पलवल में ड्रोन की कमान संभालकर शालू रानी ने दिखाई आत्मनिर्भरता की राह, कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का कर रहीं इस्तेमाल

सेवा संकल्प अभियान के तहत लाभार्थियों के जीवन में आए बदलाव की कहानियां लगातार साझा की जा रही हैं। इसी कड़ी में पलवल से शालू रानी की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। शालू रानी ने नमो ड्रोन दीदी के रूप में कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को अपनाया है। उन्होंने आत्मनिर्भरता की दिशा में एक नया और महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है।
खेतों में ड्रोन से हो रहा है दवाइयों का छिड़काव
ड्रोन के माध्यम से शालू रानी खेतों में दवाइयों एवं अन्य कृषि उपयोगी सामग्री का छिड़काव कर रही हैं। इस कार्य में वह सीधे तौर पर किसानों की मदद कर रही हैं। शालू रानी ने बुधवार को जानकारी देते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बताया कि महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में यह योजना काम कर रही है। नमो ड्रोन दीदी योजना से महिलाओं के लिए रोजगार की नई संभावनाएं खुली हैं।
कृषि कार्यों में आधुनिक तकनीक का उपयोग
सरकार द्वारा उन्हें एक अत्याधुनिक ड्रोन उपलब्ध कराया गया है। इस ड्रोन के माध्यम से उन्हें कृषि कार्यों में आधुनिक तकनीक का उपयोग करने का सुनहरा अवसर मिला है। ड्रोन की मदद से खेतों में छिड़काव का काम बहुत ही कम समय में पूरा हो जाता है। यह तरीका किसानों के लिए और अधिक सुविधाजनक साबित हो रहा है। पारंपरिक तरीकों की तुलना में ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल से किसानों का समय और मेहनत दोनों बच रहे हैं। इसके अलावा खेतों में दवाइयों के छिड़काव के दौरान पानी की खपत कम करने में भी बहुत मदद मिल रही है। आधुनिक तकनीक के इस बेहतरीन उपयोग से कृषि कार्यों को और अधिक सुगम बनाने में पूरी सहायता मिल रही है।
महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं शालू रानी
शालू रानी ने स्पष्ट रूप से कहा कि नमो ड्रोन दीदी योजना ने महिलाओं को कृषि क्षेत्र में एक नई भूमिका निभाने का शानदार अवसर दिया है। ड्रोन का संचालन सीखने से उनका खुद का आत्मविश्वास काफी ज्यादा बढ़ गया है। वह अब आर्थिक रूप से मजबूत बनने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही हैं। उनका यह पूरा अनुभव यह साफ बताता है कि महिलाएं आधुनिक तकनीक को अपनाकर कृषि क्षेत्र में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। शालू रानी ने अन्य सभी महिलाओं से भी नमो ड्रोन दीदी योजना का पूरा लाभ उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को कृषि क्षेत्र में होने वाले इस तकनीकी बदलाव का सक्रिय सहभागी बनना चाहिए। महिलाओं की इस प्रकार की सक्रिय भागीदारी से समाज में आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण को और अधिक मजबूती मिल सकती है।