उत्तर प्रदेश में भारी बारिश से तबाही, तीन दिनों में 81 लोगों की मौत और 2254 मकान क्षतिग्रस्त

उत्तर प्रदेश में भारी बारिश से तबाही, तीन दिनों में 81 लोगों की मौत और 2254 मकान क्षतिग्रस्त

उत्तर प्रदेश में 25 से 27 सितंबर 2026 के बीच हुई अत्यधिक बारिश के कारण 81 लोगों की मौत हो गई है और व्यापक पैमाने पर संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। इस दौरान राज्यभर में मौसम के खराब मिजाज के कारण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा और स्कूलों को बंद करना पड़ा। राज्य में बारिश का स्तर सामान्य औसत से 775 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया। राहत आयुक्त ऋषिकेश भास्कर यशोद के कार्यालय से जारी आधिकारिक स्थिति रिपोर्ट में मानव और संपत्ति के इस बढ़ते नुकसान का पूरा डेटा दर्ज किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य को तेज तूफानों का सामना करना पड़ा जिससे स्थानीय ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह से चरमरा गया।

25 सितंबर से 27 सितंबर की सुबह तक की शुरुआती अवधि के आंकड़ों में 56 मौतें, 46 घायल, 107 पशुओं की मौत और 1,021 मकान क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई थी। राहत आयुक्त ने बताया कि इस विशिष्ट अवधि के दौरान औसत बारिश सामान्य 7.6 मिमी की तुलना में 66.5 मिमी तक पहुंच गई। राज्य के 75 जिलों में से 56 जिलों में इस शुरुआती चरण के दौरान अत्यधिक बारिश दर्ज की गई। 27 सितंबर को समाप्त होने वाले पूरे तीन दिनों के डेटा संकलन के समय, मृतकों की संख्या बढ़कर 81, घायलों की संख्या 62 और पशुओं की मौत का आंकड़ा 154 हो गया।

संपत्ति का नुकसान और जिलों पर प्रभाव

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रिपोर्टिंग अवधि के अंतिम दिन संपत्ति के नुकसान में और अधिक वृद्धि हुई। रिपोर्टों से पता चलता है कि कुल 2,254 मकान क्षतिग्रस्त हुए, जिनमें से 1,233 मामले अकेले 27 सितंबर को हुए। 28 सितंबर को एसोसिएटेड प्रेस की कवरेज में रिपोर्टिंग कट-ऑफ समय में विसंगतियों का उल्लेख किया गया, जिसमें राज्य सरकार के कम से कम 62 मृतकों और 46 घायलों के आंकड़ों का हवाला दिया गया और लखनऊ में स्कूलों के बंद होने की पुष्टि की गई।

जिलों का हाल और मौसम की स्थिति

इस मौसमी घटना का सबसे बुरा असर विशिष्ट क्षेत्रों पर पड़ा। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार सीतापुर में सात मौतें हुईं, इसके बाद लखीमपुर खीरी, बहराइच और बलरामपुर में पांच-पांच मौतें दर्ज की गईं। इसी अवधि के दौरान अयोध्या और गोरखपुर में चार-चार मौतें हुईं। घायलों और पशुओं के नुकसान के मामले में हरदोई पर सबसे बड़ा असर पड़ा। उस जिले में पहले आधिकारिक आंकड़े में दर्ज 1,021 क्षतिग्रस्त मकानों में से 272 मकान हरदोई के थे। फर्रुखाबाद में सामान्य से 7,385 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि कन्नौज सामान्य से 5,664 प्रतिशत ऊपर पहुंच गया। शाहजहांपुर, हमीरपुर और महोबा में भी मौसमी मानदंडों से अत्यधिक अंतर देखा गया।

नदियां और बाढ़ का खतरा

केंद्रीय जल आयोग ने सूचना दी है कि घाघरा और राप्ती नदियां कई स्टेशनों पर बढ़ते रुझान दिखा रही हैं। इस तरह का जल स्तर निचले इलाकों के लिए बाढ़ का सीधा खतरा पैदा करता है, और महाराजगंज की रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि नेपाल से पानी छोड़े जाने के बाद गंडक नदी का जलस्तर बढ़ गया। इसके परिणामस्वरूप आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ का पानी घुस गया।

प्रशासनिक उपाय और राहत कार्य

राज्य के अधिकारियों ने इस संकट से निपटने के लिए संसाधनों को जुटा लिया है। राहत आयुक्त ऋषिकेश भास्कर यशोद ने जिलाधिकारियों को मौत, चोट और संपत्ति के नुकसान के लिए अनुमन्य सहायता के वितरण को सुगम बनाने के लिए फील्ड में रहने का निर्देश दिया है। टीमों को फसल के नुकसान का आकलन करने और विस्थापित निवासियों के लिए वैकल्पिक आश्रय की व्यवस्था करने का कार्य सौंपा गया है। लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने एसोसिएटेड प्रेस को सूचित किया कि बंगाल की खाड़ी की मौसम प्रणाली के कमजोर होने के कारण 28 सितंबर से स्थिति में सुधार की उम्मीद थी। हालांकि मंगलवार तक राज्य के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में हल्की बारिश बनी रह सकती है, लेकिन प्राथमिक खतरा अब दीर्घकालिक पुनर्प्राप्ति की ओर शिफ्ट हो रहा है।

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