नीरू ढांडा ने एशियाई खेलों में रचा इतिहास, ट्रैप शूटिंग में भारत को दिलाया पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक

नीरू ढांडा ने एशियाई खेलों में रचा इतिहास
- नीरू ढांडा एशियाई खेलों में व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
- उन्होंने फाइनल में 30 में से 28 टारगेट हिट करके नया एशियन रिकॉर्ड बनाया।
- इस जीत के साथ 48 साल का लंबा इंतजार खत्म हुआ।
एशियाई खेलों में ऐतिहासिक प्रदर्शन
नीरू ढांडा ने मंगलवार 29 सितंबर 2026 को एशियाई खेलों में ट्रैप शूटिंग में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं। जापान के आइची नागोया में आयोजित इस प्रतियोगिता के फाइनल में 26 वर्षीय शूटर ने 30 में से 28 टारगेट हिट किए। इसके साथ ही उन्होंने एक नया एशियन रिकॉर्ड भी कायम किया।
इस शानदार प्रदर्शन ने एशियाई खेलों में भारतीय ट्रैप गोल्ड के 48 साल के लंबे इंतजार को खत्म कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे पहले 1978 में बैंकॉक में हुए गेम्स के दौरान पुरुषों की स्पर्धा में रणधीर सिंह ने यह उपलब्धि हासिल की थी।
तैयारी के दौरान आई गंभीर मुश्किलें
प्रतियोगिता से पहले नीरू ढांडा को बेहद कठिन दौर से गुजरना पड़ा था। इवेंट से करीब दस दिन पहले उन्हें एक गंभीर इन्फेक्शन हो गया था जिसके चलते वह दिल्ली के एक अस्पताल में तीन दिन तक भर्ती रही थीं। कोच पीटर विल्सन की टिप्पणियों के अनुसार यह स्थिति बहुत ही नाजुक और जोखिम भरी थी।
शूटर ने खुद पुष्टि की थी कि वह नेशनल कैंप के दौरान अपने कमरे में ही रहीं और लगातार पांच दिनों तक केवल लिक्विड डाइट पर जीवित रहीं।
खेतों से लेकर पोडियम तक का सफर
25 मई 2000 को हरियाणा के जींद में जन्मीं नीरू ढांडा एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती हैं जहां उनके पिता किसान हैं। खेल के प्रति उनकी रुचि तब जागी जब उन्होंने अपने चचेरे भाई लक्ष्य श्योराण को 2018 एशियाई खेलों में रजत पदक जीतते हुए देखा था। इसके बाद उन्होंने बिना किसी लागत के सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए भोपाल स्थित मध्य प्रदेश स्टेट शूटिंग एकेडमी का रुख किया।
भारतीय सेना में एक नायब सूबेदार के रूप में वह महू स्थित आर्मी मार्कमैनशिप यूनिट में ट्रेनिंग लेती हैं। उनके विकास में भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम और ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट संगठन का पूरा समर्थन मिला है। नेशनल ट्रैप कोच पीटर विल्सन ने भारतीय ओलंपियन मनशेर सिंह के साथ मिलकर इस अभियान के लिए उनकी तैयारी कराई थी।
परिणाम और पदक का संदर्भ
नीरू ढांडा ने 125 में से 118 का स्कोर बनाकर फाइनल के लिए क्वालीफाई किया था। कतर की एथलीट रे बासिल ने भी इतना ही स्कोर दर्ज किया था जिससे दोनों की बराबरी रही थी। फाइनल में चीन की कंटेस्टेंट सुन युनोंग ने 26 अंकों के साथ रजत पदक हासिल किया। वहीं कुवैत के शूटर अब्दुलमलक हाजर ने 21 अंकों के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया।
उस सुबह से पहले नीरू ढांडा ने आशिमा अहलावत और मनीषा कीर के साथ मिलकर महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता था। तीनों ने मिलकर 328 का संयुक्त स्कोर बनाया। इस तरह वे चीन (346 अंक) के बाद दूसरे स्थान पर रहीं और कुवैत (325 अंक) से आगे रहीं। इस व्यक्तिगत स्वर्ण पदक ने 2026 के एशियाई खेलों में भारत के लिए पांचवें स्वर्ण पदक का दर्जा हासिल किया।
भारतीय दल के लिए ऐतिहासिक दिन
भारतीय कैंप में खुशी का माहौल तब और बढ़ गया जब उसी दिन बाद में महिला 4x400 मीटर रिले टीम ने भी स्वर्ण पदक जीत लिया। किरण पहल, एम.आर. पूवम्मा, प्राची और विथ्या रामराज ने 3:29.69 का समय निकालते हुए गेम्स के इस संस्करण में भारत के लिए पहला एथलेटिक्स गोल्ड सुरक्षित किया। कई मीडिया आउटलेट्स ने 29 सितंबर को जापान में भारतीय दल के लिए अब तक का सबसे मजबूत दिन बताया है।
एशियाई खेलों का आयोजन 4 अक्टूबर तक चलना तय किया गया है। भविष्य की सफलता शेष बचे हुए बॉक्सिंग फाइनल्स, हॉकी मैचों और अन्य एथलेटिक्स इवेंट्स के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी। नीरू ढांडा के लिए अगले चरणों में इवेंट के बाद की रिकवरी और नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा समीक्षा शामिल है.