राष्ट्रीय सेवा योजना दिवस विशेष: जानिए 24 सितंबर का इतिहास और युवाओं की भूमिका

राष्ट्रीय सेवा योजना दिवस 24 सितंबर को मनाया जाता है। उड़ान भरो, जितना तुम चाहो- भारत देश के गौरव बढ़ाओ - डॉक्टर अशोक कुमार वर्मा। मैं नहीं, पहले हम यही तो है NSS का ध्येय। समाज जगे, राष्ट्र बढ़े, कुरीतियों का हो क्षय। भारत युवाओं का देश है। युवा शक्ति में ऊर्जा, साहस और परिवर्तन की क्षमता होती है। जब यही शक्ति सेवा, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़ती है, तो राष्ट्र के विकास को नई दिशा मिलती है। इसी भावना को शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से राष्ट्रीय सेवा योजना यानी National Service Scheme (NSS) की शुरुआत की गई। हर वर्ष 24 सितंबर को राष्ट्रीय सेवा योजना दिवस मनाया जाता है। राष्ट्रीय सेवा योजना का शुभारंभ 24 सितंबर 1969 को तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. वी. के. आर. वी. राव द्वारा किया गया था। प्रारंभ में देश के 37 विश्वविद्यालयों में लगभग 40,000 स्वयंसेवकों के साथ इसकी शुरुआत हुई। वर्ष 1969 महात्मा गांधी की जन्मशती का वर्ष भी था। राष्ट्रीय सेवा योजना की मूल भावना में समाजसेवा और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की इसी विचारधारा को प्रमुख स्थान मिला।
सेवा के माध्यम से शिक्षा
राष्ट्रीय सेवा योजना का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ समाज की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ना है। इसका प्रमुख विचार सेवा के माध्यम से शिक्षा है। विद्यार्थी समाज के बीच जाकर समस्याओं को समझें, लोगों के साथ मिलकर समाधान खोजें और इसी प्रक्रिया में अपने व्यक्तित्व एवं चरित्र का विकास करें। एनएसएस का आदर्श वाक्य Not Me But You और मैं नहीं, आप है। यह वाक्य स्वयंसेवक को व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज और मानवता के हित में कार्य करने की प्रेरणा देता है।
स्वयंसेवक कौन है?
स्वयंसेवक वह व्यक्ति है जो बिना किसी व्यक्तिगत लाभ की अपेक्षा के अपनी इच्छा से समाज और राष्ट्र की सेवा के लिए समय, श्रम, ज्ञान और सामर्थ्य समर्पित करता है। वह केवल किसी कार्यक्रम में भाग लेने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन में सक्रिय भागीदार होता है। जो दूसरों के लिए अपना समय लगाता है, वही समाज में बदलाव लाता है। स्वयंसेवक का पहला दायित्व है कि वह स्वयं जागरूक और अनुशासित बने तथा अपने आचरण से दूसरों को प्रेरित करे।
स्वयंसेवक के कर्तव्य और दायित्व
स्वयंसेवक समाज की आवश्यकताओं को समझकर सेवा कार्यों में योगदान दे सकता है। स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, रक्तदान, स्वास्थ्य जागरूकता, शिक्षा, सड़क सुरक्षा, महिला सम्मान, बाल संरक्षण और सामाजिक समरसता जैसे क्षेत्रों में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण है। आपदा या संकट की स्थिति में प्रशासन के साथ सहयोग करना, जरूरतमंदों की सहायता करना तथा लोगों को सरकारी एवं सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करना भी स्वयंसेवक के महत्वपूर्ण दायित्व हैं। एक कदम सेवा का बढ़ाओ, सौ कदम समाज तुम्हारे साथ आएगा।
नशामुक्ति अभियान में स्वयंसेवकों की भूमिका
आज नशा समाज के सामने एक गंभीर चुनौती है। इसका प्रभाव व्यक्ति के स्वास्थ्य के साथ-साथ परिवार और सामाजिक जीवन पर भी पड़ता है। इसलिए नशामुक्त समाज का निर्माण केवल प्रशासन का कार्य नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक नशामुक्ति अभियान को जनआंदोलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विद्यालयों, महाविद्यालयों और गांवों में जागरूकता कार्यक्रम, शपथ, पोस्टर, रैली, साइकिल यात्रा, संगोष्ठी, नुक्कड़ नाटक और जनसंवाद आयोजित किए जा सकते हैं। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए उन्हें खेल, योग, अध्ययन, कला, संस्कृति और सामाजिक सेवा जैसी सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना आवश्यक है। जो व्यक्ति नशे की समस्या से जूझ रहा हो, उसके प्रति उपेक्षा के बजाय परामर्श, उपचार और पुनर्वास की भावना रखनी चाहिए। नशे को ना, जीवन को हाँ, युवा शक्ति की यही पहचान। नशा छोड़ो, आगे बढ़ो, स्वस्थ समाज से नाता जोड़ो।
पर्यावरण और मानव सेवा
स्वयंसेवा का क्षेत्र केवल सामाजिक जागरूकता तक सीमित नहीं है। पौधारोपण, जल संरक्षण, स्वच्छता, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में भी युवा महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। एक पौधा लगाना और उसकी देखभाल करना आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन सुरक्षित करने जैसा है। इसी प्रकार रक्तदान के लिए किसी व्यक्ति को प्रेरित करना, जरूरतमंद की सहायता करना या किसी बच्चे को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना भी राष्ट्रसेवा का ही रूप है। एक पौधा जीवन का आधार, हरियाली से सुंदर संसार। सेवा, संस्कार और सद्भाव, युवा शक्ति का यही प्रभाव।
स्वयंसेवक : समाज और राष्ट्र के बीच सेतु
राष्ट्रीय सेवा योजना विद्यार्थी और समाज के बीच सेतु का कार्य करती है। स्वयंसेवक समाज की समस्याओं को समझकर लोगों और संस्थाओं के बीच संवाद स्थापित कर सकता है। वह लोगों में सहयोग, भाईचारे और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करता है। राष्ट्रीय सेवा योजना का प्रतीक कोणार्क सूर्य मंदिर के रथचक्र पर आधारित है, जो निरंतर गति, परिवर्तन और प्रगति का संदेश देता है। यह स्वयंसेवक को निरंतर कर्म और सेवा की प्रेरणा देता है।
निष्कर्ष
24 सितंबर 1969 से प्रारंभ हुई राष्ट्रीय सेवा योजना आज लाखों युवाओं को समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझने का अवसर देती है। राष्ट्रीय सेवा योजना दिवस केवल स्थापना दिवस नहीं, बल्कि सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी के संकल्प का दिवस है। आज आवश्यकता है कि युवा केवल समस्याओं की चर्चा न करें, बल्कि उनके समाधान का हिस्सा बनें। नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, रक्तदान, स्वच्छता, शिक्षा और मानव सेवा जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी ही स्वयंसेवा की वास्तविक पहचान है। सेवा बने संस्कार हमारा, मानवता हो धर्म हमारा। नशामुक्त हो युवा समाज, यही हो भारत का स्वर्णिम आज। Not Me But You यानी मैं नहीं, आप का संदेश हमें सिखाता है कि जब व्यक्ति अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज के लिए कार्य करता है, तभी सच्चे अर्थों में राष्ट्रनिर्माण होता है। सेवा से संस्कार, संस्कार से चरित्र और चरित्रवान युवा से सशक्त राष्ट्र का निर्माण होता है।