तोशाम: एसडीएम संदीप कुमार ने मेगा माइंड विद्यालय का किया निरीक्षण,

तोशाम: एसडीएम संदीप कुमार ने मेगा माइंड विद्यालय का किया निरीक्षण,

एसडीएम ने विद्यालय में निरीक्षण कर परखी विद्यार्थियों की सुरक्षा

स्कूल में विद्यार्थियों की पेयजल सहित तमाम व्यवस्था की पड़ताल

लाइब्रेरी में उपलब्ध पुस्तके, कम्प्यूटर, विद्यालय प्रांगण में लगाए गए पेड़ों की संख्या सहित ली अन्य जानकारी

AtalHind की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

तोशाम/22 सितंबर/विष्णु दत्त शास्त्री/अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

एसडीएम संदीप कुमार ने स्थानीय मेगा माइंड विद्यालय में औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों की सुरक्षा से लेकर पेयजल और अन्य तमाम मूलभूत सुविधाओं की पूरी जानकारी ली।

एसडीएम ने कंप्यूटर के प्रयोग और लाइब्रेरी में उपलब्ध पुस्तकों के उपयोग के प्रति छात्रों की रुचि को बारीकी से जाना। इसके साथ ही उन्होंने विद्यालय प्रांगण में लगाए गए पेड़ों की कुल संख्या और उनकी किस्मों की भी पूरी जानकारी प्राप्त की। इस दौरान उन्होंने बच्चों से सीधा संवाद किया और उन्हें कड़ी मेहनत करके अपने जीवन में लक्ष्य हासिल करने की प्रेरणा दी।

प्रशासनिक बदलाव और नोडल अधिकारी की भूमिका

सरकार ने सरकारी स्कूलों की निगरानी व्यवस्था में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। इस व्यवस्था की पूरी कमान अब सीधे प्रशासन को सौंप दी गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मंजूरी मिलने के बाद प्रशासन द्वारा एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की गई है। इस नई व्यवस्था के तहत प्रशासन अब केवल समन्वयक की भूमिका तक सीमित नहीं है।

प्रशासन अब स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं, शिक्षण व्यवस्था, बच्चों की सुरक्षा और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की सीधे निगरानी कर रहा है। विद्यालय के निरीक्षण से लेकर किसी भी प्रकार की कमियों की विस्तृत रिपोर्ट सीधे सरकार को भेजी जाती है।

निरीक्षण के दौरान जांची जाने वाली मुख्य व्यवस्थाएं

इस नई व्यवस्था के तहत अधिकारियों द्वारा कई तरह की बुनियादी चीजों की जांच की जाती है। इसमें पेयजल व्यवस्था, पानी की टंकियों की सफाई, शौचालयों की स्थिति और परिसर की स्वच्छता शामिल है। इसके अलावा स्मार्ट बोर्ड, कंप्यूटर और टैबलेट के उपयोग की भी जांच होती है।

अधिकारियों द्वारा शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति, कक्षा के संचालन, अनुशासन और भवन की समग्र स्थिति की भी जांच की जाती है। इसमें कमरों की कुल संख्या, उपयोग में आने वाले कमरों की संख्या, चारदीवारी की स्थिति, बिजली कनेक्शन, पंखे और लाइट की स्थिति शामिल है।

भवन की मरम्मत या नवीनीकरण की आवश्यकता, दिव्यांग बच्चों के लिए रैंप की उपलब्धता और अग्निशमन या सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता को भी जांचा जाता है। स्वच्छता के मामले में कक्षों की सफाई व्यवस्था, परिसर और प्रांगण की सफाई की जांच की जाती है।

स्वच्छ भारत मिशन के तहत सफाई कर्मी की उपलब्धता, कूड़ेदान की उपलब्धता और उसके निस्तारण की व्यवस्था को देखा जाता है। रसोईघर की स्वतंत्रता, कुल शौचालयों की संख्या और चालू हालत में मौजूद शौचालयों की संख्या की भी गिनती की जाती है।

बालिका शौचालयों की कुल संख्या और चालू हालत में उनकी संख्या को भी परखा जाता है। शौचालयों में पानी की उपलब्धता, शौचालयों की सफाई की स्थिति और दिव्यांग-अनुकूल शौचालय की उपलब्धता की जांच होती है।

पेयजल सुविधा, पेयजल स्रोत का प्रकार जैसे आरओ या हैंडपंप या नल, और पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच का रिकॉर्ड देखा जाता है। पानी की उपलब्धता निरंतर है या नहीं, इसकी भी जानकारी ली जाती है।

फर्नीचर, छात्र और अध्यापक की संख्या, स्वीकृत पद बनाम कार्यरत अध्यापकों की संख्या की जांच की जाती है। डेस्क और बेंच की पर्याप्तता, छात्र-अध्यापक अनुपात और पिछले परीक्षा परिणाम को भी देखा जाता है।

लाइब्रेरी और पुस्तकों की उपलब्धता तथा उनके उपयोग की स्थिति की जानकारी ली जाती है। विज्ञान और कंप्यूटर प्रयोगशाला की स्थिति और उनके उपयोग को भी परखा जाता है।

शिक्षण सहायक सामग्री का उपयोग, अध्यापक डायरी, सह-शैक्षणिक गतिविधियां और खेल मैदान की उपलब्धता तथा उसकी स्थिति की जांच की जाती है। स्पोर्ट्स सामग्री की उपलब्धता, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों के आयोजन का विवरण भी लिया जाता है।

स्काउट-गाइड या एनसीसी जैसी गतिविधियों, रसोईघर और बर्तनों की स्वच्छता की जांच की जाती है। छात्रवृत्ति, यूनिफॉर्म और पुस्तकों के वितरण का स्टेटस देखा जाता है।

पीटीएम यानी पेरेंट-टीचर मीटिंग की नियमितता, विद्यालय के विशिष्ट पूर्व छात्र और विद्यालय में पेड़ों की स्थिति की जानकारी ली जाती है। विद्यालय परिसर में कुल पेड़ों की संख्या और पेड़ों के प्रकार भी इसमें शामिल हैं।

स्कूल बसों में सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य

एसडीएम ने स्पष्ट रूप से कहा कि स्कूल बसों में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्कूल बसों में सुरक्षित वाहन पॉलिसी के नियमों की पूरी पालना होनी चाहिए।

संदीप कुमार ने कहा कि स्कूल बसों में चालक, हेल्पर और परिचालक के पास वैध लाइसेंस होना चाहिए। इसके अलावा उनके पास पुलिस सत्यापन प्रमाण पत्र भी होना अनिवार्य है।

बसों में सभी संयंत्रों के कागजात पूरे और त्रुटि रहित होने चाहिए। सभी स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा के मानक अत्यंत आवश्यक हैं।

उन्होंने निर्देश दिए कि सभी स्कूल प्रबंधक यह सुनिश्चित करें कि उनके वाहन पूर्ण रूप से फिट और सुरक्षित हों। ऐसा करने से किसी भी प्रकार की दुर्घटना से आसानी से बचा जा सकता है।

एसडीएम ने निजी स्कूल संचालकों को सुरक्षित स्कूल वाहन नीति का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए। एसडीएम ने स्कूल प्रबंधन को यह भी निर्देश दिए कि वे सरकारी मानकों का पूरी तरह पालन करें और बसों की नियमित रूप से मरम्मत कराएं।

Share:

Comments

Leave a comment