हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, पीड़िता ने कोर्ट में की दुष्कर्म के प्रयास की धाराएं जोड़ने की मांग

हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, पीड़िता ने कोर्ट में की दुष्कर्म के प्रयास की धाराएं जोड़ने की मांग

चंडीगढ़ /28 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री और भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान संदीप सिंह के खिलाफ चल रहे यौन उत्पीड़न मामले में शिकायतकर्ता जूनियर कोच ने चंडीगढ़ की जिला अदालत में नई अर्जी दाखिल की है। महिला कोच ने मामले में दुष्कर्म के प्रयास की धाराएं जोड़ने की मांग की है। यह अर्जी अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय में लगाई गई है।

अर्जी में आईपीसी की धारा 376 और 511 जोड़ने की बात कही गई है। अदालत ने इस पर संदीप सिंह और यूटी पुलिस को नोटिस जारी कर दिया है। अगली सुनवाई 4 नवंबर को तय हुई है। इस दिन दोनों पक्षों को जवाब दाखिल करना होगा।

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फिलहाल संदीप सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 354, 354-ए, 354-बी, 342, 506 और 509 के तहत मामला चल रहा है। ये धाराएं छेड़छाड़, गलत तरीके से रोकने, धमकी और महिला की गरिमा ठेस पहुंचाने से जुड़ी हैं। इनमें कुछ जमानती और कुछ गैर-जमानती हैं।

महिला कोच का कहना है कि उनके साथ सिर्फ छेड़छाड़ नहीं हुई थी। दुष्कर्म का प्रयास भी किया गया था। इसलिए आरोपों की गंभीरता देखते हुए धारा 376 और 511 जोड़ी जानी चाहिए। पहले चंडीगढ़ पुलिस ने भी यही मांग की थी लेकिन निचली अदालत ने खारिज कर दी थी।

अब पीड़िता ने खुद अदालत का रुख किया है। उनकी तरफ से रिविजन अर्जी लगाई गई है। मामला अभी निचली अदालत में गवाही के चरण में है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में ट्रायल चल रहा है।

यह मामला करीब चार साल पुराना है। 1 जुलाई 2022 को घटना हुई बताई जाती है। हरियाणा खेल विभाग की एथलेटिक्स कोच ने तत्कालीन खेल मंत्री संदीप सिंह पर यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे। उन्होंने चंडीगढ़ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने 31 दिसंबर 2022 को केस दर्ज किया। महिला कोच के अनुसार संदीप सिंह ने उन्हें चंडीगढ़ के सेक्टर-7 स्थित अपने सरकारी आवास पर बुलाया था। वहां छेड़छाड़ की गई, विरोध करने पर धक्का दिया गया और टी-शर्ट फाड़ दी गई। वे किसी तरह वहां से निकलने में सफल रहीं।

पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद संदीप सिंह ने हरियाणा खेल मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। उनका कहना था कि यह उनके खिलाफ साजिश है। स्थानांतरण से नाराज होकर उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है। अभियोजन पक्ष का तर्क है कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री गंभीर आरोप दर्शाती है। पीड़िता का धारा 164 सीआरपीसी के तहत बयान और अदालत में दिया गया मुख्य परीक्षण शामिल है। मुख्य परीक्षण में पीड़िता अपने बयान पर कायम रहीं। इसी आधार पर आरोपों में संशोधन की मांग की गई थी।

बचाव पक्ष ने इस अर्जी का विरोध किया है। उनके वकील का कहना है कि यह कार्यवाही में देरी करने की रणनीति है। पूर्व ओलंपियन को झूठा फंसाया गया है। कोई ठोस साक्ष्य नहीं है जिससे धारा 376 सहपठित 511 का अपराध साबित हो। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि प्रारंभिक पुलिस शिकायत में ऐसे आरोपों का उल्लेख नहीं था। इसी तरह की एक अर्जी पहले भी दायर हुई थी जिसे 29 जुलाई 2024 को अदालत ने खारिज कर दिया था। उस आदेश को किसी ने चुनौती नहीं दी इसलिए वह अंतिम रूप ले चुका है।

पहले अभियोजन पक्ष ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में अर्जी लगाई थी। उसमें आरोप तय में संशोधन और मामला सत्र अदालत भेजने की मांग थी। अदालत ने उसे खारिज कर दिया। उसके बाद पीड़िता ने सेशन कोर्ट में रिविजन याचिका दायर की। अदालत अब यह देखेगी कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर दुष्कर्म प्रयास की धाराएं जोड़ी जा सकती हैं या नहीं। अगर जोड़ी जाती हैं तो मामला सत्र न्यायालय में विचारण के लिए भेजा जा सकता है। फिलहाल ट्रायल निचली अदालत में ही जारी है।

संदीप सिंह भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान रह चुके हैं। वे ओलंपियन भी हैं। राजनीतिक पद पर रहते हुए यह मामला सामने आया। घटना के समय वे हरियाणा सरकार में खेल मंत्री थे। सरकारी आवास पर बुलाए जाने का आरोप लगाया गया है। महिला कोच खेल विभाग में जूनियर स्तर पर काम कर रही थीं। शिकायत दर्ज कराने के बाद उन्होंने अदालत में भी अपना पक्ष रखा। अब उनकी अर्जी पर 4 नवंबर को सुनवाई होगी। दोनों पक्षों को मौका मिलेगा अपना जवाब पेश करने का।

मामले की सुनवाई चंडीगढ़ की अदालतों में हो रही है। पहले मजिस्ट्रेट अदालत में था। बाद में कुछ प्रक्रिया के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में स्थानांतरित हुआ। गवाही का क्रम चल रहा है। अभियोजन पक्ष दो अलग-अलग अर्जियां लगा चुका है। एक में आरोप संशोधन और दूसरी में सत्र अदालत भेजने की बात थी। निचली अदालत ने दोनों को खारिज किया। अब उच्चतर स्तर पर रिविजन चल रही है।

बचाव पक्ष लगातार कह रहा है कि कोई ठोस सबूत नहीं है। प्रारंभिक शिकायत में केवल छेड़छाड़ और कपड़े फाड़ने का जिक्र था। दुष्कर्म प्रयास का आरोप बाद में जोड़ा जा रहा है। इसलिए इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी। उपलब्ध बयानों और सबूतों के आधार पर फैसला करेगी। 4 नवंबर की तारीख महत्वपूर्ण है क्योंकि नोटिस का जवाब उसी दिन या उसके आसपास आ सकता है।

यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर पहले भी चर्चा में रहा है। पूर्व मंत्री और हॉकी खिलाड़ी होने के कारण मीडिया में कवरेज मिला। दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पर कायम हैं। पीड़िता गंभीर आरोप लगा रही हैं जबकि आरोपी सब कुछ झूठा बता रहे हैं। अभी अदालती प्रक्रिया जारी है। कोई अंतिम फैसला नहीं आया है। अर्जी स्वीकार होती है या नहीं, यह अदालत तय करेगी। मामले की आगे की प्रगति 4 नवंबर की सुनवाई के बाद साफ होगी।

संदीप सिंह के खिलाफ दर्ज धाराओं में कुछ गैर-जमानती हैं। इसलिए मामला गंभीर माना जा रहा है। पीड़िता की नई अर्जी से जटिलता बढ़ सकती है। अगर धाराएं जुड़ती हैं तो सजा का प्रावधान भी बदल जाएगा। घटना का स्थान चंडीगढ़ सेक्टर-7 का सरकारी आवास बताया गया है। समय जुलाई 2022 है। शिकायत उसी साल दिसंबर में दर्ज हुई। इस्तीफा भी उसी दौरान दिया गया। तब से ट्रायल चल रहा है।

महिला कोच ने अपनी शिकायत में विस्तार से बताया था कि कैसे बुलाया गया और क्या हुआ। अदालत में भी मुख्य परीक्षण के दौरान वही बातें दोहराईं। अभियोजन पक्ष इन्हीं बातों को आधार बनाकर नई धाराएं मांग रहा है। बचाव पक्ष बार-बार कह रहा है कि यह साजिश है। स्थानांतरण संबंधी नाराजगी का जिक्र किया जा रहा है। अदालत को सबूतों के आधार पर ही फैसला करना होगा। भावनाओं या पद के आधार पर नहीं।

अभी तक निचली अदालत ने दुष्कर्म प्रयास की धाराएं जोड़ने से इनकार किया है। अब सेशन कोर्ट में रिविजन लंबित है। अदालत नोटिस जारी कर चुकी है इसलिए प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। दोनों पक्षों के वकील सक्रिय हैं। पीड़िता के वकील समीर सेठी ने अर्जी दाखिल की है। बचाव पक्ष पहले भी विरोध दर्ज करा चुका है। अब नए नोटिस पर जवाब आएगा।

मामला यौन उत्पीड़न से जुड़ा है इसलिए अदालत संवेदनशीलता से देखती है। साथ ही आरोपी के अधिकारों का भी ध्यान रखा जाता है। दोनों पक्षों को पूरा मौका मिलना जरूरी है।

4 नवंबर को सुनवाई के बाद अदालत आगे की तारीख तय कर सकती है। या फिर कोई अंतरिम आदेश भी दे सकती है। फिलहाल इतना ही पता है कि अर्जी विचाराधीन है और नोटिस जारी हो चुके हैं। संदीप सिंह खेल जगत से राजनीति में आए। हॉकी में अच्छा रिकॉर्ड रहा। मंत्री पद पर रहते हुए यह विवाद सामने आया। इस्तीफे के बाद वे सक्रिय राजनीति से कुछ दूर रहे लेकिन मामला अदालत में बना हुआ है।

पीड़िता खेल विभाग की कोच हैं। उन्होंने अपनी नौकरी और सुरक्षा का ख्याल रखते हुए शिकायत की। अदालत में भी बयान दिए। अब खुद अर्जी लगाकर धाराएं जोड़ने की मांग कर रही हैं। पुलिस ने शुरू में उपलब्ध शिकायत के आधार पर धाराएं लगाईं। बाद में अभियोजन पक्ष ने अतिरिक्त धाराएं मांगीं। निचली अदालत ने नहीं माना। अब उच्च स्तर पर मामला पहुंचा है।

यह पूरी प्रक्रिया कानूनी रूप से चल रही है। कोई पक्ष अदालत के बाहर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा जो मामले को प्रभावित करे। सब कुछ अदालती रिकॉर्ड पर आधारित है। अंत में अदालत ही तय करेगी कि धारा 376 और 511 जुड़ेंगी या नहीं। उपलब्ध बयान, सबूत और कानूनी प्रावधान देखे जाएंगे। 4 नवंबर की सुनवाई इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।

मामले की पूरी पृष्ठभूमि यही है। जुलाई 2022 की घटना, दिसंबर 2022 की शिकायत, इस्तीफा, ट्रायल, खारिज अर्जी और अब नई रिविजन। चंडीगढ़ अदालत में प्रक्रिया जारी है। दोनों पक्ष अपने तर्क रख रहे हैं। आगे की खबर अदालती आदेश के बाद ही आएगी।

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