सोनीपत जिला प्रशासन का कड़ा कदम, धान के अवशेष जलाने पर लगा प्रतिबंध

सोनीपत जिला प्रशासन का कड़ा कदम, धान के अवशेष जलाने पर लगा प्रतिबंध

सोनीपत जिलाधीश नेहा सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत एक बड़ा आदेश जारी किया है। इस आदेश के अनुसार जिला में धान की फसल की कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेष और अन्य प्रकार के फसल अवशेष जलाने पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह प्रतिबंध आदेश 21 सितंबर 2026 से शुरू होकर 21 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। आदेश का उल्लंघन करने वाले सभी लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

क्यों लगाया गया है फसल अवशेष जलाने पर प्रतिबंध

जारी किए गए आदेशों के अनुसार धान की कटाई के बाद कुछ किसानों द्वारा खेतों में बचे अवशेषों को जलाया जाता है। इस अवशेष को जलाने से बहुत अधिक धुआं यानी स्मॉग उत्पन्न होता है। यह स्मॉग वायु प्रदूषण को बढ़ाने का काम करता है और इसके साथ ही आम जनता के स्वास्थ्य पर भी बहुत बुरा यानी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसके अलावा खेतों में फसल अवशेष जलाने से अचानक आगजनी की घटनाएं भी हो जाती हैं। इन आगजनी की घटनाओं के कारण संपत्ति और मानव जीवन को भारी नुकसान होने की संभावना हमेशा बनी रहती है।

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मिट्टी की उर्वरता और पशुओं पर पड़ने वाला बुरा असर

खेतों में फसल अवशेष जलाने से पशुओं के चारे की उपलब्धता भी बुरी तरह प्रभावित होती है। इसके साथ ही खेत की मिट्टी में मौजूद मित्र कीट भी इस आग से नष्ट हो जाते हैं। मित्र कीटों के नष्ट होने के कारण मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता खत्म हो जाती है और आने वाली फसल के कुल उत्पादन पर भी बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी एनजीटी द्वारा भी फसल अवशेष जलाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने संबंधी आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। इन सभी निर्देशों में आदेश का उल्लंघन करने की स्थिति में कड़े दंड का भी पूरा प्रावधान किया गया है।

प्रशासन और सरकार द्वारा की जाने वाली सख्त कानूनी कार्रवाई

हरियाणा सरकार द्वारा भी राष्ट्रीय हरित अधिकरण एनजीटी के इन सभी निर्देशों की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। यदि कोई भी व्यक्ति इन सरकारी आदेशों की अवहेलना करता है तो उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 223 तथा वायु बचाव एवं प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1981 के तहत नियमानुसार कार्रवाई पूरी सख्ती के साथ अमल में लाई जाएगी।

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