नूंह जेल में बंदियों को मिला कौशल विकास का प्रशिक्षण, भविष्य में मिलेगा रोजगार

नूंह जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रदेश के जेल मंत्री अरविंद शर्मा के निर्देशानुसार जेलों में बंदियों और कैदियों के सुधार और पुनर्वास के लिए विभिन्न स्तरों पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी के तहत गुरुवार को जिला जेल नूंह में बंदियों के लिए कौशल विकास एवं पुनर्वास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रीजमस्टार्ट इंडिया फाउंडेशन के निदेशक जैज एवं रोजी चीतल ने विशेष रूप से भाग लिया। उन्होंने सभी बंदियों को कौ कौशल विकास के महत्व, रोजगार के अवसरों और भविष्य की संभावनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कौशल विकास और पुनर्वास का महत्व
कार्यक्रम के दौरान जैज एवं रोजी चीतल ने अपने विचार रखते हुए कहा कि कौशल विकास किसी भी बंदी के पुनर्वास में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जेल से बाहर आने के बाद यदि किसी भी बंदी के पास रोजगारपरक कौशल होगा तो वे समाज की मुख्यधारा से आसानी से जुड़ सकेंगे। इसके बाद वे एक सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन जी सकते हैं। इसी मुख्य उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए बंदियों को विभिन्न प्रकार के कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
रिहाई के बाद रोजगार और इंग्लैंड की जेलों का अनुभव
उन्होंने सभी को जानकारी दी कि बंदियों को केवल कौशल प्रशिक्षण ही नहीं दिया जाता है बल्कि जेल से रिहाई के बाद रोजगार उपलब्ध कराने में भी पूरा सहयोग किया जाता है। इससे सभी बंदी आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज के प्रति सकारात्मक भूमिका निभा सकेंगे। उन्होंने यह भी एक बड़ी बात बताई कि वे इंग्लैंड की जेलों में बंदियों के सुधार एवं पुनर्वास के क्षेत्र में भी बेहतरीन कार्य कर रहे हैं। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि बंदियों को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कौशल प्रशिक्षण तथा रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना इस पूरी मुहिम का एक बहुत अहम हिस्सा है।
जेल प्रशासन का सराहनीय योगदान
जिला जेल नूंह में इस सुधार एवं पुनर्वास अभियान को आगे बढ़ाने में जेल प्रशासन का बहुत बड़ा योगदान रहा है। इस अभियान में जेल अधीक्षक बिमला देवी, उप अधीक्षक सत्यभान और हिमांशु चौधरी का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है। इस विशेष अवसर पर जेल अधीक्षक बिमला देवी ने कहा कि बंदियों के सुधार और पुनर्वास के लिए आयोजित की जाने वाली इस प्रकार की सभी गतिविधियां समाज को एक सकारात्मक दिशा देने में अहम भूमिका निभाती हैं। उन्होंने अंत में कहा कि बंदियों को कौशल प्रशिक्षण और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें भविष्य में एक सम्मानजनक एवं आत्मनिर्भर जीवन जीने के लिए पूरी तरह तैयार किया जा सकता है।