तरावड़ी के स्वर्गीय लाला खुशी राम गुप्ता का जीवन सेवा, शिक्षा और सामाजिक सरोकारों की रही मिसाल

तरावड़ी के स्वर्गीय लाला खुशी राम गुप्ता का जीवन सेवा, शिक्षा और सामाजिक सरोकारों की रही मिसाल

तरावड़ी के स्वर्गीय लाला खुशी राम गुप्ता का जीवन सेवा, शिक्षा और सामाजिक सरोकारों की एक अनूठी मिसाल रहा है। उन्होंने विद्यालय भवन के निर्माण से लेकर तरावड़ी रेलवे स्टेशन पर झेलम एक्सप्रेस के ठहराव तक में अहम भूमिका निभाई थी। इसके साथ ही उन्होंने 12 वर्षों तक अग्रवाल सभा की कमान संभाली और व्यापारिक व सामाजिक कार्यों में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।

तरावड़ी, 30 सितम्बर (कमल शर्मा)। समाजसेवा, शिक्षा और सामाजिक संस्थाओं के प्रति समर्पण की बात हो तो तरावड़ी के स्वर्गीय लाला खुशी राम गुप्ता का नाम बहुत सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा समाजहित के कार्यों को पूरी तरह से समर्पित किया था। उनका यह पक्का मानना था कि किसी भी व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके किसी पद या संपत्ति से बिल्कुल नहीं बनती है। व्यक्ति की पहचान हमेशा समाज के लिए किए गए उसके अच्छे कार्यों से ही बनती है। इसी सकारात्मक सोच के साथ उन्होंने शिक्षा, सामाजिक सेवा, धार्मिक गतिविधियों और व्यापारिक संगठनों से हमेशा जुड़े रहकर तरावड़ी के विकास में अपनी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

शिक्षा के क्षेत्र में दिया गया विशेष योगदान

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स्वर्गीय लाला खुशी राम गुप्ता का शिक्षा के प्रति एक विशेष और गहरा लगाव था। उन्होंने हमेशा इस बात पर बहुत जोर दिया कि किसी भी समाज की मजबूत नींव हमेशा अच्छी शिक्षा से ही तैयार होती है। तरावड़ी के राजकीय आदर्श संस्कृत वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की खराब स्थिति और वहां की जरूरतों को उन्होंने बहुत बारीकी से देखा। इसी को देखते हुए उन्होंने विद्यालय के नए भवन के निर्माण के लिए सबसे पहले आगे बढ़कर पहल की थी। उन्होंने समाज के सभी लोगों को अपने साथ जोड़ा और भवन निर्माण कार्य में भरपूर सहयोग किया। उन्होंने हमेशा यह सुनिश्चित करने का पूरा प्रयास किया कि सभी विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए एक बेहतर वातावरण मिल सके। उनका हमेशा से यह विचार था कि समाज के सभी बच्चों को बेहतर शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराना ही दुनिया की सबसे बड़ी सेवा है। इसी मुख्य उद्देश्य के चलते शिक्षा से जुड़े हुए सभी कार्य उनके सामाजिक जीवन का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा हमेशा बने रहे।

सेवा और संस्कारों की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं प्रदीप गुप्ता

स्वर्गीय लाला खुशी राम गुप्ता द्वारा स्थापित की गई सेवा और सामाजिक सरोकारों की यह पुरानी परंपरा आज उनके परिवार में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उनके सुपुत्र और श्री हंस राइस एंड जनरल मिल्S के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रदीप गुप्ता आज सामाजिक सेवा और शिक्षा से जुड़े सभी कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं। प्रदीप गुप्ता हमेशा से ही जरूरतमंद लोगों की सहायता करने के साथ-साथ शिक्षा से जुड़े कार्यों में अपना बहुमूल्य योगदान देते रहे हैं। उनके इन सभी कार्यों में अपने आदरणीय पिता के संस्कारों और उनकी सच्ची सेवा भावना की एक बहुत साफ झलक देखने को मिलती है। पूरे परिवार का हमेशा से यही कड़ा प्रयास रहा है कि स्वर्गीय लाला खुशी राम गुप्ता ने समाजसेवा की जो महान परंपरा शुरू की थी, उसे आगे भी पूरी निरंतरता के साथ जारी रखा जाए।

तरावड़ी रेलवे स्टेशन पर झेलम एक्सप्रेस का ठहराव

तरावड़ी रेलवे स्टेशन पर प्रसिद्ध झेलम एक्सप्रेस ट्रेन के ठहराव की सुविधा को क्षेत्र में उपलब्ध करवाने के महत्वपूर्ण प्रयासों में भी स्वर्गीय लाला खुशी राम गुप्ता की बहुत मुख्य भूमिका रही थी। क्षेत्र की भारी जरूरत और मांग को बहुत अच्छी तरह समझते हुए उन्होंने इस जरूरी मांग को हमेशा प्रमुखता के साथ उठाया था। सतगुरु सतपाल जी महाराज के पावन नेतृत्व में किए गए सभी प्रकार के जनहित प्रयासों के साथ वे भी इस पूरी मुहिम से सक्रिय रूप से जुड़े रहे थे। लगातार और कड़े प्रयासों के बाद ही आखिरकार तरावड़ी रेलवे स्टेशन पर झेलम एक्सप्रेस ट्रेन के ठहराव की यह सुविधा शुरू हो पाई थी। रेलवे की यह महत्वपूर्ण सुविधा आज भी क्षेत्र के सभी आम और खास लोगों के लिए बहुत अधिक उपयोगी साबित हो रही है। खास तौर पर क्षेत्र के सभी व्यापारियों, किसानों, विद्यार्थियों और दूसरे बड़े शहरों में लगातार आवागमन करने वाले सभी आम यात्रियों को इस सुविधा का बहुत लाभ मिलता है। उनके द्वारा किए गए इस महान प्रयास को हमेशा क्षेत्र के चहुंमुखी विकास और जनसुविधाओं से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में गिना जाता है।

12 वर्षों तक अग्रवाल सभा की संभाली बड़ी जिम्मेदारी

स्वर्गीय लाला खुशी राम गुप्ता ने अपने जीवनकाल में करीब 12 लंबे वर्षों तक प्रतिष्ठित अग्रवाल सभा के प्रधान के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। इतने लंबे समय तक किसी भी संगठन की जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से संभालना उनके प्रति समाज के अगाध विश्वास को साफ तौर पर दर्शाता है। अपने इस लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने हमेशा समाज को एक सूत्र में संगठित रखने का काम किया। उन्होंने सभी प्रकार की सामाजिक गतिविधियों को हमेशा बढ़ावा दिया और गरीब तथा जरूरतमंद परिवारों की आर्थिक सहायता के लिए हमेशा कड़े कार्य किए। उनका हमेशा से यही मुख्य प्रयास रहता था कि समाज के सभी लोग आपस में भाईचारे और आपसी सहयोग की मजबूत भावना के साथ निरंतर आगे बढ़ें। सभी प्रकार के सामाजिक आयोजनों को सफल बनाने के साथ-साथ जरूरतमंद लोगों की समय पर सहायता करने को भी उन्होंने हमेशा अपनी सबसे पहली प्राथमिकता बनाया था।

अनाज मंडी के विकास और बेहतर तालमेल पर दिया पूरा जोर

व्यापारिक क्षेत्र के अंदर भी स्वर्गीय लाला खुशी राम गुप्ता की हमेशा से एक बहुत ही सक्रिय और सकारात्मक भूमिका रही थी। वे अपने जीवनकाल में कई बार तरावड़ी की मुख्य अनाज मंडी के प्रधान पद पर निर्वाचित हुए थे। मंडी से जुड़े हुए अपने सभी दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करते हुए उन्होंने हमेशा सभी किसानों और आढ़तियों के बीच एक बेहतर आपसी तालमेल बनाए रखने पर सबसे ज्यादा जोर दिया। उनकी बहुत स्पष्ट सोच यह थी कि मंडी की पूरी व्यवस्था तभी सुचारू रूप से चल सकती है, जब किसान, आढ़ती और व्यापार से जुड़े हुए सभी लोग आपसी सहयोग के साथ मिलकर काम करें। उन्होंने हमेशा अनाज मंडी से जुड़े विभिन्न गंभीर विषयों को पूरी प्रमुखता के साथ उठाया। अपने पूरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने मंडी परिसर में हमेशा एक शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए अथक प्रयास किए थे।

मानव सेवा को भी बनाया था अपने जीवन का मुख्य हिस्सा

स्वर्गीय लाला खुशी राम गुप्ता मानव उत्थान सेवा समिति के जिला अध्यक्ष के रूप में भी विभिन्न प्रकार के सेवा कार्यों से बहुत गहराई से जुड़े रहे थे। इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को निभाते हुए उन्होंने हमेशा सभी जरूरतमंद परिवारों की हरसंभव सहायता करने का प्रयास किया। उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों को हमेशा भलाई और सेवा के कार्यों के साथ जोड़ने का सराहनीय कार्य किया था। उनके लिए सच्ची सेवा कभी भी किसी एक विशेष संस्था या किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं रही। उनके लिए केवल किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति तक सही समय पर मदद पहुंचाना ही उनके जीवन का एकमात्र मुख्य उद्देश्य बन गया था। उन्होंने अपने पूरे जीवनकाल में समाज को यह बहुत बड़ा संदेश दिया था कि समाज से मिलने वाले सम्मान का सबसे अच्छा उपयोग केवल समाज के हित में कार्य करके ही किया जा सकता है। यही सबसे बड़ा मुख्य कारण है कि आज भी उनके साथ जुड़े हुए सभी लोग उनके बेहद सरल स्वभाव, उनकी सच्ची सेवा भावना और उनके महान सामाजिक सरोकारों को बहुत याद करते हैं।

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