नूंह में पराली प्रबंधन को लेकर प्रशासन सतर्क, मुख्य सचिव की समीक्षा बैठक के बाद एक्शन प्लान तैयार

नूंह में पराली प्रबंधन को लेकर प्रशासन सतर्क, मुख्य सचिव की समीक्षा बैठक के बाद एक्शन प्लान तैयार

हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश में धान फसल अवशेष प्रबंधन एवं पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में प्रदेश के सभी जिलों के उपायुक्तों ने भाग लिया। नूंह जिले से उपायुक्त अखिल पिलानी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस बैठक में शामिल हुए। मुख्य सचिव ने जिलों में पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम के लिए की जा रही तैयारियों की गहन समीक्षा की। उन्होंने फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी की उपलब्धता, किसानों को जागरूक करने के प्रयासों और निगरानी व्यवस्था का भी जायजा लिया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि पराली जलाने की किसी भी घटना को पूरी गंभीरता से लिया जाए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि ऐसी घटनाओं के लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

नूंह जिले में तैयार की गई व्यापक कार्ययोजना

नूंह के उपायुक्त अखिल पिलानी ने मुख्य सचिव को विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नूंह जिले में पराली प्रबंधन को लेकर एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों, ग्राम स्तर के नोडल अधिकारियों तथा संबंधित विभागों की टीमों को पूरी तरह से सक्रिय कर दिया गया है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि खेतों में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को पूरी तरह से रोका जा सके। उपायुक्त ने बैठक में यह भी बताया कि जिले में पराली प्रबंधन के लिए जितनी भी कृषि मशीनरी उपलब्ध है, उसका अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। किसानों को सरकार की ओर से दी जा रही प्रोत्साहन राशि और अन्य सुविधाओं की पूरी जानकारी भी लगातार उपलब्ध कराई जा रही है। गांव स्तर पर विशेष अधिकारियों की नियुक्ति करके निगरानी व्यवस्था को बेहद मजबूत बना दिया गया है।

विशेष निगरानी तंत्र और वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर

उपायुक्त ने आगे बताया कि पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण रखने के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर एक विशेष निगरानी तंत्र स्थापित किया गया है। पुलिस, कृषि विभाग और अन्य सभी संबंधित विभागों की संयुक्त टीमें अति संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार कड़ी नजर रखेंगी। देर शाम और रात्रि के समय भी विशेष गश्त की व्यवस्था की जा रही है ताकि फसल अवशेष जलाने की किसी भी गतिविधि पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पराली जलाने से पर्यावरण के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य पर भी बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए सभी किसानों से विनम्र अपील है कि वे फसल अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करें और पराली जलाने से बचें। जिला प्रशासन सभी किसानों के पूर्ण सहयोग से पराली मुक्त नूंह के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। इस समीक्षा बैठक के दौरान पराली की गांठों के सुरक्षित भंडारण, कृषि मशीनरी के समुचित उपयोग, ड्रोन के माध्यम से निगरानी करने, ग्राम स्तर पर नोडल अधिकारियों की तैनाती करने तथा पराली जलाने के मामलों में नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने जैसे विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

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