हरियाणा के पहलवान सुनील कुमार ने एशियाई खेलों में रचा इतिहास, जीता लगातार दूसरा कांस्य पदक

हरियाणा के पहलवान सुनील कुमार ने एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार दूसरी बार कांस्य पदक जीतकर भारतीय ग्रीको-रोमन कुश्ती में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह मुकाबला हिसार से जुड़ा हुआ है और इस बड़ी उपलब्धि ने पूरे देश का नाम रोशन किया है।
- सुनील कुमार ने 87 किलोग्राम ग्रीको-रोमन वर्ग में फिलीपींस के पहलवान को तकनीकी श्रेष्ठता से हराया।
- वे लगातार दो एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले पहले भारतीय ग्रीको-रोमन पहलवान बन गए हैं।
- सुनील कुमार मूल रूप से हरियाणा के सोनीपत जिले के डाबरपुर गांव के निवासी हैं।
87 किलोग्राम वर्ग में हासिल की शानदार जीत
हिसार में मिली जानकारी के अनुसार, हरियाणा के 27 वर्षीय पहलवान सुनील कुमार ने पुरुषों के 87 किलोग्राम वर्ग में मुकाबला खेला। उन्होंने फिलीपींस के रॉबर्ट्स कालम जॉनस्टन को तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर हराकर यह कांस्य पदक अपने नाम किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ ही वे दो एशियाई खेलों में लगातार पदक जीतने वाले भारत के पहले ग्रीको-रोमन पहलवान बन गए हैं।
मुकाबले में शुरू से बनाए रखा दबदबा
इस रोमांचक मुकाबले में सुनील कुमार ने शुरुआत से ही अपना पूरा दबदबा बनाए रखा। उन्होंने सबसे पहले अपने प्रतिद्वंद्वी का दाहिना हाथ बांध दिया और उसे पटखनी देते हुए 4-0 की मजबूत बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद रक्षात्मक खेल खेल रहे जॉनस्टन को जमीन पर गिराते हुए सुनील ने लगातार स्कोरिंग मूव्स किए। उन्होंने मुकाबले के पहले ही पीरियड में शानदार प्रदर्शन करते हुए इस मुकाबले को अपने नाम कर लिया।
सुनील कुमार का परिचय और अर्जुन पुरस्कार
सुनील कुमार वर्तमान समय में भारतीय रेलवे में चीफ टिकट इंस्पेक्टर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। भारतीय ग्रीको-रोमन कुश्ती में उनके बेहतरीन योगदान को देखते हुए उन्हें वर्ष 2023 में प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। व्यक्तिगत रूप से वे हरियाणा के सोनीपत जिले के डाबरपुर गांव के रहने वाले हैं। उनकी इस बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि पर हरियाणा कुश्ती संघ के महासचिव राकेश सिंह सांगवान ने सुनील को बधाई दी है।
हांगझोउ खेलों की यादें और पिछली सफलता
सुनील कुमार ने इससे पहले चीन के हांगझोउ में आयोजित 2023 के एशियाई खेलों में भी कांस्य पदक अपने नाम किया था। उनके उस पदक से ग्रीको-रोमन कुश्ती में भारत का पूरे 13 साल पुराना पदक का लंबा इंतजार समाप्त हुआ था। आपको बता दें कि इससे पहले रविंद्र सिंह और सुनील कुमार ने साल 2010 के ग्वांग्झू एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता था।
पदक जीतने के बाद सुनील की प्रतिक्रिया
कांस्य पदक अपने नाम करने के बाद मीडिया से बातचीत में सुनील कुमार ने कहा कि वह इस जीत से खुश हैं, लेकिन पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जापानी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ उनके द्वारा पहले की गई गलती का उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ा था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उस मुकाबले में उन्होंने अपनी तकनीक की बजाय अपने दमखम का अधिक इस्तेमाल किया था।