परभणी के हनुमान मंदिर में बड़ा हादसा: छत गिरने से 5 श्रद्धालुओं की मौत, 18 घायल;

परभणी के हनुमान मंदिर में बड़ा हादसा: छत गिरने से 5 श्रद्धालुओं की मौत, 18 घायल;

परभणी में हनुमान मंदिर के सभा मंडप की छत गिरने से 5 श्रद्धालुओं की मौत, 18 घायल

रिपोर्टर: अटल हिन्द टीम

परभणी (महाराष्ट्र): परभणी जिले के यशवाड़ी गांव में शनिवार दोपहर को हनुमान मंदिर के सभा मंडप की छत गिरने से एक बड़ा हादसा हो गया। इस दुर्घटना में 5 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 18 अन्य घायल हुए हैं। मलबे में कई लोग अभी भी फंसे हुए हैं, जिससे मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है।

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पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, हादसा यशवाड़ी गांव के हनुमान मंदिर में शनिवार दोपहर करीब 3:30 बजे हुआ। मंदिर का सभा मंडप (बाहरी हॉल) renovation के तहत नवीनीकरण कार्य चल रहा था। नई छत को सेंटरिंग और बांस के सहारे सहारा दिया गया था, जो अचानक टूट गया और छत ढह गई।

शनिवार को हनुमान जी का दिन होने के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की अच्छी खासी भीड़ थी। अब तक मलबे से करीब 25 लोगों को बचाया जा चुका है। बचाव कार्य जारी है और स्थानीय पुलिस व जिला प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद हैं।

मृतकों की पहचान
मृतकों की पहचान संतोष गदाडे, आकाश सुरदुसे, मुनेश अग्रवाल, सूरज पोपटकर और श्रीकृष्ण गवारे के रूप में हुई है।

मुख्यमंत्री का दुख व्यक्त, मुआवजे की घोषणा
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि घायलों को तत्काल बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

यशवाड़ी गांव छत्रपति संभाजीनगर से करीब 190 किलोमीटर दूर मनवत रोड पर स्थित है। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों में लापरवाही संभव कारण हो सकती है।

भारत में पिछले कुछ वर्षों में मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर भगदड़ (Stampede) और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के गिरने की कई दुखद घटनाएं हुई हैं। इन घटनाओं ने सुरक्षा ऑडिट, भीड़ प्रबंधन और संरचनात्मक सुरक्षा (Structural Safety) के मानकों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

ऐसी प्रमुख घटनाओं का विवरण नीचे दी गई तालिका में है:

घटना का वर्ष स्थान / मंदिर राज्य घटना का प्रकार विवरण
2022 माता वैष्णो देवी जम्मू-कश्मीर भगदड़ नववर्ष की पूर्व संध्या पर अत्यधिक भीड़ के कारण हुई भगदड़ में 12 श्रद्धालुओं की मौत।
2022 बांके बिहारी मंदिर उत्तर प्रदेश दम घुटने से जन्माष्टमी के दौरान अत्यधिक भीड़ के कारण दम घुटने से 2 लोगों की मृत्यु।
2016 पुत्तिंगल मंदिर केरल आग लगना आतिशबाजी के दौरान हुए भीषण विस्फोट में मंदिर का हिस्सा ढह गया, 100 से अधिक लोगों की मौत।
2014 रतनगढ़ माता मंदिर मध्य प्रदेश भगदड़ भीड़ के कारण पुल पर दबाव बढ़ा, जिससे अफरातफरी मच गई; कई लोगों की जान गई।
2013 दतिया (रतनगढ़) मध्य प्रदेश भगदड़ पुल टूटने की अफवाह के बाद हुई भगदड़ में 115 से अधिक श्रद्धालुओं की मृत्यु।
2013 नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश भगदड़ मंदिर परिसर में मची भगदड़ में कई श्रद्धालुओं की मौत।
2008 चामुंडा देवी मंदिर राजस्थान भगदड़ मेहरानगढ़ किले में स्थित मंदिर में भारी भीड़ के कारण मची भगदड़ में 200 से अधिक मौतें।

यह घटना मंदिरों में चल रहे नवीनीकरण कार्यों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे बचाव कार्य में सहयोग करें और अफवाहों से बचें।

इन घटनाओं के पीछे के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों और जांच रिपोर्टों के अनुसार, इन हादसों के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण जिम्मेदार रहे हैं:

भीड़ प्रबंधन का अभाव: त्यौहारों या विशेष तिथियों पर क्षमता से अधिक लोगों का प्रवेश।

पुराने बुनियादी ढांचे (Infrastructure): कई मंदिर सदियों पुराने हैं, जिनका समय-समय पर ‘स्ट्रक्चरल ऑडिट’ नहीं किया जाता।

मरम्मत कार्यों में लापरवाही: परभणी की घटना की तरह, अक्सर मरम्मत या नवीनीकरण के दौरान सुरक्षा मानकों (Safety Protocols) का पालन नहीं किया जाता।

निकासी मार्गों की कमी: आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने के लिए सुरक्षित और पर्याप्त चौड़े रास्तों का अभाव।

प्रशासनिक और प्रबंधन चूक: मंदिर ट्रस्टों द्वारा सुरक्षा के बजाय केवल चढ़ावे और दान पर अधिक ध्यान केंद्रित करना, जिससे सुरक्षा ऑडिट की अनदेखी होती है।

सुरक्षा के लिए क्या आवश्यक है?
इन दर्दनाक हादसों से बचने के लिए विशेषज्ञों का मानना है कि निम्नलिखित कदम उठाए जाने चाहिए:

अनिवार्य स्ट्रक्चरल ऑडिट: सार्वजनिक उपयोग वाले सभी धार्मिक स्थलों का हर 2-3 साल में इंजीनियरों द्वारा ऑडिट हो।

क्राउड कंट्रोल सिस्टम: भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक बैरिकेडिंग और टोकन सिस्टम का उपयोग।

इमरजेंसी एक्जिट: प्रत्येक मंदिर परिसर में आपातकालीन निकासी द्वार अनिवार्य होने चाहिए।

प्रशासनिक जवाबदेही: मंदिर प्रबंधन समिति और स्थानीय प्रशासन को सुरक्षा खामियों के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

 

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