बिजली निजीकरण के खिलाफ तोशाम में भड़के कर्मचारी, आपात बैठक कर आंदोलन की दी चेतावनी

बिजली निजीकरण के खिलाफ तोशाम में भड़के कर्मचारी, आपात बैठक कर आंदोलन की दी चेतावनी

बिजली निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों में उबाल, तोशाम बिजली घर में आपात बैठक कर आंदोलन की चेतावनी

कहा : सुनवाई का मौका नहीं दिया, निजी लाइसेंस देने में जल्दबाजी का आरोप, बिना सूचना सुनवाई तय करने पर रोष,

बोले : यह निजी एकाधिकार की सोची-समझी साजिश

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विष्णु दत्त शास्त्री/तोशाम/ 01 अक्तूबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

तोशाम में बिजली निजीकरण और ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन को सुनवाई का उचित अवसर न देने के खिलाफ बिजली कर्मचारियों में भारी उबाल देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में वीरवार को तोशाम बिजली घर में एक आपातकालीन बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें आगे की रणनीति तैयार की गई। बैठक के दौरान विभिन्न यूनियनों के नेताओं ने संयुक्त रूप से बयान जारी कर कड़ा विरोध जताया।

  • बिजली निजीकरण और लाइसेंस देने की जल्दबाजी के खिलाफ कर्मचारियों का विरोध
  • तोशाम बिजली घर में आयोजित हुई आपातकालीन बैठक
  • सुनवाई का मौका न देने और बिना सूचना समय तय करने पर जताया रोष
  • निजी एकाधिकार स्थापित करने की सोची-समझी साजिश का लगाया आरोप

बैठक में शामिल हुए प्रमुख कर्मचारी नेता

तोशाम बिजली घर में आयोजित इस आपातकालीन बैठक के दौरान हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के प्रवक्ता इंजीनियर नारायण प्रकाश, हरियाणा पावर कारपोरेशन एससी-बीसी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह बराड़, एचईबी वर्कर यूनियन के सर्कल सचिव मनोज बल्लू बामला, ऑल हरियाणा पावर कारपोरेशन वर्कर यूनियन के सर्कल सचिव अशोक गोयत तथा एससी, एसटी व बीसी वेलफेयर एसोसिएशन के सर्कल सचिव कपूर सिंह ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया और अपने विचार रखे।

आयोग पर लगाए गंभीर आरोप और सुनवाई का मुद्दा

यूनियन नेताओं ने कहा कि आयोग का यह दावा पूरी तरह से गलत है कि एआईपीईएफ ने सुनवाई का लाभ उठाने से मना कर दिया था। फेडरेशन की तरफ से 19 जून को मूल याचिका और 14 सितंबर को विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर अपनी विस्तृत आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। इसके बावजूद 28 व 29 सितंबर को बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक सुनवाई का समय तय कर दिया गया, जिसके कारण एआईपीईएफ अध्यक्ष का लखनऊ में होने के कारण उस बैठक में शामिल होना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं हो पाया था।

निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का लगाया आरोप

कर्मचारी नेताओं ने कड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि एचईआरसी सभी पक्षों को सुने बिना निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए एक औजार की तरह काम कर रहा है। भारत में पीक डिमांड से लगभग दोगुनी बिजली उत्पादन क्षमता होने के बावजूद भी जानबूझकर सरकारी तंत्र को बदनाम कर निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। नेताओं का साफ कहना है कि यह संकट व्यवस्था की कोई विफलता नहीं है, बल्कि यह निजी एकाधिकार स्थापित करने की एक सोची-समझी साजिश है।

आंदोलन की चेतावनी और अन्य कर्मचारी रहे मौजूद

कर्मचारी नेताओं ने अपनी चेतावनी को स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि निजीकरण की दिशा में यह मनमाना रवैया बंद नहीं हुआ, तो समूचा बिजली विभाग सड़कों पर उतरकर कड़ा विरोध आंदोलन करने को मजबूर हो जाएगा। इस आपात बैठक के अवसर पर रामलाल, उमेश, राजेश पहलवान, राजेश दुल्हेड़ी, मनजीत बुशान, रामअवतार, अजय शर्मा आदि अनेक कर्मचारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

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