सिरसा में सांसद कुमारी सैलजा का बयान, यूपीआई पर मर्चेंट शुल्क डिजिटल भुगतान को महंगा करने की शुरुआत

सिरसा में सांसद कुमारी सैलजा का बयान, यूपीआई पर मर्चेंट शुल्क डिजिटल भुगतान को महंगा करने की शुरुआत

सिरसा, 16 सितंबर। सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने एक बयान जारी करके केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने पहले देशवासियों को डिजिटल भुगतान और यूपीआई के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया और अब उसी व्यवस्था को कमाई का माध्यम बनाने की शुरुआत कर दी है। यह बयान बुधवार को जारी किया गया जिसमें उन्होंने सरकार की नई नीतियों पर सवाल उठाए हैं।

यूपीआई भुगतान पर एमडीआर लगाने का विरोध

सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि 15 अक्टूबर से दो हजार रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लगाने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय उपभोक्ताओं और व्यापारियों के हितों के पूरी तरह विपरीत है। सरकार इसे केवल व्यापारियों पर लगने वाला शुल्क बता रही है, जबकि बढ़ी लागत अंततः वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुंच सकती है। सांसद सैलजा ने मांग की है कि केंद्र सरकार यूपीआई मर्चेंट भुगतान पर प्रस्तावित एमडीआर को तत्काल वापस ले और डिजिटल भुगतान को पूरी तरह नि:शुल्क बनाए रखे।

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शुल्क से जुड़े प्रावधान और बड़े सवाल

सांसद सैलजा ने कहा कि सरकार के अनुसार व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले यूपीआई लेन-देन, दो हजार रुपये तक के मर्चेंट भुगतान तथा प्रतिमाह एक लाख रुपये तक यूपीआई भुगतान प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। इसके बावजूद बड़ा सवाल यह है कि जिस यूपीआई व्यवस्था को अब तक नि:शुल्क और जनहितैषी बताकर बढ़ावा दिया गया, उसमें शुल्क लगाने की आवश्यकता क्यों पड़ी। तीन हजार रुपये के भुगतान पर व्यापारी को 12 रुपये और 50 हजार रुपये के भुगतान पर दो सौ रुपये एमडीआर देना होगा। इसका असर देर-सवेर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है। सांसद ने बताया कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पहले ही सरकार को आगाह किया था कि नए प्रावधानों के माध्यम से यूपीआई पर शुल्क लगाने का रास्ता तैयार किया जा रहा है और अब उनकी आशंका सही साबित होती दिखाई दे रही है।

भाजपा सरकार के आर्थिक मॉडल पर सवाल

कुमारी सैलजा ने मांग की है कि केंद्र सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह नीति बनाते समय किन संस्थाओं और कंपनियों से विचार-विमर्श किया गया था। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का आर्थिक मॉडल आम जनता को राहत देने के बजाय उसकी जेब पर लगातार नया बोझ डाल रहा है। जीएसटी को लेकर उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी जीएसटी को पहले ही गब्बर टैक्स बता चुकी है, क्योंकि इसकी जटिलताओं और ऊंची दरों ने छोटे कारोबारियों तथा उपभोक्ताओं को बहुत प्रभावित किया है। बेरोजगारी दूर करने में पूरी तरह विफल रहने वाली सरकार अब डिजिटल लेन-देन के माध्यम से भी कमाई का रास्ता तलाश रही है।

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