अस्थायी ड्यूटी वाले अधिकारी को SPIO का चार्ज देना नियमों के विपरीत: नरेश गुणपाल

अस्थायी ड्यूटी वाले अधिकारी को SPIO का चार्ज देना नियमों के विपरीत: नरेश गुणपाल

हिसार, 22 सितम्बर। आरटीआई एक्टिविस्ट नरेश गुणपाल ने गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि हरियाणा सरकार के आरटीआई पोर्टल पर मंडल रोजगार कार्यालय, हिसार के लिए SPIO-कम-सहायक निदेशक/मंडल रोजगार अधिकारी के रूप में अधिकारी की नियुक्ति दर्शाई गई है। इसके बावजूद आरटीआई से संबंधित जिम्मेदारी ऐसे अधिकारी को दिए जाने का मामला सामने आया है, जिसकी मंडल रोजगार कार्यालय हिसार में केवल अस्थायी ड्यूटी लगाई गई है।

नरेश गुणपाल ने इस बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि जिला रोजगार कार्यालय फतेहाबाद में कार्यरत सहायक रोजगार अधिकारी रितु जांगड़ा की यदि मंडल रोजगार कार्यालय हिसार में केवल अस्थायी ड्यूटी लगाई गई है, तो यह सवाल खड़े करता है। उन्हें मंडल रोजगार कार्यालय हिसार में राज्य जन सूचना अधिकारी यानी SPIO की जिम्मेदारी दिया जाना प्रशासनिक व्यवस्था और नियुक्ति आदेशों के अनुरूप होने पर बड़े सवाल खड़े करता है।

विधिवत नियुक्त अधिकारी द्वारा ही हो आरटीआई का निर्वहन

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उन्होंने आगे कहा कि यदि राज्य सरकार ने मंडल रोजगार कार्यालय हिसार के लिए किसी अधिकारी को विधिवत रूप से राज्य जन सूचना अधिकारी नियुक्त किया है, तो आरटीआई आवेदनों से संबंधित जिम्मेदारियों का निर्वहन उसी अधिकारी द्वारा किया जाना चाहिए। किसी अन्य अधिकारी को केवल अस्थायी ड्यूटी के आधार पर आरटीआई संबंधी जिम्मेदारी सौंपने से पहले उसके लिए स्पष्ट एवं सक्षम प्राधिकारी का आदेश होना आवश्यक है।

समय-सीमा में सूचना देना SPIO की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

नरेश गुणपाल ने कहा कि आरटीआई अधिनियम के तहत निर्धारित समय-सीमा में आवेदकों को सूचना उपलब्ध करवाना लोक सूचना अधिकारी की एक बहुत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने यह मांग की है कि हरियाणा सरकार तथा संबंधित विभाग इस मामले में स्पष्ट करें कि मंडल रोजगार कार्यालय हिसार में वर्तमान में विधिवत नियुक्त SPIO कौन है, वह किस आदेश के तहत नियुक्त है और अस्थायी ड्यूटी पर तैनात अधिकारी को आरटीआई संबंधी जिम्मेदारी किस सक्षम आदेश के आधार पर दी गई है।

पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने की मांग

उन्होंने अंत में कहा कि यदि नियुक्त SPIO अपनी जिम्मेदारी का सही से निर्वहन नहीं कर रहा है, तो संबंधित उच्चाधिकारी को इस मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए। ताकि आरटीआई आवेदकों को समय पर सही सूचना मिल सके और सूचना का अधिकार अधिनियम की भावना के अनुरूप पूरी तरह से पारदर्शिता एवं जवाबदेही बनी रह सके।

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