तरावड़ी में किसानों का फूटा गुस्सा: उचित भाव न मिलने पर सड़क पर फेंकी घीया और लोगों को बांटी मुफ्त फसल

तरावड़ी में किसानों का फूटा गुस्सा: उचित भाव न मिलने पर सड़क पर फेंकी घीया और लोगों को बांटी मुफ्त फसल

उचित भाव नहीं मिला तो छलका किसानों का दर्द, सड़क पर फेंक दी घीया… लोगों को मुफ्त में बांटी फसल

रोहित लामसर /तरावड़ी /28 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

तरावड़ी में उचित भाव न मिलने पर किसानों का दर्द छलक उठा है। पधाना गांव के किसानों ने घीया के उचित दाम न मिलने से नाराज होकर अपनी फसल सड़क पर फेंककर विरोध जताया है। किसानों ने तरावड़ी के करनाली गेट पर सड़कों पर सब्जी गिराई और लोगों को मुफ्त में फसल बांटी।

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किसानों का कहना है कि जिस घीया को किसान महीनों की मेहनत, पसीने और हजारों रुपये की लागत लगाकर खेत में तैयार करता है, बाजार में उसकी कीमत बेहद कम लगाई जाती है। जब किसान अपनी फसल बेचने मंडी पहुंचता है तो लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है। लेकिन जब यही सब्जी उपभोक्ता तक पहुंचती है तो कई गुना महंगे दामों पर बिकती है।

किसानों ने सवाल उठाया है कि किसान की मेहनत और उपभोक्ता द्वारा चुकाई जा रही कीमत के बीच इतना बड़ा अंतर क्यों है? बीज, खाद, दवाइयां, सिंचाई, मजदूरी, खेत की तैयारी और फसल को मंडी तक पहुंचाने में लगातार खर्च बढ़ रहा है। लेकिन तैयार फसल का भाव लागत के आसपास भी नहीं पहुंच रहा है।

गांव पधाना के किसान विजय राणा, दीपक, मुकेश, रिंकू, धूम सिंह राणा, प्रवीन, कुलदीप पंडित, सत्यवान, पवन राणा और शेखर ने अपना दर्द जाहिर किया। किसानों ने कहा कि वे दिन-रात खेत में मेहनत करते हैं, लेकिन फसल तैयार होने पर उचित मूल्य नहीं मिलता। गुस्से और बेबसी में उन्होंने घीया सड़क पर फेंकी और निशुल्क बांटी, ताकि समाज और सरकार तक किसानों की पीड़ा की आवाज पहुंच सके।

किसानों ने भावुक होकर कहा कि खून-पसीने से सींची फसल को सड़क पर फेंकना उनके लिए आसान नहीं था। फसल बेचकर घर का खर्च तो दूर, लागत तक पूरी न हो तो किसान क्या करे? किसान लगातार आर्थिक दबाव में जा रहा है और अगर फसल की कीमत किसान तय नहीं कर सकता, तो खेती करने वाले किसान का मनोबल कैसे बचेगा।

किसानों का कहना है कि आज घीया है, कल किसी दूसरी सब्जी की यही स्थिति हो सकती है। यदि सरकार ने समय रहते सब्जी उत्पादक किसानों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया, तो छोटे और मध्यम किसानों के लिए खेती करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। किसानों ने मांग की कि सब्जी उत्पादकों के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाए ताकि लागत के अनुरूप उचित और सम्मानजनक मूल्य मिल सके।

किसानों ने मंडी व्यवस्था में सुधार, बिचौलियों की भूमिका पर नियंत्रण और कीमतों के अंतर को कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। खेत में सस्ती और बाजार में महंगी सब्जी की यह तस्वीर सिर्फ कीमतों का अंतर नहीं, बल्कि किसान की मजबूरी की कहानी है। अगर किसान अपनी फसल सड़क पर फेंकने को मजबूर हो रहा है, तो इसे उसकी टूटती उम्मीद और दर्द की आवाज समझा जाना चाहिए।

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