पंजाब में नशा-मुक्त के दावों पर उठे सवाल, जेलों में 45 प्रतिशत कैदी नशा-निर्भरता के इलाज पर

पंजाब में नशे के खात्मे के दावे कर रही भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार के सामने अदालत में प्रस्तुत आंकड़ों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पंजाब सरकार द्वारा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दी गई जानकारी के अनुसार, 35,449 जेल कैदियों में से 15,768 कैदी ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट के लिए पंजीकृत हैं, जो लगभग 45 प्रतिशत है। हाईकोर्ट ने नशा-निर्भर कैदियों के उपचार और पुनर्वास के लिए रोडमैप भी मांगा है।
भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा पंजाब के उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ ने कहा कि सरकार को प्रचार और आंकड़ों से आगे बढ़कर वास्तविक परिणामों का हिसाब जनता को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हजारों एफआईआर और गिरफ्तारियां गिनाने से पंजाब नशा-मुक्त नहीं होगा। असली सवाल यह है कि नशे की उपलब्धता, खपत, निर्भरता और नशे के कारण होने वाली मौतों में कितनी कमी आई है।
ताजा पुलिस आंकड़ों के अनुसार, 1 मार्च 2025 से 10 सितंबर 2026 तक 60,582 एफआईआर दर्ज की गईं। इस दौरान 79,784 कथित नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया और 3,803 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई। कैंथ ने कहा कि ये कार्रवाई के आंकड़े हैं, नशा-मुक्ति के परिणामों के नहीं। पंजाब सरकार को यह भी बताना चाहिए कि नशा रोकथाम, उपचार और पुनर्वास पर किए जा रहे सरकारी खर्च के मापनीय परिणाम क्या हैं।
उन्होंने सरकार से सीधे सवाल किया कि युद्ध नशों के विरुद्ध अभियान के बाद नशे की वास्तविक खपत और उपलब्धता कितनी कम हुई? उपचार शुरू करने वाले कितने मरीज पूरी तरह नशा-मुक्त होकर पुनर्वासित हुए? बड़े नशा तस्करी नेटवर्कों की कितनी संपत्तियां जब्त की गईं और कितने मामलों में दोषसिद्धि हुई? नशा रोकथाम, उपचार और पुनर्वास पर कितना सरकारी धन खर्च किया गया?
कैंथ ने कहा कि सरकार को जिला-वार मौतों, उपचार, पुनर्वास, गिरफ्तारियों और दोषसिद्धियों के आंकड़ों सहित पंजाब ड्रग क्राइसिस व्हाइट पेपर जारी करना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने बताया कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा नशे के खिलाफ जन-जागरूकता के लिए चलाई जा रही नशा-मुक्त पंजाब यात्रा 28 सितंबर को सुबह 10:00 बजे नाभा के गांव थूही पहुंचेगी। उन्होंने लोगों से इस अभियान से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि इसका नारा भाजपा का नारा, नशा मिटाना सारा है।
कैंथ ने कहा कि पंजाब की माताओं को राजनीतिक नारे नहीं, अपने बच्चों के लिए नशे से आजादी चाहिए। सरकार को एफआईआर की संख्या नहीं, नशे की मांग और निर्भरता में आई वास्तविक कमी का हिसाब देना होगा। उन्होंने भगवंत मान सरकार से स्वतंत्र सामाजिक एवं प्रशासनिक ऑडिट करवाने तथा पंजाब की जनता के सामने विस्तृत व्हाइट पेपर प्रस्तुत करने की मांग की है।