NGT ने हरियाणा सरकार और वन विभाग को अरावली में कथित अवैध खनन पर नोटिस जारी किया

National Green Tribunal ने फरीदाबाद के बड़कल इलाके में संरक्षित अरावली भूमि पर खनन और खुदाई के आरोपों पर हरियाणा सरकार, वन अधिकारियों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से जवाब मांगा है। Chairperson Justice प्रकाश श्रीवास्तव और Expert Member डॉ. अफरोज़ अहमद की अगुवाई वाली Principal Bench ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं। अदालत ने निर्देश दिया है कि वे सुनवाई की अगली तारीख से कम से कम एक सप्ताह पहले हलफनामा (affidavit) के जरिए अपने जवाब दाखिल करें। इस मामले की अगली सुनवाई 1 दिसंबर 2026 को होगी।
मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान
Tribunal ने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है। आदेश में कहा गया है कि हरियाणा अरावली क्षेत्र में दो दशक से अधिक समय से खनन पर प्रतिबंध होने के बावजूद, फरीदाबाद के बड़कल में करीब 25 एकड़ वन भूमि पर दो excavators चलते हुए पाए गए। रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर पत्थरों की खुदाई, टूटे हुए पत्थरों के ढेर और जमीन के एक बड़े हिस्से से पेड़-पौधों को साफ करने का आरोप लगाया गया है।
वन भूमि और पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन
Tribunal ने नोट किया कि यह भूमि Punjab Land Preservation Act यानी PLPA की धारा 4 और 5 के तहत संरक्षित है। यह भूमि अरावली लैंडस्केप का हिस्सा है। आदेश में इस आरोप को भी दर्ज किया गया है कि इस काम के लिए Forest Department से कोई अनुमति नहीं ली गई थी। आदिश में आगे कहा गया है कि यह खुदाई कथित तौर पर दो दिनों तक जारी रही। न्यूज़ रिपोर्ट में करीब 500 metric tonnes पत्थर निकाले जाने का जिक्र था, जिस आंकड़े से Forest Department ने इनकार किया है।
बड़कल झील का पुनरुद्धार और अन्य मामले
Tribunal ने बड़कल झील के चल रहे पुनरुद्धार के मद्देनजर इस स्थान के महत्व पर भी ध्यान दिया, जो 2002 में सूख गई थी। झील पुनरुद्धार प्रोजेक्ट में पानी के ठहराव को बहाल करना, 10 MLD sewage treatment plant के पानी से रिचार्ज करना, झील के बिस्तर का उपचार, बंड को मजबूत करना और झील के सामने का विकास शामिल है। Tribunal ने नूंह के रवा क्षेत्र में कथित अवैध खनन की पिछली रिपोर्टों का भी हवाला दिया। वहां कथित तौर पर लगभग 6,000 metric tonnes पत्थर निकाले गए थे और कथित तौर पर विस्फोट किए गए थे। इसमें बसई मेयो में एक अवैध सड़क से संबंधित रिपोर्ट भी नोट की गई।
पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन
Bench ने अवलोकन किया कि इस मामले से Forest Conservation Act 1980, Environment Protection Act 1986 और PLPA सहित अन्य पर्यावरण मानदंडों का संभावित उल्लंघन होता है। इसमें कहा गया है कि न्यूज़ रिपोर्ट ने पर्यावरणीय मानदंडों के अनुपालन और वैधानिक प्रावधानों के कार्यान्वयन से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं। Tribunal ने हरियाणा सरकार को उसके Chief Secretary, Principal Chief Conservator of Forests, Ministry of Environment Forest and Climate Change के तहत Inspector General of Forests, Haryana State Pollution Control Board और Central Pollution Control Board के माध्यम से प्रतिवादी के रूप में शामिल किया है।