नारनौल में आंगनबाड़ी केंद्र से गर्भवती महिला को मिला फफूंदी लगा पोषाहार, वीडियो वायरल

नारनौल के गांव कांवी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र से एक गर्भवती महिला को दिए गए पोषाहार में फफूंदी मिलने का बड़ा मामला सामने आया है। चनों में फफूंदी मिलने का गंभीर आरोप लगाते हुए परिवार ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है। यह घटना सामने आने के बाद अब आंगनबाड़ी केंद्रों से बांटे जाने वाले पोषाहार की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या है पूरा मामला और कैसे खुला राज
महिला के पति विशाल कांवी ने इस संबंध में मुख्य जानकारी दी है। विशाल कांवी ने बताया कि उनकी पत्नी गर्भवती हैं और इस समय उनका आठवां महीना चल रहा है। वह हर महीने की तरह नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्र से मिलने वाला पोषाहार लेने के लिए जाती हैं। सोमवार को भी उनकी पत्नी पोषाहार लेने के लिए केंद्र पर पहुंची थीं। वहां से आंगनबाड़ी केंद्र की तरफ से उन्हें खाने के लिए चावल, चॉकलेट, चने और खील दिए गए थे। जब महिला पोषाहार लेकर अपने घर पहुंची और परिवार के सदस्यों ने उस सामग्री की जांच की, तो चनों में फफूंदी लगी हुई दिखाई दी।
परिवार ने बनाया वीडियो और सोशल मीडिया पर डाला
विशाल के अनुसार वे चने बिल्कुल भी खाने योग्य स्थिति में नहीं थे क्योंकि वे पूरी तरह खराब हो चुके थे। इसके बाद परिवार के सदस्यों ने उन खराब चनों का एक वीडियो बना लिया। वीडियो में चनों पर साफ तौर पर फफूंदी दिखाई देने का दावा किया गया है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड होने के बाद तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। इसके बाद से स्थानीय लोगों ने छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को दिए जाने वाले पोषाहार की उच्च स्तरीय गुणवत्ता की जांच कराने की मांग उठानी शुरू कर दी है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने दी अपनी सफाई
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गायत्री देवी ने अपनी बात रखी है। उन्होंने बताया कि उनके इस केंद्र पर अलग से किसी भी प्रकार के चनों की कोई सप्लाई नहीं आई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खील के अंदर जो चने मिले हैं, उनका स्टॉक लगभग तीन दिन पहले ही केंद्र पर पहुंचा था। कार्यकर्ता के अनुसार केंद्र पर जो भी सामग्री उपलब्ध थी, उसी के अनुसार सभी लाभार्थियों को पोषाहार वितरित किया गया है। संबंधित विभाग की ओर से इस पूरे मामले की जांच किए जाने के बाद ही पोषाहार की गुणवत्ता को लेकर असली स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।