विश्व पशु दिवस पर विशेष: धरती पर पशुओं का भी है बराबर का हक, रेवाड़ी के डॉ. बीर सिंह का अनूठा समर्पण

विश्व पशु दिवस के अवसर पर यह विशेष जानकारी सामने आई है कि धरती पर पशुओं का भी अधिकार बराबर का है।
- डाइट हुसैनपुर से सेवानिवृत्त रेवाड़ी के पशु प्रेमी और भौतिक शास्त्री डॉ. बीर सिंह का मानना है कि पशुओं के प्रेम रखना हर इंसान का नैतिक दायित्व है।
- वे विभिन्न क्षेत्रों में पशुओं के प्रति सेवा भाव से जुड़े हुए हैं।
- वे नीम करौली बाबा के कथन के अनुगामी हैं कि सभी से प्रेम करो, सभी की सेवा करो और सभी को भोजन कराओ।
- इस वर्ष 2026 की थीम उनकी आंखों से दुनिया को देखें निर्धारित की गई है।
विश्व पशु दिवस और डॉ. बीर सिंह का परिचय
डाइट हुसैनपुर से पिछले दिनों सेवानिवृत्त हुए रेवाड़ी के जाने-माने पशु प्रेमी तथा भौतिक शास्त्री डॉ. बीर सिंह का यह मानना है कि पशुओं के प्रति प्रेम रखना हर इंसान का नैतिक दायित्व है। वे विभिन्न क्षेत्रों में पशुओं के प्रति सेवा भाव से पूरी तरह जुड़े हुए हैं। वे नीम करौली बाबा के इस कथन के पूर्ण अनुगामी हैं कि सभी से प्रेम करो, सभी की सेवा करो और सभी को भोजन कराओ।
संत फ्रांसिस ऑफ़ असीसी का पर्व और वैश्विक आयोजन
वे यह बताते हैं कि जानवरों के संरक्षक संत फ्रांसिस ऑफ़ असीसी के पर्व पर हर साल 4 अक्टूबर को विश्व पशु दिवस पशु प्रेमियों से करुणा दिखाने का आह्वान करता है। यह वैश्विक आयोजन लोगों को पशुओं के कल्याण तथा उनके अधिकारों की वकालत करने और उनके प्रति करुणा की भावना को बढ़ावा देने के लिए एकजुट करता है।
परिवार का पशु-पक्षियों के प्रति समर्पण
यह उल्लेखनीय है कि डॉ. सिंह, उनकी पत्नी रचना राव जो कि पीएनबी बैंक में मैनेजर हैं, और उनके पुत्र डॉ. अश्विनी का पशु-पक्षियों के प्रति समर्पण देखते हुए यह बात सहज ही कही जा सकती है। उनका अधिकांश समय बंदरों, लंगूरों और अन्य सभी पशु-पक्षियों की सेवा करने में ही बीतता है।
सेवा कार्य और प्रमुख स्थान
वह विशेष रूप से कड़ाके की गर्मी और सर्दी के मौसम में अपनी कार के अंदर सब्जी मंडी से फल, सब्जियां, गाजर, गोभी, टमाटर, आलू, केले, आम, पपीता, सेब, अमरूद, तरबूज और खरबूज आदि भरकर बंदर व लंगूरों के स्थान पर पहुंच जाते हैं। इन प्रमुख स्थानों में समचाना धाम, नीलकंठ धाम खेड़ली लाला, कुंडा, भागेश्वर, बालेश्वर, टपकेश्वर और नरसिंह धाम जो कि निकट नीम का थाना तथा अरावली पर्वत श्रृंखलाएं हैं, मुख्य रूप से उल्लेखनीय हैं।
जागरूकता अभियान और इस वर्ष की थीम
वे आशु सेवा यूट्यूब चैनल के माध्यम से भी वन जीवन के प्रति लोगों में लगातार जागरूकता फैला रहे हैं। इस वर्ष 2026 की थीम उनकी आंखों से दुनिया को देखें निर्धारित की गई है।