रेवाड़ी की लाला शंभूदयाल धर्मशाला में श्रीमद्भागवत कथा का पंचम दिवस संपन्न, कथावाचक ने सुनाई गिरिराज पूजन की कथा

अटल हिन्द के लिए मनोज गोयल की रिपोर्ट के अनुसार, रेवाड़ी के आदर्श गांव गुड़ियानी के पुराने मुख्य बाजार स्थित लाला शंभूदयाल धर्मशाला में श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन के पंचम दिवस पर कथावाचक राम जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के ब्रज आगमन, गिरिराज पूजन और इंद्र के अहंकार के प्रसंग की कथा विस्तार से सुनाई। श्रद्धालुओं ने इस कथा का पूरा आनंद लिया।
- श्रीकृष्ण का ब्रज आगमन और मंगलगान
- गिरिराज पूजन और छप्पन भोग का प्रसंग
- इंद्र के अहंकार का नाश और गिरधारी नाम
भगवान श्रीकृष्ण के ब्रज आने पर हुआ आनंद
कथावाचक राम जी महाराज ने कथा के दौरान बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के ब्रज और गोकुल में अवतार लेकर आने के बाद पूरा ब्रज आनंद से भर गया था। गोपियां भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में तरह-तरह के मंगलगान करने लगी थीं। गोपियां नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की जैसे भजन गाकर अपनी खुशी प्रकट कर रही थीं।
गिरिराज पूजन का विशेष महत्व
राम जी महाराज ने आगे बताया कि श्रीमद्भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण के गिरिराज पूजन का प्रसंग विशेष महत्व रखता है। भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को प्रेरित किया था। उन्होंने ब्रजवासियों से कहा कि वे इंद्र की पूजा करने के स्थान पर गिरिराज महाराज की पूजा करें। इसके बाद सभी ब्रजवासियों ने मिलकर गिरिराज महाराज का पूजन किया। इस दौरान ब्रजवासियों ने गिरिराज महाराज को छप्पन प्रकार के मिष्ठानों का भोग लगाया।
इंद्र का अहंकार हुआ दूर
कथावाचक ने भक्तों को जानकारी देते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने गिरिराज पूजन के माध्यम से इंद्र के अहंकार को दूर किया था। इसी विशेष प्रसंग के दौरान भगवान श्रीकृष्ण को गिरधारी नाम भी प्राप्त हुआ। कथा के दौरान सभी उपस्थित श्रद्धालुओं ने बड़े ही भक्तिभाव के साथ श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया।