नरवाना नगर परिषद कार्यालय के दो हिस्सों में बंटने से जनता परेशान, अधिकारियों और कर्मचारियों की लुका-छिपी से जनता बेहाल

नरवाना नगर परिषद कार्यालय के दो हिस्सों में बंटने से जनता परेशान, अधिकारियों और कर्मचारियों की लुका-छिपी से जनता बेहाल

नगर परिषद कार्यालय के दो हिस्सों में बंटने से जनता परेशान : पार्षद आशुतोष शर्मा

कहा-अधिकारियों-कर्मचारियों की लुका-छिपी से जनता बेहाल।

नरेंद्र जेठी/नरवाना  /17 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

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नरवाना में नगर परिषद कार्यालय के दो हिस्सों में बंटने के कारण आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिला विकास, समन्वय व निगरानी समिति के सदस्य और पार्षद आशुतोष शर्मा ने इस संबंध में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि नगर परिषद की नई इमारत बनाने के उद्देश्य से मौजूदा कार्यालय को एलआईसी रोड स्थित कम्युनिटी सेंटर में अस्थाई रूप से शिफ्ट किया जाना था। इस कार्य के लिए करीब 18 महीने पहले 32 लाख रुपये का टेंडर जारी किया गया था। लगभग 3 महीने पहले इस अस्थाई कार्यालय का हवन और मुहूर्त भी कर दिया गया था।

विडंबना यह है कि केवल आधा कार्यालय ही एलआईसी रोड पर शिफ्ट हो पाया है। आधा दफ्तर आज भी पुरानी बिल्डिंग में ही चल रहा है। इस अस्थाई कार्यालय के लिए लगभग 15 लाख की अतिरिक्त लागत से 10 नए AC, 5 इन्वर्टर सेट और 2 मोबाइल शौचालय जैसी सामग्रियां भी मंगवा ली गईं। जनता की गाढ़ी कमाई के करीब 47 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी धरातल पर सिर्फ अव्यवस्था और जनता की परेशानी ही नजर आ रही है।

अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

पार्षद आशुतोष शर्मा ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद, नगर परिषद की नई मुख्य इमारत बनाने के लिए अब तक न तो कोई एस्टीमेट तैयार किया गया है और न ही जगह का निर्धारण हुआ है। बिना किसी ठोस योजना के सिर्फ जनता के टैक्स के पैसे को बर्बाद किया जा रहा है। नगर परिषद कार्यालय को दो अलग-अलग इमारतों में आधे-अधूरे तरीके से शिफ्ट किए जाने के कारण अपने जरूरी कार्यों के लिए आने वाले शहरवासी पूरा दिन एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

कार्यालयों में कर्मचारियों की गैरमौजूदगी

अधिकारी और कर्मचारी इस अव्यवस्था का पूरा फायदा उठा रहे हैं। वे दिनभर दफ्तरों से नदारद रहते हैं। जब भी कोई नागरिक या जनप्रतिनिधि उनके बारे में पूछता है, तो बड़ी आसानी से बहाना बना दिया जाता है कि साहब नई बिल्डिंग में गए हैं या कर्मचारी पुरानी बिल्डिंग में काम से गए हैं। पार्षद आशुतोष शर्मा ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि नगर परिषद के अधिकारी जनता की इस परेशानी को हल्के में न लें। यदि तुरंत प्रभाव से दोनों कार्यालयों को एक ही जगह पूरी तरह शिफ्ट नहीं किया गया और अधिकारियों की मनमानी पर लगाम नहीं लगी, तो वे अपने साथी पार्षदों को एकजुट करके अनशन पर बैठेंगे।

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