श्राद्ध पक्ष में पशु, पक्षी व पर्यावरण का रखें विशेष ध्यान, विश्व हिंदू परिषद नेता राजकुमार यादव की अपील

श्राद्ध पक्ष में पशु, पक्षी व पर्यावरण का रखें विशेष ध्यान, विश्व हिंदू परिषद नेता राजकुमार यादव की अपील

विश्व हिंदू परिषद भिवानी विभाग मंत्री राजकुमार यादव ने श्राद्ध पक्ष के अवसर पर समाज को एक विशेष संदेश दिया है। उन्होंने रेवाड़ी में कहा कि पितरों का तर्पण केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न होकर प्रकृति और जीव-जंतुओं की सेवा से भी जुड़ा है। ‘श्राद्ध’ शब्द का मूल आधार ‘श्रद्धा’ है। जब हम अपने दिवंगत पूर्वजों के प्रति आदर, कृतज्ञता और प्रेम व्यक्त करते हुए दान, तर्पण या पिंडदान करते हैं, तो उस पूरे कर्म को ‘श्राद्ध’ कहा जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अज्ञानवश लोग अक्सर बेसहारा गौ माता को कच्ची-पक्की मांडी अधिक मात्रा में खिलाते हैं। इससे उनके पेट में अफारा हो जाता है और कई बार उन्हें असहनीय पीड़ा के बाद प्राण त्यागने पड़ते हैं। इस प्रकार हम पुण्य की जगह पाप के भागी बन जाते हैं।

श्राद्ध पक्ष में इन बातों का रखें विशेष ध्यान

राजकुमार यादव ने अपील की कि श्राद्ध पक्ष में समाज को विशेष बातों पर ध्यान रखना चाहिए। गौ ग्रास के तहत मांडी का आकार 1 रुपये के सिक्के जितना छोटा हो और पूर्ण रूप से पका हुआ हो। साथ में हरा चारा या फल-सब्जी देना सर्वोत्तम होगा। वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण के तहत पितरों की स्मृति में पौधे लगाकर धरती को हरियाली से आच्छादित करना चाहिए। पशु-पक्षियों की सेवा के तहत जलपात्र रखना, पक्षियों के लिए दाना डालना, गौसेवा करना और बेसहारा जानवरों को भोजन उपलब्ध कराना जरूरी है। स्वच्छता अभियान के तहत मंदिर, नहर, नदियों, तालाबों और सार्वजनिक स्थलों की सफाई कर श्राद्ध को पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़ना चाहिए। सामाजिक जागरूकता के तहत श्राद्ध पक्ष को करुणा, सेवा और प्रकृति संरक्षण का पर्व बनाना चाहिए।

धर्म और प्रकृति दोनों का संतुलन है जरूरी

राजकुमार यादव ने कहा कि पितरों की सच्ची सेवा तभी पूर्ण होती है जब हम अपने मंदिरों, पशु-पक्षियों, पर्यावरण और जीव-जंतुओं की रक्षा भी करें। श्राद्ध पक्ष हमें धर्म और प्रकृति दोनों का संतुलन स्थापित करने का अवसर प्रदान करता है। यह संदेश समाज में पर्यावरण और जीवों के प्रति करुणा बढ़ाने का कार्य करता है।

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