कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में शहीद भगत सिंह की जयंती और चौथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के परिसर में शहीद भगत सिंह की जयंती मनाई गई। हरियाणा के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इसके अलावा केयू में चौथे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया।
शहीद भगत सिंह का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में यह आयोजन हुआ। हरियाणा के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने सोमवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय परिसर स्थित शहीद भगत सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने शहीद भगत सिंह को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने शहीद भगत सिंह के राष्ट्र के प्रति अद्वितीय समर्पण, साहस, त्याग और बलिदान को स्मरण किया।
शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने कहा कि शहीद भगत सिंह का जीवन देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने अल्पायु में ही देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। उनका संघर्ष, निर्भीकता और राष्ट्र के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरणा देता रहेगा। वे केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि एक प्रखर चिंतक और जागरूक युवा राष्ट्रवादी भी थे।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव लेफ्टिनेंट प्रो. वीरेन्द्र पाल ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि शहीद भगत सिंह के विचार आज भी युवाओं को राष्ट्रहित में कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं। इस अवसर पर कुवि कुलसचिव, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एआर चौधरी, प्रो. दिनेश राणा, प्रो. अनिल गुप्ता और अन्य शिक्षक उपस्थित रहे। सभी ने शहीद भगत सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र और समुद्री सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंडियन ओशन एंड इंडो-पैसिफिक स्टडीज की ओर से अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। यह सम्मेलन श्रीमद्भगवद्गीता सदन के सीनेट हॉल में हुआ। आईओआरए के महासचिव संजीव रंजन ने कहा कि हिंद-प्रशांत में विभिन्न सहयोगी ढांचे एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं हैं। वे एक-दूसरे के परस्पर पूरक हैं।
सम्मेलन के निदेशक प्रो. वी.एन. अत्री ने देश-विदेश से पहुंचे प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक भविष्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण क्षेत्र है। बीआईएमएसटीईसी के महासचिव इंद्रमणि पांडे ने कहा कि क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने में बीआईएमएसटीईसी की महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत द्वारा शुरू की गई आईपीओआई की प्राथमिकताएं इससे जुड़ी हैं।
राजदूत डॉ. अनिल सूकलाल ने कहा कि आईओआरए को नई ऊर्जा और स्पष्ट दिशा की जरूरत है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में हिंद महासागर क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है। राजदूत संजय पांडा ने कहा कि हिंद-प्रशांत की सुरक्षा और स्थिरता के लिए नए समाधान तलाशने होंगे। वर्तमान समय वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं का दौर है।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा और अन्य विशेषज्ञों के विचार
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि नियम-आधारित व्यवस्था से स्थिर और शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत बनेगा। उन्होंने भारत की 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना का उल्लेख किया। डॉ. नोमवुयो एन. नोक्वे ने क्रॉस-रीजनल सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
डॉ. किलापर्ति रामकृष्ण ने विज्ञान, संस्थागत सहयोग और तकनीक को एक साथ जोड़ने की बात कही। डॉ. औगांग धमार ने भारत और इंडोनेशिया के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता बताई। मंच का संचालन डॉ. पलक बजाज और डॉ. दिशा कक्कड ने किया। प्रो. तेजेन्द्र शर्मा ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन के सत्र
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन वैश्विक नीली अर्थव्यवस्था के उभरते रुझानों पर विशेषज्ञ मंथन करेंगे। यह सत्र 29 सितंबर को आयोजित किया जाएगा। इस सत्र की अध्यक्षता आईसीआईपीएस के निदेशक प्रो. वी. एन. अत्री करेंगे। प्रो. चार्ल्स कोलगन सह-अध्यक्ष होंगे। सत्र में देश-विदेश के विशेषज्ञ विचार-विमर्श करेंगे।