कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में विश्व ओजोन दिवस, सीएसआईआर-नेट सफलता और यूआईईटी तकनीकी दिवस का आयोजन

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में विश्व ओजोन दिवस, सीएसआईआर-नेट सफलता और यूआईईटी तकनीकी दिवस का आयोजन

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग में विश्व ओजोन दिवस पर विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया है। इसके अलावा, केयू के एनईपी के पहले बैच की छात्रा ने सीएसआईआर-नेट में ऑल इंडिया का 53वां रैंक हासिल किया है। साथ ही, केयू यूआईईटी संस्थान में तकनीकी दिवस का आयोजन किया गया है।

पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड एंड ऑनर्स स्टडीज (आईआईएचएस) के वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा विश्व ओजोन दिवस मनाया गया। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान, कुरुक्षेत्र की अध्यक्ष डॉ. ममता सचदेवा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। ओजोन परत के संरक्षण, पर्यावरण संतुलन तथा पृथ्वी को हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाने के लिए सभी को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि विश्व ओजोन दिवस मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के तहत किए गए ऐतिहासिक समझौते की स्मृति में मनाया जाता है। कार्यक्रम में आईआईएचएस बॉटनी के विभाग अध्यक्ष प्रो. अनिल ने डॉ. ममता सचदेवा एवं आईआईएचएस की प्रधानाचार्या प्रो. रीटा का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। इसके पश्चात अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित किया गया तथा उपस्थित सदस्यों ने वंदे मातरम् का सामूहिक गान किया। डॉ. ममता सचदेवा ने क्योटो प्रोटोकॉल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दैनिक जीवन में ऐसी पर्यावरण-अनुकूल आदतों को अपनाने की आवश्यकता है, जिनसे ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाली हानिकारक गैसों का वायुमंडल में प्रसार कम हो। आईआईएचएस की प्रधानाचार्या प्रो. रीटा ने विद्यार्थियों को ओजोन परत के महत्व एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रेरित किया। वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल गुप्ता ने ओजोन परत के संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए इसे अनसंग हीरो बताया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। प्रत्येक विद्यार्थी पर्यावरण संरक्षण का संदेश समाज तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रतियोगिताओं में उत्साहपूर्वक भाग लेने के लिए प्रेरित किया। डॉ. कविता रानी ने मुख्य अतिथि डॉ. ममता सचदेवा का संक्षिप्त परिचय एवं जीवनवृत्त प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों की रचनात्मकता एवं पर्यावरण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए ऑन-स्पॉट रंगोली, स्लोगन लेखन एवं पोस्टर निर्माण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं में वनस्पति विज्ञान विभाग के 80 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने ओजोन परत के महत्व, इसके संरक्षण तथा पर्यावरण सुरक्षा से संबंधित विभिन्न संदेशों को अपनी कलात्मक एवं रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया। प्रतियोगिताओं में प्रो. अश्वनी मित्तल, डॉ. सुकर्मवती देवी, डॉ. मंजू नरवाल, डॉ. रजनी गोयल, डॉ. सतीश चौहान एवं डॉ. संजय शर्मा ने निर्णायक मंडल की भूमिका निभाई। डॉ. ज्योति चौहान ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इसके पश्चात राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम के सफल आयोजन में विभाग के संकाय सदस्यों डॉ. ज्योति चौहान, डॉ. कविता रानी, डॉ. विशाल अवस्थी, डॉ. शिवानी वर्मा एवं डॉ. संजीत बुरा का महत्वपूर्ण योगदान रहा। विभाग के शोधार्थियों मासूम, ईशा, निशु, हिमांशी, रोमा, लव एवं दीपक तथा विद्यार्थियों ने वालंटियर के रूप में विभिन्न प्रतियोगिताओं की व्यवस्थाओं में सहयोग दिया। गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों रघुबीर, विनोद, मुकेश एवं नितेश ने भी कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग प्रदान किया।

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विभिन्न प्रतियोगिताओं के परिणाम

स्लोगन लेखन प्रतियोगिता में पूर्वांशी ने प्रथम, राज नंदिनी ने द्वितीय तथा अपर्णा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। रंगोली प्रतियोगिता में हरमंदिप प्रथम, उमंग द्वितीय तथा कंचन तृतीय स्थान पर रहीं। पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता में हिमांशी ने प्रथम, लविशा ने द्वितीय तथा पारूल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। निर्णायक मंडल द्वारा विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए तथा उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की गई।

केयू छात्रा की ऐतिहासिक उपलब्धि

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के लिए यह गौरव का विषय है कि इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड एंड ऑनर्स स्टडीज (आईआईएचएस) के जीव रसायन विज्ञान विभाग की राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के पहले बैच की छात्रा प्रज्ञा पांडेय ने प्रतिष्ठित सीएसआईआर-यूजीसी नेट परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 53 हासिल कर सफलता प्राप्त की है। इस उपलब्धि के साथ प्रज्ञा पांडेय असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए पात्र होने के साथ-साथ पीएचडी में प्रवेश के लिए भी योग्य हो गई हैं। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने छात्रा की इस उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय देश का पहला ऐसा विश्वविद्यालय है जिसने एनईपी-2020 को समग्र और प्रभावी रूप से लागू करते हुए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नया मानदंड स्थापित किया है। केयू छात्रा प्रज्ञा पांडेय की यह उपलब्धि स्नातक स्तर पर अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने तथा विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और शोध के लिए तैयार करने के विश्वविद्यालय के प्रयासों को दर्शाती है। कुलसचिव प्रो. वीरेन्द्र पाल ने भी छात्रा को बधाई दी। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की ओर से एनईपी-2020 के पहले बैच की छात्रा द्वारा सीएसआईआर-नेट में ऑल इंडिया रैंक 53 हासिल करना विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं अनुसंधान परिवेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आईआईएचएस की प्राचार्या प्रो. रीटा ने प्रज्ञा पांडेय को इस शानदार सफलता के लिए बधाई दी। उन्होंने जीव रसायन विज्ञान विभाग के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रयासों की भी सराहना की। जीवरसायन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अश्वनी मित्तल, डॉ. रितु सैनी एवं डॉ. शुभंकर ने भी छात्रा को उनकी उपलब्धि पर बधाई दी।

यूआईईटी में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (यूआईईटी) के एम.वी. सदन स्थित मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में तकनीकी दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए यूआईईटी के निदेशक एवं डीन प्रो. सुनील ढींगरा ने कहा कि यूआईईटी की स्थापना वर्ष 2004 में माइंड टू मार्केट के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार, टीमवर्क तथा मूल्य आधारित तकनीकी शिक्षा के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि संस्थान में वर्तमान में विभिन्न क्षेत्रों में 2000 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। मुख्य अतिथि राइट्स लिमिटेड, गुरुग्राम के जे.जी.एम. जागेश्वरी गुप्ता ने कहा कि सिविल इंजीनियर देश के निर्माण और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विद्यार्थियों को सड़कों, पुलों, नदियों, बांधों तथा अन्य आधारभूत संरचनाओं के डिजाइन एवं निर्माण के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और अनुकूल कार्य वातावरण के साथ योगदान देने के लिए तैयार रहना चाहिए। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, पंचकूला से विशु कंबोज ने शहरी विकास में सिविल इंजीनियरों की भूमिका और कार्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की। सीमेंस एनर्जी के जनरल मैनेजर नितिन गुप्ता ने भी तकनीकी क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा नवीन तकनीकों पर आधारित मॉडल प्रदर्शनी, रोबोटिक्स डेमो तथा तकनीकी क्विज का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने अपने तकनीकी ज्ञान, नवाचार एवं रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों दिव्यांशी गुप्ता, संगम, राखी, मोक्ष, सहज, सलोनी, रौनक और आदित्य को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ. राजेश अग्निहोत्री, डॉ. विशाल अहलावत, डॉ. मंजीत बोहत, जश्नदीप, रविंद्र चौधरी, विकास, मयंक, रविंद्र तोमर, कुलदीप मलिक, सुरेंद्र सहित संस्थान के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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