न्यूयॉर्क में मोहन भागवत का भाषण, 61 संगठनों का विरोध

न्यूयॉर्क में RSS प्रमुख मोहन भागवत के खिलाफ प्रदर्शन, मैडिसन स्क्वायर गार्डन के बाहर जुटे प्रदर्शनकारी
न्यूयॉर्क में मोहन भागवत के कार्यक्रम का विरोध, 61 संगठनों ने उठाए सवाल
मैडिसन स्क्वायर गार्डन के बाहर प्रदर्शन; Hindus for Human Rights, IAMC समेत कई संगठन विरोध में, RSS बोला-यह एकता और संवाद का कार्यक्रम
न्यूयॉर्क /29 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
न्यूयॉर्क, 29 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क दौरे और मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित कार्यक्रम को लेकर अमेरिका में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। शनिवार को भागवत के कार्यक्रम के दौरान मैडिसन स्क्वायर गार्डन के बाहर कई संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया।
न्यूयॉर्क में मोहन भागवत का भाषण, 61 संगठनों का विरोध
न्यूयॉर्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS के प्रमुख मोहन भागवत का 29 अगस्त 2026 को न्यूयॉर्क में आयोजित कार्यक्रम लंबे समय से विवाद और विरोध के बीच हुआ। कार्यक्रम का नाम Universal Oneness Celebration रखा गया था और इसे American Hindus for Engagement and Dialogue यानी AHEAD Forum ने आयोजित किया था। आयोजकों के अनुसार इसका उद्देश्य भारतीय और हिंदू अमेरिकी समुदाय को जोड़ना, विविधता, सामाजिक जिम्मेदारी और मानव एकता का संदेश देना था।
कार्यक्रम में करीब 5,000 लोगों के शामिल होने की बात आयोजकों ने कही थी। यह आयोजन RSS के शताब्दी वर्ष से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों का हिस्सा था। मोहन भागवत अमेरिका के बाद कनाडा और ब्रिटेन की यात्रा पर भी जाने वाले थे।
लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही न्यूयॉर्क में इसका विरोध शुरू हो गया था। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, दलित, अंतरधार्मिक और नागरिक अधिकारों से जुड़े संगठनों ने कहा कि वे हिंदू धर्म के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि RSS की हिंदुत्व आधारित राजनीतिक विचारधारा का विरोध कर रहे हैं।
आखिर विरोध क्यों हुआ?
विरोध करने वाले संगठनों का मुख्य सवाल यह था कि RSS को केवल सांस्कृतिक संगठन के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि भारत में उसके राजनीतिक प्रभाव और अल्पसंख्यकों से जुड़े विवादों का भी लंबा इतिहास है।
Hindus for Human Rights और Indian American Muslim Council समेत कई संगठनों ने आरोप लगाया कि RSS की विचारधारा भारत की धर्मनिरपेक्ष और बहुधार्मिक पहचान के लिए खतरा पैदा करती है। इन संगठनों का कहना था कि भारत में मुस्लिम, ईसाई, सिख, दलित और अन्य समुदायों के अधिकारों को लेकर RSS और उससे जुड़े संगठनों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये विरोधी संगठनों के आरोप और राजनीतिक आकलन हैं। RSS इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता। RSS स्वयं को हिंदू समाज को संगठित करने वाला सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन बताता है और उसका कहना है कि वह समाज को जोड़ने और राष्ट्र सेवा के लिए काम करता है।
क्या RSS वास्तव में गैर-पंजीकृत संगठन है?
RSS की कानूनी स्थिति को लेकर भारत में भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार RSS किसी सामान्य सोसायटी या ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत नहीं है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि RSS को कानूनी रूप से प्रतिबंधित या अवैध संगठन माना जाता है। भारत में हर सामाजिक या स्वैच्छिक संगठन के लिए किसी एक सामान्य कानून के तहत पंजीकरण अनिवार्य नहीं है।
RSS का तर्क है कि वह एक Body of Individuals यानी व्यक्तियों के संगठन के रूप में काम करता है और उसके लिए सोसायटी के रूप में पंजीकरण अनिवार्य नहीं है। मोहन भागवत भी पहले कह चुके हैं कि भारतीय कानून हर संगठन के लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं करता।
इसलिए समाचार में RSS को सीधे "अवैध संगठन" कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। अधिक सटीक शब्द "अपंजीकृत संगठन" या "औपचारिक रूप से पंजीकृत न होने वाला संगठन" है।
RSS की स्थापना 1925 में केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में की थी। आज इसे भारत के सबसे प्रभावशाली सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों में गिना जाता है और BJP के साथ इसके वैचारिक संबंधों के कारण इसका राजनीतिक प्रभाव भी व्यापक माना जाता है।
न्यूयॉर्क में मोहन भागवत ने क्या कहा?
विरोध के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह था कि आखिर मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में अपने भाषण में क्या कहा।
29 अगस्त के कार्यक्रम में भागवत ने एकता, विविधता, मानवता और अलग-अलग धार्मिक रास्तों की बात की। उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच एक तुलना करते हुए कहा कि अमेरिका के संदर्भ में अक्सर "Pluralism" यानी बहुलवाद की बात होती है, जबकि भारत की पहचान "Unity in Diversity" यानी विविधता में एकता से जुड़ी है।
उन्होंने कहा कि भारत की विविधता उसकी कमजोरी नहीं बल्कि उसकी पहचान है। उनके भाषण का मुख्य जोर अलग-अलग परंपराओं और लोगों के बीच एकता पर था।
भागवत ने यह भी कहा कि दुनिया में अलग-अलग धर्म और रास्ते हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक है और हर इंसान की गरिमा समान है।
यहीं पर उनके भाषण का वह हिस्सा खास तौर पर चर्चा में आया जिसमें उनसे मुसलमानों को लेकर सवाल किया गया।
रिपोर्टों के अनुसार भागवत ने एक पुराने सवाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उनसे पूछा गया था कि अगर RSS हिंदू राष्ट्र की बात करता है तो मुसलमानों का क्या होगा।
भागवत ने इसका जवाब देते हुए कहा कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू दृष्टि में अलग-अलग रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं और हर मनुष्य की गरिमा है।
क्या न्यूयॉर्क में भागवत ने मुसलमानों के खिलाफ हेट स्पीच दी?
यह सवाल इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उपलब्ध भाषण रिपोर्टों को देखने पर न्यूयॉर्क के इस कार्यक्रम में मोहन भागवत द्वारा मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने वाला बयान देने का प्रमाण नहीं मिलता।
बल्कि मुसलमानों से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि जो हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, वह हिंदू नहीं है। उन्होंने सभी मनुष्यों की समान गरिमा और अलग-अलग धार्मिक रास्तों की बात की।
इसी तरह उपलब्ध रिपोर्टों में उनके न्यूयॉर्क भाषण में ईसाइयों या सिखों के खिलाफ कोई अपमानजनक या हिंसा के लिए उकसाने वाला बयान सामने नहीं आया है।
इसलिए यह कहना कि "मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में मुसलमानों, ईसाइयों या सिखों के खिलाफ हेट स्पीच दी", उपलब्ध भाषण रिपोर्टों के आधार पर सही नहीं होगा।
यह अलग विषय है कि भारत में RSS की विचारधारा, उसके पुराने बयानों, उससे जुड़े संगठनों और अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार को लेकर विरोधी संगठनों के गंभीर आरोप हैं।
इन आरोपों और न्यूयॉर्क में दिए गए भाषण को एक ही चीज मानना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।
फिर 61 संगठनों ने विरोध क्यों किया?
विरोधी संगठनों का तर्क यह नहीं था कि भागवत न्यूयॉर्क में मुसलमानों के खिलाफ कोई भाषण देने वाले हैं।
उनका विरोध RSS की व्यापक विचारधारा और उसके भारत में कथित प्रभाव को लेकर था।
Hindus for Human Rights की ओर से कहा गया कि RSS और हिंदुत्व को हिंदू धर्म का पर्याय नहीं माना जाना चाहिए। संगठन ने कहा कि हिंदुत्व एक राजनीतिक विचारधारा है और उसका विरोध हिंदू धर्म का विरोध नहीं है।
Indian American Muslim Council के Amin Zama ने भी यही बात कही कि विरोध हिंदुओं के खिलाफ नहीं बल्कि ऐसी विचारधारा के खिलाफ है जो नागरिकता और राष्ट्रीय पहचान को धर्म से जोड़ती है।
Hindus for Human Rights की कार्यकारी निदेशक Sunita Viswanath ने कहा कि 61 अंतरधार्मिक और धर्मनिरपेक्ष संगठनों ने कार्यक्रम के विरोध में खुले पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। उनका कहना था कि इन संगठनों का संदेश है कि RSS और उसकी हिंदुत्व विचारधारा उनका प्रतिनिधित्व नहीं करती।
विरोध करने वाले संगठनों की सूची में क्या-क्या नाम हैं?
यहां एक जरूरी तथ्य सामने रखना जरूरी है।
विरोधी पक्ष ने सार्वजनिक रूप से 61 संगठनों के समर्थन की बात कही है, लेकिन उपलब्ध अलग-अलग सार्वजनिक दस्तावेजों में नामों की संख्या एक जैसी नहीं है।
Hindus for Human Rights की 24 अगस्त की विज्ञप्ति में कई प्रमुख संगठनों के नाम दिए गए हैं, जबकि Savera की प्रकाशित हस्ताक्षर सूची में 65 नाम दिखाई देते हैं। इसलिए सभी 61 नामों की एक निर्विवाद, समान सूची उपलब्ध होने का दावा करना सही नहीं होगा।
Savera की उपलब्ध सूची में ये संगठन शामिल हैं:
18 Million Rising, Action Center on Race & the Economy, Afghans For A Better Tomorrow, Ambedkar King Study Circle, The American Council for Judaism, Arab Resource & Organizing Center, ASATA, Asian Americans Advancing Justice, Asian Refugees United, Aurora Commons LLC, Boston Coalition for Palestine, Boston Southasian Coalition, Caribbean Equality Project, Cathedral of St. John the Divine, Coalition of Seattle Indian Americans, CODEPINK, CAIR-New York, Dalit Solidarity Forum, DRUM–Desis Rising Up & Moving, Ensaaf, Equitas Forum USA, Faith Beyond Religious Nationalism, Faith in Public Life, Grassroots Asians Rising, Hindus for Human Rights, Human Agenda, India Civil Watch International, India Coalition, Indian American Muslim Council, Interfaith Center of New York, International Bahujan Organization, Jews for Racial & Economic Justice, Judson Memorial Church, Justice For All, Justice Ministries Committee, Lal Morich, LittleSis/Public Accountability Initiative, Middle Church, Movement for Black Lives, Muslim Public Affairs Council, Muslims for Progressive Values, New York Sikh Council, NYC-DSA, Purple Pundit, PYM Boston, Rabbis for Ceasefire, Religions for Peace USA, Riverside Church, SACRED, Sadhana: Coalition of Progressive Hindus, Sakhi for South Asian Survivors, San José Peace & Justice Center, Save America from Hindutva, The Shakti Mission, Showing Up for Racial Justice, Sikh American Legal Defense and Education Fund, The Sikh Coalition, South Asian Collective of Houston, South Asian Network, South Queens Women’s March, Stop Operation Kagar Coalition–NYC, Tech Justice Law, Unitarian Universalist Service Committee, Unite for Peace NYC और VietUnity Bay Area।
इस सूची को विरोधी गठबंधन की सार्वजनिक हस्ताक्षर सूची के रूप में पढ़ना चाहिए, न कि न्यूयॉर्क सरकार द्वारा जारी आधिकारिक सूची के रूप में।
न्यूयॉर्क मेयर Zohran Mamdani का क्या रुख रहा?
इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रतिक्रिया न्यूयॉर्क के मेयर Zohran Mamdani की रही।
ममदानी ने साफ कहा कि वह इस कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते।
लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि न्यूयॉर्क सिटी प्रशासन के पास किसी निजी कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि वे भारत को एक बहुलवादी और धर्मनिरपेक्ष गणराज्य के रूप में देखते हुए बड़े हुए हैं और किसी भी देश की ऐसी "exclusionary" यानी बाहर करने वाली विचारधारा का विरोध करते हैं।
ममदानी ने अपने भारतीय मूल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनकी मां का परिवार अभी भी भारत में है और उन्होंने अपने परिवार से भारत की ऐसी छवि सीखी थी जिसमें हर धर्म और हर व्यक्ति के लिए जगह है।
इसलिए उनका रुख दो हिस्सों में था।
पहला, उन्होंने RSS की विचारधारा और कार्यक्रम का राजनीतिक रूप से विरोध किया।
दूसरा, उन्होंने कहा कि निजी आयोजन को रद्द करने का अधिकार शहर प्रशासन के पास शायद नहीं है।
इसका मतलब यह हुआ कि मेयर ने कार्यक्रम का विरोध तो किया, लेकिन उसे प्रशासनिक आदेश से रोकने की कोशिश नहीं की।
दूसरे डेमोक्रेट नेताओं का क्या रुख रहा?
ममदानी अकेले डेमोक्रेट नहीं थे जिन्होंने भागवत के कार्यक्रम का विरोध किया।
न्यूयॉर्क के पूर्व नियंत्रक और कांग्रेस के डेमोक्रेटिक उम्मीदवार Brad Lander ने भी कार्यक्रम के खिलाफ आवाज उठाई।
Lander ने Madison Square Garden के इतिहास का हवाला देते हुए 1939 में हुए German American Bund के नाजी समर्थक कार्यक्रम की तुलना की। उन्होंने कहा कि Madison Square Garden को धार्मिक नफरत और हिंसा फैलाने वाले किसी कार्यक्रम के लिए मंच नहीं बनना चाहिए।
न्यूयॉर्क सिटी काउंसिल सदस्य Shahana Hanif ने भी कार्यक्रम का विरोध किया। उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क के दक्षिण एशियाई समुदायों ने RSS से जुड़ी विचारधारा और हिंसा के प्रभावों को महसूस किया है।
Council Members Lincoln Restler और Julie Won ने भी Madison Square Garden से कार्यक्रम रद्द करने की अपील करने वाले बयान पर हस्ताक्षर किए थे।
इस तरह उपलब्ध सार्वजनिक बयानों से यह साफ है कि न्यूयॉर्क के प्रमुख डेमोक्रेटिक नेताओं के एक हिस्से ने कार्यक्रम का विरोध किया।
क्या पूरी डेमोक्रेटिक पार्टी ने विरोध किया?
ऐसा कहना भी सही नहीं होगा।
न्यूयॉर्क के कुछ डेमोक्रेट नेताओं ने कार्यक्रम का विरोध किया है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में पूरी Democratic Party की ओर से कोई आधिकारिक राष्ट्रीय प्रस्ताव या पार्टी-स्तरीय घोषणा नहीं मिली है जिसमें कहा गया हो कि पार्टी मोहन भागवत के कार्यक्रम का विरोध करती है।
इसलिए खबर में "डेमोक्रेटिक पार्टी ने मोहन भागवत का विरोध किया" लिखने के बजाय यह लिखना अधिक सटीक है कि न्यूयॉर्क के कई डेमोक्रेटिक नेता और निर्वाचित प्रतिनिधि कार्यक्रम के विरोध में सामने आए।
डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी का क्या रुख रहा?
यह भी इस विवाद का महत्वपूर्ण सवाल है।
उपलब्ध रिपोर्टों में डोनाल्ड ट्रंप की ओर से मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम के समर्थन या विरोध का कोई स्पष्ट व्यक्तिगत बयान सामने नहीं आया है।
इसी तरह Republican Party की ओर से भी इस कार्यक्रम के समर्थन या विरोध में कोई स्पष्ट राष्ट्रीय पार्टी लाइन सामने नहीं आई है।
हां, ट्रंप प्रशासन से जुड़े एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में U.S. Commission on International Religious Freedom यानी USCIRF ने ट्रंप प्रशासन से भागवत का अमेरिकी वीजा रद्द करने और भविष्य में उनकी एंट्री पर रोक लगाने की सिफारिश की थी। यह एक अमेरिकी कांग्रेस-स्थापित धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी सलाहकार आयोग की सिफारिश थी, Republican Party का आधिकारिक निर्णय नहीं।
यह अंतर खबर में साफ रखना जरूरी है।
ट्रंप समर्थक Mary Millben ने क्या कहा?
ट्रंप और रिपब्लिकन राजनीति से करीबी संबंध रखने वाली अमेरिकी गायिका Mary Millben ने इसके विपरीत कार्यक्रम का समर्थन किया।
उन्होंने Zohran Mamdani की आलोचना की और कहा कि वह भागवत के कार्यक्रम का समर्थन करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यक्रम का नाम "Oneness" उन्हें पसंद है और उम्मीद जताई कि इसमें धार्मिक स्वतंत्रता पर सार्थक बातचीत होगी।
इसलिए यह कहना ज्यादा सही होगा कि रिपब्लिकन पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कार्यक्रम का समर्थन नहीं किया, लेकिन रिपब्लिकन समर्थक कुछ प्रमुख आवाजों ने कार्यक्रम के पक्ष में बयान दिए।

"मैं इस कार्यक्रम का पूरी तरह से विरोध करता हूँ। मेरी माँ का परिवार भारत में रहता है और जिस भारत को मैं जानकर बड़ा हुआ हूँ, वह एक बहुलतावादी और धर्मनिरपेक्ष गणराज्य है। हालाँकि, शहर के पास एक निजी व्यावसायिक परिसर में आयोजित कार्यक्रम को सीधे रद्द करने का कानूनी अधिकार नहीं है, लेकिन न्यू यॉर्क की समावेशी संस्कृति ऐसी विचारधारा का समर्थन नहीं करती।"
— जोहरान ममदानी (मेयर, न्यू यॉर्क शहर)
USCIRF ने क्यों विरोध किया?
अमेरिका की धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी संस्था USCIRF ने RSS और उसके सहयोगी संगठनों को लेकर गंभीर चिंता जताई।
आयोग ने आरोप लगाया कि RSS से जुड़े कुछ समूहों पर भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और असहिष्णुता से जुड़े आरोप हैं। उसने ट्रंप प्रशासन से भागवत का वीजा रद्द करने और भविष्य में उन्हें अमेरिका आने से रोकने की सिफारिश की।
भारत सरकार ने USCIRF के आरोपों को खारिज किया और आयोग को पक्षपाती तथा अविश्वसनीय बताया।
यहां भी खबर में दोनों पक्षों को अलग-अलग रखना जरूरी है।
USCIRF की सिफारिश को अमेरिकी सरकार का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह एक सलाहकारी और गैर-बाध्यकारी सिफारिश थी।
विरोध, राजनीतिक बयान, संगठनों की अपील और USCIRF की सिफारिशों के बावजूद कार्यक्रम आयोजित हुआ।
आयोजक AHEAD Forum का कहना था कि Universal Oneness Celebration का उद्देश्य हिंदू अमेरिकी समुदाय को एक साथ लाना और "विश्व एक परिवार है" जैसे विचारों को सामने रखना है।
आयोजकों ने कार्यक्रम को सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक एकता का आयोजन बताया। उनकी वेबसाइट के अनुसार इसमें 250 से अधिक हिंदू अमेरिकी संगठनों की भागीदारी बताई गई थी और कार्यक्रम में विभिन्न समुदायों के बीच एकता पर जोर दिया गया।
यही बात इस पूरे विवाद को दो अलग-अलग नजरियों में बांट देती है।
आयोजकों के लिए यह हिंदू अमेरिकी समुदाय का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम था।
विरोधियों के लिए यह RSS की विचारधारा को अमेरिका में सामान्य और स्वीकार्य बनाने की कोशिश थी।

"भारत की पहचान उसका बहुलतावादी और धर्मनिरपेक्ष ढांचा है। संघ की विचारधारा पूरे भारतीय समाज या सभी हिंदू अमेरिकियों का प्रतिनिधित्व नहीं करती। न्यू यॉर्क शहर की बहुसांस्कृतिक और समावेशी भावना में विभाजनकारी ताकतों के लिए कोई स्थान नहीं है।"
— सुनीता विश्वनाथ (कार्यकारी निदेशक, हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स)
विवाद का सबसे अहम तथ्य क्या है?
इस पूरे मामले में सबसे जरूरी बात यह है कि मोहन भागवत के न्यूयॉर्क भाषण और भारत में RSS को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद को अलग-अलग देखा जाए।
न्यूयॉर्क में दिए गए उपलब्ध भाषण के अनुसार भागवत ने विविधता, एकता, मानव गरिमा और सभी रास्तों के एक लक्ष्य की बात की।
मुसलमानों से जुड़े सीधे सवाल पर उन्होंने कहा कि जो हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, वह हिंदू नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों में इस भाषण के दौरान मुसलमानों, ईसाइयों या सिखों के खिलाफ नफरत फैलाने वाला कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।
लेकिन विरोध करने वाले संगठन इस एक भाषण को पूरी RSS विचारधारा का प्रमाण नहीं मानते।
उनका कहना है कि RSS का मूल्यांकन उसके लंबे राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव, उससे जुड़े संगठनों तथा भारत में अल्पसंख्यकों से जुड़े विवादों के आधार पर किया जाना चाहिए।
दूसरी ओर RSS और उसके समर्थक कहते हैं कि संगठन को लगातार "हिंदू विरोधी" या "अल्पसंख्यक विरोधी" बताना उसके मूल उद्देश्य और उसके सामाजिक कार्यों को नजरअंदाज करना है।
न्यूयॉर्क का विवाद आगे क्या दिखाता है?
मोहन भागवत का न्यूयॉर्क कार्यक्रम केवल एक भाषण का मामला नहीं रहा।
इसने अमेरिका में रहने वाले भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदाय के भीतर भी मौजूद वैचारिक अंतर को सामने ला दिया।
एक तरफ ऐसे हिंदू अमेरिकी संगठन हैं जो RSS को अपनी सांस्कृतिक और सभ्यतागत पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।
दूसरी तरफ ऐसे हिंदू संगठन भी हैं जो खुद को हिंदू बताते हुए हिंदुत्व की राजनीतिक विचारधारा का विरोध कर रहे हैं।
इसके साथ मुस्लिम, सिख, ईसाई, दलित और नागरिक अधिकार संगठनों का एक हिस्सा भी विरोध में शामिल हुआ।
यही कारण है कि न्यूयॉर्क में यह विवाद केवल मोहन भागवत के एक भाषण तक सीमित नहीं रहा।
यह सवाल भी सामने आया कि अमेरिका में भारतीय मूल के समुदाय की राजनीति और धार्मिक पहचान आने वाले वर्षों में किस दिशा में जाएगी।
न्यूयॉर्क में मोहन भागवत का कार्यक्रम विरोध के बीच हुआ और इसने अमेरिका में RSS को लेकर नई बहस खड़ी कर दी।
61 संगठनों के विरोध का दावा करने वाले गठबंधन ने RSS की विचारधारा, भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति और हिंदुत्व के राजनीतिक प्रभाव को लेकर सवाल उठाए।
न्यूयॉर्क के मेयर Zohran Mamdani ने कार्यक्रम का समर्थन नहीं किया और RSS की कथित "exclusionary" विचारधारा का विरोध किया, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि निजी कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार शहर के पास नहीं हो सकता।
Brad Lander, Shahana Hanif, Lincoln Restler और Julie Won जैसे डेमोक्रेट नेताओं ने भी कार्यक्रम रद्द करने की अपील की।
दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप या Republican Party की ओर से कार्यक्रम के समर्थन की कोई आधिकारिक राष्ट्रीय घोषणा सामने नहीं आई। हालांकि ट्रंप समर्थक Mary Millben ने कार्यक्रम का खुलकर समर्थन किया।
USCIRF ने ट्रंप प्रशासन से भागवत का वीजा रद्द करने की सिफारिश की, लेकिन यह अमेरिकी सरकार या रिपब्लिकन पार्टी का अंतिम निर्णय नहीं था।
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य मोहन भागवत के भाषण का है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार न्यूयॉर्क में उन्होंने मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने के बजाय यह कहा कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं है। उन्होंने विविधता और एकता को भारत की पहचान बताया।
इसलिए न्यूयॉर्क के कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक और वैचारिक विवाद जरूर गहरा है, लेकिन उपलब्ध भाषण के आधार पर यह कहना कि भागवत ने न्यूयॉर्क में मुसलमानों, ईसाइयों या सिखों के खिलाफ हेट स्पीच दी, तथ्यात्मक रूप से साबित नहीं होता।
विरोधियों के आरोप RSS की व्यापक विचारधारा और उसके इतिहास से जुड़े हैं, जबकि कार्यक्रम के समर्थक इसे एकता, संस्कृति और हिंदू अमेरिकी समुदाय का आयोजन बताते हैं।
यही इस पूरे विवाद की वास्तविक तस्वीर है।