धान खरीद के नाम पर किसानों को परेशान कर रही सरकार: सांसद वरुण चौधरी का अंबाला में बड़ा बयान

धान खरीद के नाम पर किसानों को परेशान कर रही सरकार: सांसद वरुण चौधरी का अंबाला में बड़ा बयान

धान खरीद के नाम पर किसानों को परेशान कर रही सरकार: वरुण चौधरी

अंबाला/पूर्ण सिंह /3 अक्टूबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज़ रिसोर्स

कांग्रेस सांसद वरुण चौधरी ने अंबाला की बराड़ा अनाज मंडी का दौरा किया है। उन्होंने वहां पहुंचकर धान खरीद को लेकर किसानों और आढ़तियों से मुलाकात की है। सांसद ने फसल खरीद में आ रही परेशानियों की पूरी जानकारी ली है। सरकार पर किसानों को परेशान करने का गंभीर आरोप लगाया गया है।

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  • बराड़ा अनाज मंडी का दौरा कर किसानों और आढ़तियों से की मुलाकात
  • मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल के सत्यापन पर उठाए गए गंभीर सवाल
  • प्रति एकड़ धान खरीद की जिलावार सीमा कम करने पर मांगा स्पष्टीकरण
  • राइस मिलर्स के साथ एग्रिमेंट और फसल उठान को लेकर सरकार को घेरा

धान खरीद और पोर्टल सत्यापन की समस्याएं

सांसद वरुण चौधरी ने कहा है कि सरकार ने किसानों से किए गए वादों को पूरा नहीं किया है। सरकार ने ऐसी व्यवस्थाएं खड़ी कर दी हैं जिनके कारण किसान बहुत परेशान हैं। किसान अपनी फसल बेचने के लिए मंडियों और सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हो चुके हैं। वर्ष 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री द्वारा बड़ी घोषणा की गई थी। चुनाव से पहले धान की खरीद 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किए जाने की घोषणा हुई थी। लेकिन आज किसान अपनी फसल कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर हो रहा है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किसानों को घोषित कीमत का लाभ क्यों नहीं मिल रहा है।

धान की सरकारी खरीद 29 सितंबर 2026 से शुरू करने का निर्णय लिया गया था। लेकिन उसी समय मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर बड़ी संख्या में किसानों की फसल और क्षेत्र का सत्यापन लंबित है। सांसद ने बड़ा सवाल किया कि जब सरकार को 29 सितंबर से खरीद शुरू करनी थी, तो उससे पहले पोर्टल का सत्यापन पूरा क्यों नहीं करवाया गया। किसान अपनी फसल लेकर मंडी में पहुंच चुका है। लेकिन पोर्टल संबंधी औपचारिकताओं के कारण किसानों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। सांसद ने सरकार से मांग की है कि पोर्टल सत्यापन की प्रक्रिया को तत्काल पूरा किया जाए। ताकि कोई भी किसान अपनी फसल बेचने से वंचित न रह जाए।

उपज की सीमा और राइस मिलर्स के साथ एग्रिमेंट का मुद्दा

सांसद ने प्रति एकड़ धान खरीद की नई जिलावार सीमा पर भी कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि अंबाला में 26.26 क्विंटल, यमुनानगर में 27.73 क्विंटल और कुरुक्षेत्र में 29.26 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा तय की गई है। जबकि पिछले सीजनों में 30 क्विंटल तथा 10 प्रतिशत अतिरिक्त उपज तक की व्यवस्था हुआ करती थी। उन्होंने पूछा है कि इस बार उपज की सीमा कम करने का आधार क्या है। यदि किसान की वास्तविक पैदावार निर्धारित सीमा से अधिक है तो उस अतिरिक्त धान का किसान क्या करेगा। एक तरफ सरकार हर दाने की खरीद की बात करती है। दूसरी तरफ प्रति एकड़ खरीद पर सीमा लगाई जा रही है। ऐसे में किसानों के सामने अतिरिक्त उपज बेचने की बड़ी समस्या खड़ी हो चुकी है। सरकार को इस व्यवस्था को स्पष्ट करना चाहिए और किसानों की पूरी उपज की खरीद सुनिश्चित करनी चाहिए।

सांसद ने सरकार से राइस मिलों के साथ अभी तक एग्रिमेंट न होने पर भी कड़ा जवाब मांगा है। धान की खरीद के बाद उसका उठान सुचारu रूप से होना बहुत जरूरी है। यह तभी संभव होगा जब राइस मिलर्स के साथ सरकार एग्रिमेंट के कार्य को पूरा करेगी। सरकार को प्रदेश के राइस मिलर्स के साथ जल्द एग्रिमेंट कर मंडियों से फसल का उठान करवाना चाहिए। अगर सरकार राइस मिलर्स के साथ एग्रिमेंट नहीं करती तो उसे स्पष्ट करना चाहिए। सरकार को यह बताना होगा कि मंडियों में खरीदा जाने वाला धान कहां जाएगा। उसका उठान कितनी जल्दी होगा और किसानों को भुगतान की पूरी प्रक्रिया क्या होगी। किसानों को समय पर भुगतान मिलना उनकी सबसे बड़ी जरूरत है। सांसद ने मांग की है कि सरकार मंडियों में खरीद, उठान और भुगतान की पूरी व्यवस्था सार्वजनिक करे। किसी भी स्तर पर देरी होती है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

किसानों की अन्य मुश्किलें और जमीनी हकीकत

सांसद ने कहा है कि किसान पहले से ही बढ़ती लागत, मौसम और बाजार की अनिश्चितताओं से जूझ रहा है। किसानों को समय पर खाद और बीज नहीं मिल पा रहा है। किसानों को फसल बुआई से लेकर फसल बेचने तक भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अब धान की फसल खरीद में भी पोर्टल की समस्या आ रही है। उपज की सीमा और भुगतान में देरी जैसी दिक्कतें किसानों की परेशानी को और ज्यादा बढ़ा रही हैं। सरकार को कागजी घोषणाओं के बजाय जमीन पर ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। जिसमें किसान बिना किसी परेशानी के अपनी पूरी धान की फसल बेच सके। किसानों को उनकी फसल का भुगतान समय पर प्राप्त होना चाहिए।

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