हरियाणा के किसानों को अब अपने अधिकारों के लिए लड़ना पड़ रहा है: राकेश टिकैत

भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत ने रविवार को यमुनानगर में किसानों की एक महापंचायत को संबोधित किया। यह महापंचायत धान खरीद और गन्ने के दामों से जुड़े मुद्दों को लेकर आयोजित की गई थी। राकेश टिकैत ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) किसानों की मांगें पूरी न होने पर एक बड़ा कदम उठाने पर फैसला करेगा।
हरियाणा के किसानों की मुश्किलें और राकेश टिकैत का बयान
एएनआई से बात करते हुए टिकैत ने कहा कि हरियाणा भर के किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने चिंता जताई कि राज्य के किसानों को अब अपने अधिकारों के लिए विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। टिकैत ने कहा कि हम यमुनानगर आए हैं और हरियाणा भर के किसान मुश्किलों में हैं। यह वही हरियाणा है जिस पर हम भरोसा करते थे। यह वह जगह थी जहां उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसान भी अपनी फसल बेचने आते थे।
पोर्टल और जटिल प्रक्रियाओं पर उठाए गए सवाल
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसान हरियाणा से सस्ता डीजल और उर्वरक खरीदते थे। आज यह देखना बेहद दुखद और पीड़ादायक है कि हरियाणा को खुद अपने अधिकारों के लिए लड़ना पड़ रहा है। टिकैत ने कहा कि हरियाणा पहले गन्ने और धान के लिए अनुकूल दरें देने के लिए जाना जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि पोर्टल और जटिल प्रक्रियाओं के कारण अब किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
पूंजीपतियों की सरकार और काले कानूनों के आरोप
टिकैत ने कहा कि हम कहा करते थे कि हरियाणा गन्ने और धान के सर्वोत्तम भाव देता है। वहां पोर्टल या जटिल प्रक्रियाओं की परेशानी के बिना कोई भी आसानी से जाकर अपनी उपज बेच सकता था। फिर भी स्थिति ऐसी हो गई है कि राज्य के किसानों को अब अपने ही कारण के लिए लड़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पूंजीपतियों के हितों के लिए काम कर रही है।
सड़कों को जाम करने और प्रशासन पर सवाल
टिकैत ने कहा कि यह पूंजीपतियों की सरकार है और यह पूरी तरह से केवल उन्हें फायदा पहुँचाने के लिए काम करती है। ये वही तीन कृषि कानून हैं जिनकी बात हो रही है जिन्हें उन्होंने काले कानून कहा था। अभी भी सरकार उन काले कानूनों के आधार पर ही काम करना जारी रखे हुए है। विरोध प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम करने के सवाल पर टिकैत ने सवाल किया कि किसानों ने कहां सड़क जाम की थी।
एसकेएम की आगामी बैठक और बड़ा फैसला
उन्होंने कहा कि अधिकारी शुरुआत में उनसे मिलने बाहर नहीं आए थे। अधिकारियों को अब पता चला है कि चिलचिलाती धूप में किसान के बैठने पर कैसा महसूस होता है। टिकैत ने कहा कि किसानों ने अपनी मांगें रख दी हैं और अगले दिन तक जिला मजिस्ट्रेट और स्थानीय डिप्टी कमिश्नर के साथ बैठक की मांग की है। साथ ही स्थानीय किसानों के लिए मुख्यमंत्री के साथ एक अपॉइंटमेंट की मांग भी की है।
उन्होंने कहा कि हमने यहां केवल अपनी मांगें रखी हैं। वे कल तक डीएम और स्थानीय डीसी के साथ बैठक की व्यवस्था करवाएं और स्थानीय किसानों के लिए मुख्यमंत्री से अपॉइंटमेंट पक्की करें। उन्होंने कहा कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो एसकेएम 12 अक्टूबर को अपनी तय बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा करेगा और एक बड़े कदम की घोषणा करेगा। अन्यथा एसकेएम की 12 तारीख को बैठक तय है और वह एक बड़े कदम की घोषणा करेगा।