रेवाड़ी के गांव भाड़ावास में श्मशान भूमि पर ओपन जिम बनने से ग्रामीण नाराज, पंचायत के फैसले पर उठे सवाल

रेवाड़ी जिले के गांव भाड़ावास में ग्रामीणों को स्वस्थ रखने के उद्देश्य से बनाई गई ओपन जिम अब सवालों के घेरे में आ गई है। पंचायत ने जिस स्थान पर इस जिम का निर्माण कराया है, वह गांव की श्मशान भूमि है। रविवार के दिन ग्रामीणों ने यह बात खुलकर सामने रखी है कि श्मशान परिसर में जिम बनने के कारण अंतिम संस्कार में आने वाले लोगों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
टीनशेड के नीचे लगाए गए जिम के उपकरण
ग्रामीणों ने रविवार को इस बात की जानकारी दी है कि जिम के सभी उपकरण उसी टीनशेड के नीचे लगाए गए हैं, जहां पर पहले अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। जिम बनने के बाद अब टीनशेड के भीतर बैठने के लिए पर्याप्त जगह बिल्कुल नहीं बची है। ग्रामीणों का यह साफ कहना है कि यदि यह जिम गांव के अंदर किसी अन्य सार्वजनिक स्थान पर बनाई जाती, तो बच्चे, युवा और अन्य सभी ग्रामीण इसका उपयोग बहुत बेहतर तरीके से कर पाते। मौजूदा समय में इस गलत स्थान को लेकर लोग जिम में व्यायाम करने के लिए जाने से भी पूरी तरह परहेज कर रहे हैं।
श्मशान भूमि का विवरण और खर्च
उपलब्ध जानकारी के अनुसार शाहजहांपुर रोड के बिल्कुल किनारे पर गांव की करीब आधा एकड़ श्मशान भूमि मौजूद है। इस जगह पर पिछले कई वर्षों से लगातार अंतिम संस्कार होते आ रहे हैं। इस पूरे परिसर के भीतर कुल तीन टीनशेड बने हुए हैं। इनमें से दो शेड अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यों के लिए उपयोग होते हैं, जबकि एक शेड विशेष रूप से लोगों के बैठने के लिए बनाया गया था।
चार महीने पहले शुरू हुआ था निर्माण कार्य
आज से करीब चार महीने पहले पंचायत के द्वारा इसी परिसर के अंदर ओपन जिम बनाने का काम शुरू कराया गया था। जिम के उपकरण लगाने के साथ-साथ इस पूरे परिसर में टाइल भी बिछाने का काम किया गया है। इस पूरे निर्माण कार्य पर करीब आठ लाख रुपये का खर्च आने की बात सामने आई है।
सरपंच और डीडीपीओ का पक्ष
गांव के सरपंच सुनील कुमार ने इस मामले पर बताया है कि सरकार के स्पष्ट निर्देशों के तहत ही गांवों के अंदर ओपन जिम बनाई जा रही हैं। इसके लिए लगभग 450 वर्ग गज जमीन की आवश्यकता होती है। पंचायत के पास अन्य किसी भी स्थान पर इतनी बड़ी जमीन उपलब्ध नहीं थी। इसी मुख्य कारण के चलते पंचायत को श्मशान भूमि में ही जिम बनाने का कड़ा निर्णय लेना पड़ा। वहीं दूसरी तरफ, डीडीपीओ नरेंद्र ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की बात कही है।