नारनौल में युवाओं के लिए खुला निशुल्क पुस्तकालय, एसपी दीपक कुमार ने कहा- संसाधनों के अभाव में न रुके प्रतिभाओं का सफर

नारनौल में 25 सितंबर को हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय महेंद्रगढ़ के सामने सर्व कल्याण मंच की ओर से युवाओं के लिए निशुल्क पुस्तकालय का शुभारंभ किया गया। इस पुस्तकालय में युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं सहित विभिन्न शैक्षणिक तैयारियों के लिए अध्ययन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस उद्घाटन कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इसके अलावा, हकेंवि के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार और एसडीएम योगेश सैनी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में मदद
कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार ने कहा कि कई बार शिक्षा के क्षेत्र में संसाधनों की कमी के कारण प्रतिभाशाली युवाओं को जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। ऐसे में उनकी प्रतिभा प्रभावित होती है। उन्होंने आगे कहा कि इस निशुल्क पुस्तकालय से युवाओं को अध्ययन के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध होंगे। इससे युवाओं को अपने सपनों को साकार करने में बहुत मदद मिलेगी।
कम्युनिटी पुलिसिंग और जनता का सहयोग
एसपी दीपक कुमार ने कार्यक्रम में कम्युनिटी पुलिसिंग पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि इसके लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से इस ग्रुप से जुड़ने की अपील की। साथ ही घटनाओं, नशा तस्करी तथा अन्य अपराधों से संबंधित जानकारी साझा करने के लिए कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सूचना मिलने पर पुलिस की ओर से तुरंत कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था में जनता के सहयोग को जरूरी बताते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय से अपराधों पर प्रभावी रोकथाम की जा सकती है।
विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
इस अवसर पर कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि इस पुस्तकालय का लाभ आसपास के बच्चों के साथ विश्वविद्यालय के उन विद्यार्थियों को भी मिलेगा जो बाहर बैठकर पढ़ाई करते हैं। इस दौरान सर्व कल्याण मंच ने कुलपति के समक्ष कुछ प्रमुख मांगें रखीं। मंच ने विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम का नाम शहीद हुक्मचंद के नाम पर रखने की मांग की। इसके अलावा महापुरुषों के नाम पर चौकों का नामकरण करने की मांग रखी गई। साथ ही विश्वविद्यालय के सामने वाले चौक का नाम रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर रखने और मुख्य गेट पर विश्वविद्यालय के साथ जांट-पाली लिखने की मांग भी शामिल थी। कुलपति ने इन सभी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है।