महात्मा ज्योतिबा फुले इंटरनेशनल स्किल सेंटर में बाबैन खंड के अध्यापकों को दी कौशल आधारित शिक्षा की जानकारी

महात्मा ज्योतिबा फुले इंटरनेशनल स्किल सेंटर में बाबैन खंड के अध्यापकों को दी कौशल आधारित शिक्षा की जानकारी
सुरेश अरोड़ा/बाबैन /16 सितंबर 2026 /अटल हिन्द ब्यूरो
महात्मा ज्योतिबा फुले इंटरनेशनल स्किल सेंटर में बाबैन खंड के अध्यापकों को कौशल आधारित शिक्षा की जानकारी दी गई है। आज के समय में युवाओं के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता ही पर्याप्त नहीं है। रोजगार की जरूरत के अनुरूप कौशल हासिल करना भी बहुत जरूरी है। इसी मुख्य उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए नवीन जिंदल फाउंडेशन की ओर से महात्मा ज्योतिबा फुले इंटरनेशनल स्किल सेंटर, बहलोलपुर में एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का विषय 21वीं सदी में सफलता की कुंजी कौशल विकास रखा गया था। इसमें बाबैन खंड के सरकारी और निजी विद्यालयों के अध्यापकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
बदलते रोजगार बाजार और तकनीकी प्रशिक्षण की जानकारी
इस संगोष्ठी के दौरान अध्यापकों को बदलते रोजगार बाजार की पूरी जानकारी दी गई। इसके साथ ही उद्योगों की आवश्यकताओं, व्यावसायिक शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के बारे में भी विस्तार से बताया गया। इस अवसर पर खंड शिक्षा अधिकारी सतेंद्र दहिया ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों को रोजगार के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्येक विद्यार्थी की रुचि और क्षमता बिल्कुल अलग होती है। शिक्षक विद्यार्थी की प्रतिभा को आसानी से पहचान सकते हैं और उसे सही करियर दिशा देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कौशल विकास से युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसरों के द्वार खुल जाते हैं।
युवाओं के लिए काउंसलिंग और भविष्य की योजनाएं
महात्मा ज्योतिबा फुले इंटरनेशनल स्किल सेंटर के उप प्रबंधक अभिषेक सहगल ने अध्यापकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को शिक्षा के साथ ऐसा कौशल प्रदान करना बहुत जरूरी है, जिससे वे अपना प्रशिक्षण पूरा करने के बाद रोजगार की दुनिया में पूरे आत्मविश्वास के साथ कदम रख सकें। उन्होंने बाबैन खंड के सभी अध्यापकों से एक विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि वे अपने-अपने विद्यालयों में ऐसे विद्यार्थियों की पहचान करें जो कौशल आधारित प्रशिक्षण हासिल करना चाहते हैं। इसके बाद वे उन विद्यार्थियों को महात्मा ज्योतिबा फुले इंटरनेशनल स्किल सेंटर में काउंसलिंग के लिए भेजें। उन्होंने बताया कि सेंटर में युवाओं की रुचि, योग्यता और करियर की संभावनाओं को पूरी तरह ध्यान में रखकर काउंसलिंग की जाएगी। इसके बाद युवाओं को उपयुक्त प्रशिक्षण पाठ्यक्रम चुनने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
नवीन जिंदल फाउंडेशन का मुख्य प्रयास और विचार
इस प्रक्रिया से युवाओं को अपनी क्षमता के अनुरूप कौशल हासिल करने में मदद मिलेगी। इससे उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर भी प्राप्त हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि नवीन जिंदल फाउंडेशन का यह निरंतर प्रयास है कि क्षेत्र के अधिक से अधिक युवा इस कौशल प्रशिक्षण से जुड़ें। साथ ही वे रोजगार के बदलते अवसरों का पूरा लाभ उठाएं। स्कूल स्तर पर अध्यापकों के सक्रिय सहयोग से ऐसे युवाओं तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। यह कदम इस पूरे अभियान को और भी अधिक प्रभावी बना सकता है। इस संगोष्ठी के दौरान आवेश सिंह और डॉ. राज कुमार ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कौशल विकास, रोजगारपरक प्रशिक्षण और कैरियर निर्माण के विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा किए। इस पूरी चर्चा के दौरान अध्यापकों ने कौशल आधारित शिक्षा को लेकर अपने विचार साझा किए। सभी ने विद्यार्थियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण से जोड़ने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।