नारनौल में जाट सभा ने मृत्यु भोज समेत तीन सामाजिक रस्मों पर लगाई पूर्ण रोक

नांगल चौधरी की जाट सभा ने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ एक बड़ा फैसला लिया है। जाट सभा ने मृत्यु भोज समेत तीन सामाजिक रस्मों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का कड़ा निर्णय लिया है। यह फैसला समाज सुधार से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने के बाद लिया गया है। इस बैठक का आयोजन रविवार को किया गया था। बैठक की अध्यक्षता जाट सभा के प्रधान कुलदीप जेलदार ने की थी।
बैठक की शुरुआत बहुत ही सम्मानजनक तरीके से की गई। शुरुआत में दिवंगत पूर्व सरपंच एवं समाजसेवी चौधरी मालाराम को श्रद्धांजलि दी गई। इसके अलावा समाज के अन्य दिवंगत लोगों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। श्रद्धांजलि देने के बाद बार एसोसिएशन नारनौल के नवनियुक्त प्रधान एडवोकेट विजय पाल का स्वागत किया गया। उनका स्वागत पगड़ी पहनाकर किया गया।
मृत्यु भोज और अन्य रस्मों पर प्रतिबंध
बैठक में सर्वसम्मति से एक बहुत बड़ा निर्णय लिया गया। निर्णय यह लिया गया कि समाज में अब मृत्यु भोज पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद स्वामणी का आयोजन करने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा किसी अन्य माध्यम से भी मृत्यु भोज आयोजित करने को सामाजिक मान्यता नहीं दी जाएगी। सभा ने सभी लोगों से एक विशेष अपील भी की है। सभा ने अपील की है कि लोग सामाजिक आयोजनों में अनावश्यक खर्च से बचें। साथ ही समाज से कुरीतियों को समाप्त करने में अपना पूरा सहयोग दें।
विवाह और अन्य अवसरों पर बर्तनों के लेन-देन पर रोक
जाट सभा की इस बैठक में एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। विवाह तथा अन्य शुभ अवसरों पर एक विशेष परंपरा निभाई जाती थी। इस परंपरा के तहत गांव की लड़कियों की ओर से बर्तन बांटे जाते थे। अब इन बर्तनों के लेन-देन की परंपरा पर भी पूरी तरह रोक लगाने का फैसला किया गया है। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि इस तरह की परंपराओं से परिवारों पर बहुत अधिक आर्थिक बोझ पड़ता है। यह बोझ पूरी तरह अनावश्यक होता है।
रिश्तेदारों को टीके के रूप में राशि देने पर रोक
बैठक में एक और पुरानी परंपरा को लेकर कड़ा फैसला लिया गया। किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद रिश्तेदारों को टीके के रूप में राशि दी जाती थी। इस टीके की राशि देने की परंपरा को भी पूरी तरह प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया गया। सभा के पदाधिकारियों ने इस संबंध में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सामाजिक रस्मों को सरल बनाने के लिए ऐसे कदम उठाने जरूरी हैं। साथ ही फिजूलखर्ची रोकने के लिए समाज स्तर पर ऐसे फैसले लेना बहुत आवश्यक है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। बैठक में पूर्व चेयरमैन सतपाल दहिया ने हिस्सा लिया। इसके अलावा रामनिवास सरपंच, वीरेंद्र और हजारीलाल लंबौरा भी मौजूद रहे। बैठक में सतवीर बडेसरा और सूबेदार जगराम ने भी भाग लिया। इनके साथ ही समाज के अनेक अन्य लोग भी इस बैठक में उपस्थित रहे।