सोनीपत: वर्ष 2017 के चर्चित दिनेश हत्याकांड में नाबालिग समेत छह दोषियों को उम्रकैद की सजा

सोनीपत में वर्ष 2017 के बहुचर्चित दिनेश हत्याकांड मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. जसबीर सिंह की अदालत ने गुरुवार को एक नाबालिग समेत छह आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने सभी छह दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा अदालत ने अलग-अलग धाराओं में सभी दोषियों पर कुल 55-55 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। घटना के समय नाबालिग रहे आरोपी के खिलाफ बाल न्याय कानून के तहत सुनवाई की गई थी।
घटना का विवरण और मुख्य मामला
खरखौदा क्षेत्र के गांव बरोणा निवासी दिनेश छह दिसंबर 2017 की रात अपने घर पर मौजूद था। आरोप था कि स्कॉर्पियो सवार हमलावर उसे जबरन उसके घर से उठाकर ले गए थे। जब दिनेश की मां कमला अपने बेटे को बचाने के लिए आगे आईं, तो हमलावरों ने उन्हें भी गोली मारकर घायल कर दिया था। इसके बाद हमलावर दिनेश को खींचकर गांव के अड्डे पर ले गए। वहां हमलावरों ने गोली मारकर दिनेश की हत्या कर दी और घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।
पुलिस जांच और गिरफ्तारी की प्रक्रिया
घटना के अगले दिन यानी सात दिसंबर को कमला के बयान के आधार पर थाना खरखौदा में हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने इस मामले की गहन जांच शुरू की। पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि दिनेश पर कुख्यात बदमाश रवि के चचेरे भाई दिनेश पर गोली चलाने का आरोप था। पुलिस ने जेल में बंद रवि से इस मामले में पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान हत्या कराने की बात सामने आई जिसके बाद पुलिस अन्य आरोपियों तक पहुंचने में कामयाब रही।
दोषियों के नाम और अदालत का फैसला
पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए मल्हा माजरा निवासी मदन, बड़वासनी निवासी पंकज, मंडोरा निवासी ललित, बरोणा निवासी विकास और एक अन्य विकास को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा घटना के समय नाबालिग रहे एक आरोपी को भी अपनी अभिरक्षा में लिया गया था। अदालत ने सभी छह आरोपियों को हत्या, हत्या के प्रयास, हत्या के उद्देश्य से अपहरण और घातक हथियार से दंगा करने के अपराध में दोषी माना है। अदालत ने हत्या के जुर्म में उम्रकैद और 25-25 हजार रुपये जुर्माना, धारा 148 के तहत तीन वर्ष का कठोर कारावास व पांच-पांच हजार रुपये, हत्या के प्रयास के मामले में 10 वर्ष का कठोर कारावास व 15 हजार रुपये तथा अपहरण के मामले में 10 वर्ष का कठोर कारावास व 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।