तरावड़ी में रक्षाबंधन पर्व पर बहनों ने साझा किए विचार, कहा कलाई पर सजेगा प्यार और रिश्तों में घुलेगी मिठास

तरावड़ी में रक्षाबंधन पर्व पर बहनों ने साझा किए विचार, कहा कलाई पर सजेगा प्यार और रिश्तों में घुलेगी मिठास

रक्षाबंधन : कलाई पर सजेगा बहनों का प्यार, रिश्तों में घुलेगी मिठास

बहनें बोली : बचपन की यादें ताजा करता है रक्षाबंधन, राखी में छिपा है भावनाओं का संसार

तरावड़ी/27 अगस्त 2026/रोहित लामसर/अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

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रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और स्नेह का ऐसा पर्व है, जिसका इंतजार हर भाई-बहन को पूरे साल रहता है। राखी के पवित्र धागे में केवल भाई की लंबी उम्र और खुशहाली की कामना ही नहीं, बल्कि बचपन की यादें, अपनापन और जीवनभर साथ निभाने का भाव भी जुड़ा होता है। बदलते दौर में रक्षाबंधन मनाने के तौर-तरीके जरूर बदले हैं, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते की मिठास आज भी बरकरार है। रक्षाबंधन को लेकर महिलाओं ने अपने विचार साझा किए और बताया कि उनके लिए इस पर्व का क्या महत्व है।

रिश्तों की डोर सबसे मजबूत : प्रेक्षा गोयल
डबल चाबी बासमती राईस की डायरेक्टर प्रेक्षा गोयल ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और अपनापन मजबूत करने का दिन है। बदलते समय के साथ त्योहार मनाने के तरीके बदले हैं, लेकिन रिश्तों की मिठास आज भी वही है।

प्रेक्षा गोयल।

बचपन की यादें ताजा करता है रक्षाबंधन : सोनम कबीरपंथी
भाजपा नेत्री सोनम कबीरपंथी ने कहा कि रक्षाबंधन आते ही बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं। भाई-बहन का आपसी प्यार, राखी बांधने की खुशी और मिठाई खिलाने के वे पल आज भी मन को भावुक कर देते हैं। आज के समय में रक्षाबंधन का अर्थ केवल बहन की रक्षा का वचन लेना नहीं होना चाहिए। भाई और बहन दोनों एक-दूसरे की ताकत बनें और हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ दें।

राखी में छिपा है भावनाओं का संसार : चारू बंसल
जी.वी. राईस यूनिट से चारू बंसल ने कहा कि रक्षाबंधन हमें बेटियों और महिलाओं के सम्मान का संदेश भी देता है। समाज में ऐसा माहौल बने जहां हर बेटी खुद को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे, तभी इस पर्व की सार्थकता पूरी होगी। राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसमें भाई-बहन की वर्षों पुरानी भावनाएं जुड़ी होती हैं। यह त्योहार हमें रिश्तों को समय देने और उन्हें सहेजकर रखने की प्रेरणा देता है।

असली खुशी रिश्तों में है, तस्वीरों में नहीं : मीनू तायल
न्यू कैम ऑयल प्रा.लि. से मीनू तायल ने कहा कि आज त्योहारों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालने की होड़ रहती है। रक्षाबंधन पर जरूरी है कि मोबाइल से ज्यादा समय परिवार और भाई-बहन के साथ बिताया जाए, क्योंकि असली खुशी रिश्तों में है, तस्वीरों में नहीं।्र

बहनों को भी दें बराबरी का सम्मान : डा. कशिश सलूजा
सामाजिक संस्थाओं से जुड़ी डा. कशिश सलूजा ने कहा कि इस बार रक्षाबंधन पर हमें ऐसी राखियों को बढ़ावा देना चाहिए जो पर्यावरण के अनुकूल हों। स्थानीय कारीगरों और महिलाओं द्वारा तैयार की गई राखियां खरीदकर हम त्योहार के साथ-साथ स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा बहनों को भी बराबरी का सम्मान देना चाहिए।

बहनों के सम्मान और खुशियों का ध्यान रखें भाई : सविता जांगडा
अध्यापक सविता जांगड़ा ने कहा कि रक्षाबंधन का पर्व हमें यह सोचने का अवसर देता है कि परिवार में बेटियों और बहनों को भी बराबरी के अधिकार और अवसर मिलें। केवल राखी के दिन नहीं, बल्कि पूरे वर्ष बहनों के सम्मान और खुशियों का ध्यान रखना चाहिए। रक्षाबंधन की खुशी महंगे उपहारों पर निर्भर नहीं है। भाई-बहन का प्यार और एक-दूसरे के प्रति सम्मान ही सबसे बड़ा उपहार है।

बहन की दुआ जीवनभर साथ रहने वाली पूंजी : ज्योति बंसल
जी.वी. राईस यूनिट से ज्योति बंसल ने कहा कि बहन के लिए भाई की कलाई पर राखी बांधना सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि उसकी खुशहाली और सफलता की कामना भी है। बहन की दुआ और भाई का प्यार जीवनभर साथ रहने वाली पूंजी है। उन्होंने कहा कि बहनों का सम्मान होना सबसे पहले जरूरी है।

बचपन से बुढ़ापे तक कायम रहता रिश्ता : भावना मिड्डा
सामाजिक संस्थाओं से जुड़ी भावना मिड्डा ने कहा कि राखी बांधते समय भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है, लेकिन आज रक्षा का अर्थ केवल सुरक्षा नहीं है। बहन की शिक्षा, सम्मान, आत्मनिर्भरता और उसके सपनों में साथ देना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि भाई-बहन का रिश्ता बचपन से बुढ़ापे तक कायम रहता है।

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