टुंडे कबाबी अमीनाबाद आउटलेट सील कर एलडीए ने पुलिस को सौंपा, सील तोड़ने पर एफआईआर और बिजली काटने के लिए लिखा पत्र

टुंडे कबाबी अमीनाबाद आउटलेट सील कर एलडीए ने पुलिस को सौंपा, सील तोड़ने पर एफआईआर और बिजली काटने के लिए लिखा पत्र

लखनऊ में टुंडे कबाबी से संबंधित एक परिसर को लेकर लखनऊ विकास प्राधिकरण के आधिकारिक अभिलेख ने निर्माण नियमों और सीलिंग आदेशों के पालन पर सवाल खड़े किए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई कार्यकर्ता उर्वशी शर्मा की शिकायत के बाद यह मामला सार्वजनिक जांच के केंद्र में आया है।

  • लखनऊ विकास प्राधिकरण की 24 जुलाई 2026 की कार्यवाही आख्या में संपत्ति के संबंध में कार्रवाई का विवरण दर्ज है।
  • संबंधित संपत्ति 168/6, पुराना नजीराबाद रोड, मोहन मार्केट, खालिगंज, अमीनाबाद, लखनऊ में स्थित है।
  • प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 के अंतर्गत इस कार्रवाई का उल्लेख किया है।

सरकारी अभिलेख में सीलिंग की कार्रवाई दर्ज

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एलडीए की आख्या के अनुसार, संबंधित संपत्ति पर कथित अनधिकृत निर्माण के संबंध में 23 जुलाई 2026 को शिकायत की गई थी। प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 के अंतर्गत हुई कार्यवाही का उल्लेख किया है। आख्या में ऑनलाइन वाद संख्या 7186/2026 और 6409/2026 का उल्लेख किया गया है। प्राधिकरण के अनुसार, 22 अप्रैल 2026 के आदेश के अनुपालन में 30 अप्रैल 2026 को संपत्ति को सील कर दिया गया था। इसके बाद संपत्ति का कब्जा संबंधित थाने की पुलिस को सौंप दिया गया था। आख्या में यह भी उल्लेख किया गया है कि सील तोड़े जाने के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए पुलिस को पत्र भेजा गया था। इसके अतिरिक्त विद्युत आपूर्ति विच्छेदित कराने के लिए भी पत्राचार किए जाने की बात दर्ज है। प्राधिकरण ने ऑनलाइन वाद संख्या 6409/2026 के सक्षम प्राधिकारी के समक्ष लंबित होने का भी उल्लेख किया है।

उर्वशी शर्मा की आईजीआरएस पहल से प्रशासनिक जवाबदेही पर जोर

इस प्रकरण में उर्वशी शर्मा की भूमिका शिकायत निवारण व्यवस्था के माध्यम से सरकारी कार्रवाई का अभिलेख प्राप्त करने के प्रयास के रूप में सामने आती है। आईजीआरएस व्यवस्था के माध्यम से उठाए गए मामले में एलडीए की आख्या ने संबंधित संपत्ति और सीलिंग की तारीख का विवरण उपलब्ध कराया है। अब प्रमुख प्रश्न यह है कि सीलिंग के बाद प्राधिकरण और पुलिस ने क्या कार्रवाई की है। क्या सभी निर्देशों का अनुपालन हुआ और परिसर की वर्तमान स्थिति क्या है, यह भी बड़ा सवाल है।

एलडीए और पुलिस से इन सवालों के जवाब जरूरी

संबंधित अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। पहला यह कि क्या 30 अप्रैल 2026 को सील किया गया परिसर आज भी सील है। क्या इस संबंध में हाल ही में कोई भौतिक निरीक्षण किया गया है या नहीं। दूसरा यह कि सील तोड़े जाने के संबंध में पुलिस को भेजे गए पत्र पर क्या कार्रवाई हुई है। क्या इस मामले में कोई प्राथमिकी दर्ज की गई है या नहीं। तीसरा यह कि विद्युत आपूर्ति काटने के लिए भेजे गए पत्र पर विद्युत विभाग ने क्या निर्णय लिया है। वर्तमान में परिसर की विद्युत स्थिति क्या है, इसकी भी जानकारी मिलनी चाहिए। चौथा यह कि ऑनलाइन वाद संख्या 6409/2026 की वर्तमान स्थिति क्या है। सक्षम प्राधिकारी ने इस संबंध में कोई नया आदेश पारित किया है या नहीं, यह भी बताना जरूरी है। पांचवां यह कि यदि सीलिंग के बाद परिसर में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने का दावा किया जाता है, तो इसकी जांच होनी चाहिए। स्वतंत्र भौतिक निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की पुष्टि की जानी चाहिए।

केवल सीलिंग का आदेश पर्याप्त नहीं, अनुपालन भी जरूरी

सीलिंग आदेश का उद्देश्य संबंधित संपत्ति पर लागू कानूनी प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित करना होता है। ऐसे आदेश की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसका वास्तविक अनुपालन हुआ है या नहीं। नियमित निगरानी की गई है या नहीं और किसी उल्लंघन की पुष्टि होने पर समयबद्ध कार्रवाई हुई है या नहीं, यह भी देखना जरूरी है। एलडीए की आख्या इस मामले की आगे जांच के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेजी आधार प्रदान करती है। अब यह आवश्यक है कि 30 अप्रैल 2026 के बाद की घटनाओं की जांच हो। संबंधित विभागों की कार्रवाई और परिसर की वर्तमान कानूनी स्थिति को आधिकारिक अभिलेखों तथा स्थल निरीक्षण के माध्यम से स्पष्ट किया जाना चाहिए। उर्वशी शर्मा की आईजीआरएस पहल ने इस प्रकरण में सरकारी कार्रवाई को सार्वजनिक जवाबदेही के दायरे में लाने का प्रयास किया है। जनहित का मूल प्रश्न बिल्कुल स्पष्ट है। जब कोई विकास प्राधिकरण किसी संपत्ति को सील करने की कार्रवाई दर्ज करता है, तो नागरिकों को पूरी जानकारी मिलनी चाहिए। नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि आदेश का वास्तविक अनुपालन हुआ या नहीं। साथ ही उस संपत्ति की वर्तमान कानूनी स्थिति क्या है, यह भी जनता के सामने आना चाहिए।

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