कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में चौथे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ समापन, समुद्री सुरक्षा और ब्लू इकोनॉमी पर हुआ मंथन

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंडो-पैसिफिक स्टडीज (आईसीआईपीएस) द्वारा आयोजित दो दिवसीय चौथे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का मंगलवार को समापन हुआ। सम्मेलन के निदेशक प्रो. वीएन अत्री ने बताया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग, समुद्री सुरक्षा, सतत विकास, ब्लू इकोनॉमी, समुद्री शासन, जलवायु परिवर्तन तथा इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव (आईपीओआई) के प्रभावी क्रियान्वयन पर देश-विदेश के विशेषज्ञों ने व्यापक मंथन किया।
पहले दिन के सत्र में विशेषज्ञों के विचार
सम्मेलन के पहले दिन आईओआरए के महासचिव संजीव रंजन ने कहा कि हिंद-प्रशांत में विभिन्न सहयोगी ढांचे एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक हैं। मौजूदा व्यवस्थाओं को आपस में जोड़कर व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने हिंद-प्रशांत के भविष्य को सहयोग, समावेशिता और नियम-आधारित व्यवस्था से जोड़ते हुए कुरुक्षेत्र की धरती से भगवद्गीता के कर्मयोग के संदेश का उल्लेख किया।
बीआईएमएसटीईसी और क्षेत्रीय पहल
बीआईएमएसटीईसी के महासचिव इंद्रमणि पांडे ने कहा कि भारत की आईपीओआई की सातों प्राथमिकताएं बीआईएमएसटीईसी के मौजूदा एजेंडे से व्यापक रूप से जुड़ी हैं। दोनों क्षेत्रीय पहलों के बीच सहयोग को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने बंगाल की खाड़ी के रणनीतिक महत्व, कनेक्टिविटी, व्यापार, सुरक्षा और सतत विकास पर भी प्रकाश डाला।
वैश्विक परिस्थितियां और हिंद महासागर
राजदूत डॉ. अनिल सूकलाल ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में हिंद महासागर क्षेत्र की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। आईओआरए को अपनी भूमिका, प्राथमिकताओं और कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए नई दिशा निर्धारित करने की आवश्यकता है। उन्होंने राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत करने तथा शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर नियमित संवाद को महत्वपूर्ण बताया।
भू-राजनीतिक बदलाव और अकादमिक भूमिका
राजदूत संजय पांडा ने कहा कि वर्तमान समय वैश्विक स्तर पर अभूतपूर्व अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक बदलावों का दौर है। ऐसे में अकादमिक संस्थानों, शोधकर्ताओं और थिंक टैंकों को मिलकर नए एवं व्यावहारिक समाधान तलाशने होंगे।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा का संबोधन
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र का भविष्य सुरक्षित, स्थिर, टिकाऊ, समृद्ध और नियम-आधारित व्यवस्था के निर्माण में निहित है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना का उल्लेख करते हुए आईपीओआई की सात प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारत की आईओआरए अध्यक्षता के दौरान नवाचार, खुलेपन, लचीलेपन और अनुकूलनशीलता को महत्वपूर्ण बताया तथा समुद्रयान मिशन और ‘मत्स्य 6000’ जैसी परियोजनाओं का उल्लेख किया।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के सुझाव
डॉ. नोमवुयो एन. नोक्वे, पूर्व महासचिव, हिंद महासागर रिम संघ ने हिंद महासागर और आसियान क्षेत्र के बीच अंतर-क्षेत्रीय सहयोग मजबूत करने की आवश्यकता बताई। डॉ. किलापर्ति रामकृष्ण, वरिष्ठ सलाहकार, वुड्स होल ओशनोग्राफिक इंस्टीट्यूशन, अमेरिका ने विज्ञान, संस्थागत सहयोग, तकनीक, वित्त और प्रभावी क्रियान्वयन को एक साथ जोड़ने पर बल दिया। डॉ. औगांग धमार, रेक्टर, यूनिवर्सिटास मैरिटिम राजा अली हाजी, इंडोनेशिया ने भारत और इंडोनेशिया के बीच समुद्री विज्ञान, अनुसंधान और ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
दूसरे दिन का समापन सत्र और कुलसचिव के विचार
दूसरे दिन सम्मेलन के समापन अवसर पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. वीरेन्द्र पाल ने कहा कि हरियाणा के मध्य में स्थित कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा समुद्र, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक जैसे विषयों पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करना यह दर्शाता है कि भौगोलिक दूरी बौद्धिक दूरी नहीं होती। अर्थशास्त्र, सामाजिक विज्ञान, पर्यावरण और भू-विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ समुद्री एवं क्षेत्रीय नीतियों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने संवाद से सहयोग, सहयोग से क्रियान्वयन, सुरक्षा से व्यापक मानव सुरक्षा, आर्थिक विकास से सतत समृद्धि तथा ज्ञान नेटवर्क के निर्माण को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
ब्लू इकोनॉमी और जलवायु परिवर्तन पर चर्चा
दूसरे दिन सुबह के सत्र में प्रो. चार्ल्स कोलगन, शोध निदेशक, सेंटर फॉर द ब्लू इकोनॉमी, अमेरिका ने कहा कि ब्लू इकोनॉमी पर पिछले करीब 15 वर्षों से लगातार चर्चा हो रही है और हिंद महासागर क्षेत्र के लगभग सभी देशों में इससे संबंधित गतिविधियां चल रही हैं। डॉ. बद्री नारायणन, संस्थापक एवं निदेशक, इनफिनिट सम मॉडलिंग एलएलसी, अमेरिका ने महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में जल संकट और समुदाय द्वारा विकसित स्थानीय नवाचारों पर चर्चा की। प्रो. जॉन विर्डिन, निदेशक, ओशन पॉलिसी प्रोग्राम, ड्यूक विश्वविद्यालय, अमेरिका ने समुद्री औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार और जलवायु परिवर्तन के संयुक्त प्रभावों पर प्रकाश डाला। डॉ. क्रिस्टीन एम. ग्रिम्सरुड, वरिष्ठ शोधकर्ता, स्टैटिस्टिक्स नॉर्वे ने नॉर्वे में चल रहे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र लेखांकन पायलट प्रोजेक्ट की जानकारी दी। प्रो. ऐन-फ्रांस्वाज़ ज़त्तारा, यूनिवर्सिटी ऑफ ला रीयूनियन, फ्रांस ने समुद्री कानून और संसाधनों के उपयोग की बदलती अवधारणाओं पर प्रकाश डाला। प्रो. एस. के. मोहंती, नालंदा विश्वविद्यालय ने ब्लू इकोनॉमी को बहुविषयक अवधारणा बताते हुए पर्यावरण, जैव विविधता, विज्ञान और अर्थशास्त्र को साथ लेकर इसके विकास को समझने की आवश्यकता बताई।
समापन सत्र के अन्य महत्वपूर्ण विचार
समापन सत्र में प्रो. रोनान लॉन्ग ने बीबीएनजे एग्रीमेंट तथा जलवायु परिवर्तन से संबंधित अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं की सलाहकारी राय पर चर्चा की। प्रो. इमादुल इस्लाम, वरिष्ठ शोध फेलो, ओपीआरआई-एसपीएफ, जापान ने समुद्री क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और शोध की भूमिका पर प्रकाश डाला। प्रो. नीरा वर्मा, पूर्व डीन अकादमिक अफेयर्स, गुरुग्राम विश्वविद्यालय ने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह को हिंद-प्रशांत के केंद्र में स्थित रणनीतिक क्षेत्र के रूप में देखने की आवश्यकता बताई। प्रो. भगवान सिंह चौधरी, भूभौतिकी विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने जलवायु परिवर्तन के जल संसाधनों एवं मानव स्वास्थ्य पर प्रभावों की चर्चा की तथा उपग्रह आधारित पर्यावरणीय अवलोकनों के महत्व को रेखांकित किया। प्रो. अशोक चौहान ने शोध एवं ज्ञान-निर्माण की उपलब्धियां साझा कीं। आईसीआईपीएस के निदेशक प्रो. वी. एन. अत्री ने सम्मेलन के सफल आयोजन पर सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, आयोजकों, संयोजकों, शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पलक बजाज और डॉ. दिशा कक्कड़ ने किया तथा डॉ. किरण लांबा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। सम्मेलन में एंबेसडर डॉ. राजीव कुमार भाटिया, एंबेसडर डॉ. जे. त्रिपाठी, एडमिरल चावला, एंबेसडर अनूप मुदगल, अमेरिका से प्रो. कृष सीता, मॉरीशस से डॉ. पूजा, डॉ. श्रुति बनर्जी, डॉ. पंखुरी गौड़, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. राकेश कुमार, डीन ऑफ कॉलेजिज प्रो. ब्रजेश साहनी, डीन रिसर्च प्रो. संजीव अग्रवाल, प्रो. अनिल मित्तल, प्रो. तेजेन्द्र शर्मा, प्रो. विवेक चावला, डॉ. हेमलता, प्रो. अर्चना चौधरी, डॉ. किरण लांबा, डॉ. सुरजीत, डॉ. प्रिया शर्मा, डॉ. निधि बगरिया, डॉ. इशू गर्ग, डॉ. पलक बजाज सहित शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।