साइबर ठगों का नया हथियार बनी एआई वॉयस क्लोनिंग, एसपी ने सिरसा में जारी की एडवाइजरी

सिरसा में साइबर धोखाधड़ी से बचने के लिए पुलिस अधीक्षक दीपक सहारण ने रविवार को एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने कहा कि साइबर ठग लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। अब ठगी के लिए एआई वॉयस क्लोनिंग का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
क्या है एआई वॉयस क्लोनिंग और कैसे होती है ठगी
इस नई तकनीक में साइबर अपराधी किसी भी व्यक्ति की आवाज की हूबहू नकल तैयार कर लेते हैं। इसके बाद वे उस व्यक्ति के रिश्तेदार, दोस्त या परिचित बनकर फोन करते हैं। फोन पर किसी बड़ी परेशानी का हवाला देकर तत्काल पैसों की जरूरत बताई जाती है और इस तरह ठगी का प्रयास किया जाता है।
एसपी ने आमजन को दी खास चेतावनी
पुलिस अधीक्षक दीपक सहारण ने आमजन को पूरी तरह सावधान करते हुए कहा कि यदि किसी परिचित या रिश्तेदार की आवाज में फोन आए। यदि वह व्यक्ति अचानक पैसों की मदद मांगे तो कभी भी जल्दबाजी में कोई कदम न उठाएं।
पैसे भेजने से पहले करें यह जरूरी काम
एसपी ने सलाह दी कि ऐसे मामलों में सबसे पहले संबंधित व्यक्ति से किसी दूसरे नंबर पर संपर्क करें। फोन पर बात करके पूरी सच्चाई की पुष्टि अवश्य करें। खासकर यदि फोन करने वाला तुरंत पैसे भेजने का लगातार दबाव बनाए, तो ऐसी स्थिति में अतिरिक्त सतर्कता बरतनी बहुत जरूरी है।
आवाज पहचानकर न करें भरोसा
एसपी ने स्पष्ट किया कि आज के समय में आधुनिक तकनीक के जरिए किसी की भी आवाज की नकल तैयार करना बिल्कुल संभव है। इसलिए केवल आवाज पहचानकर किसी व्यक्ति की पहचान पर आंख मूंदकर भरोसा करना बिल्कुल सुरक्षित नहीं है।
बैंक खाते और गोपनीय जानकारी रखें सुरक्षित
फोन पर कभी भी अपने बैंक खाते, एटीएम, ओटीपी, यूपीआई पिन या अन्य किसी भी तरह की गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया या मैसेजिंग एप के जरिए भेजे गए किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से हमेशा बचें।
अनजान व्यक्ति के कहने पर पैसे न करें ट्रांसफर
किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर करने से पहले पूरी तरह जांच-पड़ताल जरूर करें। सावधानी बरतकर ही इस प्रकार की साइबर धोखाधड़ी से बचा जा सकता है।