों के लिए भी पाँच सूत्र तय किए गए हैं। पहला सूत्र यह है कि हर प्रक्रिया से पहले मरीज का नाम, उसकी उम्र और पर्ची की तीन बार जांच करके पहचान पक्की करें। दूसरा सूत्र हाथ धोना और जीवन बचाना है जो डबल्यू एच ओ का सबसे सस्ता और सबसे असरदार उपाय है। तीसरा सूत्र सर्जरी से पहले डबल्यू एच ओ की 19 बिंदुओं वाली चेकलिस्ट का पूरी तरह पालन करना है। चौथा सूत्र यह है कि कोई भी गलती होने पर उसे छिपाएं नहीं बल्कि उसकी रिपोर्ट करें ताकि दूसरा डॉक्टर वही गलती दोबारा न दोहराए। पाँचवां और अंतिम सूत्र दवा देने से पहले पांच आर यानी राइट पेशेन्ट, राइट ड्रग, राइट डोज़, राइट रूट और राइट टाइम पर विशेष रूप से गौर करना है।
सुरक्षा संस्कृति और बेहतर स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण
अन्त में यह कहा जा सकता है कि हमें अस्पतालों में एक मजबूत सुरक्षा संस्कृति बनानी होगी। रोगी सुरक्षा किसी एक दिन का नारा नहीं बल्कि जीवन भर की एक संस्कृति है। जिस प्रकार हवाई जहाज में उड़ने से पहले हर छोटी गलती की जांच की जाती है और पायलट को दंड देने के बजाय उसे बेहतर प्रशिक्षण दिया जाता है, वैसी ही कार्य संस्कृति अस्पतालों में भी अपनाई जानी चाहिए। भारत 140 करोड़ लोगों का एक विशाल देश है जहाँ डॉक्टरों पर काम का बहुत अधिक बोझ रहता है। एक सरकारी डॉक्टर दिन में दो सौ से अधिक मरीजों को देखता है जिससे गलती होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए इस समस्या का समाधान केवल डॉक्टर को दोष देना नहीं है, बल्कि पूरी स्वास्थ्य प्रणाली को सुधारना है। इसके लिए अस्पतालों में अधिक स्टाफ की नियुक्ति, बेहतर प्रशिक्षण, डिजिटल रिकॉर्ड का उपयोग और मरीजों को जागरूक करना बेहद जरूरी है। विश्व रोगी सुरक्षा दिवस हमें हमेशा यह याद दिलाता है कि स्वास्थ्य सेवा का सबसे पहला सिद्धांत यह है कि सबसे पहले किसी को नुकसान मत पहुंचाओ। आइए इस 17 सितम्बर को हम सब डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट, मरीज और परिवार के सभी सदस्य मिलकर यह संकल्प लें कि हम रोगी सुरक्षा के लिए अपनी आवाज उठाएंगे, खुलकर सवाल पूछेंगे और एक-दूसरे का पूरा साथ देंगे। एक सुरक्षित रोगी ही एक स्वस्थ और मजबूत भारत की असली नींव होता है।