कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में हरियाणा हिस्ट्री कांग्रेस के 11वें अधिवेशन के पोस्टर का विमोचन, संत परंपरा और रक्तदान शिविर पर हुए विशेष कार्यक्रम

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने मंगलवार को हरियाणा हिस्ट्री कांग्रेस के 11वें अधिवेशन के पोस्टर का विमोचन किया। हरियाणा हिस्ट्री कांग्रेस का यह 11 वां अधिवेशन आगामी 3 एवं 4 नवंबर 2026 को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में आयोजित किया जाएगा। कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने अधिवेशन के सफल आयोजन के लिए प्रो. भगत सिंह एवं उनकी पूरी आयोजन टीम को शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अकादमिक आयोजन हरियाणा के इतिहास, संस्कृति, पुरातत्व एवं विरासत के विभिन्न पहलुओं पर शोध एवं विमर्श को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के अध्यक्ष प्रो. भगत सिंह ने बताया कि इस अधिवेशन का आयोजन विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के सहयोग से किया जा रहा है। अधिवेशन में हरियाणा के इतिहास, पुरातत्व, संस्कृति एवं समृद्ध विरासत से जुड़े विभिन्न विषयों पर विद्वानों द्वारा शोध-पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। हरियाणा हिस्ट्री कांग्रेस का 11वां अधिवेशन शोधार्थियों, शिक्षकों एवं इतिहास के विशेषज्ञों के लिए अपने शोध एवं विचार साझा करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा। इस अवसर पर आयोजन से जुड़े अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में हिंदी विभाग की ओर से मंगलवार को ‘संत काव्य परंपरा’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता दयाल सिंह कॉलेज, करनाल के प्रोफेसर रणधीर सिंह ने कहा कि संतों की वाणी ने सामाजिक समरसता, मानवीय समानता और आपसी सद्भाव का सशक्त संदेश दिया। संत कवियों ने जाति, वर्ग, ऊंच-नीच तथा धार्मिक संकीर्णताओं से ऊपर उठकर मनुष्य को मनुष्य के रूप में देखने की दृष्टि विकसित की। कबीर, रैदास, गुरु नानक आदि संतों की वाणी में सामाजिक कुरीतियों के विरोध के साथ-साथ प्रेम, करुणा, सह-अस्तित्व और भाईचारे की भावना प्रमुखता से दिखाई देती है।
संत वाणी के व्यावहारिक पक्ष को चिह्नित करते हुए कहा गया कि संतों की वाणी में और वर्तमान कविता में मूलभूत अंतर है। प्रोफेसर रणधीर सिंह ने कहा कि संतों की वाणी बिना किसी बाह्य प्रयास के उनके अपने जीवन के अनुभवों से उपजी है। उन्होंने कहा कि संतों की वाणी इस्लाम की कट्टरपंथी धारणाओं तथा हिन्दू धर्म की कुरीतियों के विरुद्ध उपजी थी। उन्होंने दोनों ही धर्मों को एक ही पंक्ति में समान रूप से फटकार लगाई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय की आपाधापी में संतों की वाणी हमारे जीवन के लिए एक सम्यक मार्गदर्शक का काम कर सकती है।
हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. महासिंह पूनिया ने कहा कि संत काव्य परंपरा हिंदी साहित्य की ऐसी धारा है, जिसने साहित्य को आम लोगों के जीवन से जोड़ा। संत कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में समानता, प्रेम, भाईचारे और सद्भाव की भावना को मजबूत किया। उन्होंने विद्यार्थियों से संत साहित्य का गंभीर अध्ययन करने और उसके मानवीय संदेश को समझने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के व्याख्यानों का मूल लक्ष्य विद्यार्थियों को हिंदी साहित्य की समृद्ध संत काव्य परंपरा के विविध और अनछुए पक्षों से गहराई से परिचित कराना है।
विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने संत काव्य की भाषा, भक्ति आंदोलन, निर्गुण-सगुण परंपरा और संत साहित्य की वर्तमान प्रासंगिकता से जुड़े प्रश्न पूछे। उनके इस व्याख्यान के दौरान साहित्य में मानवीय मूल्यों, कबीर, रैदास जैसे संतों की वैचारिक क्रांति और आधुनिक परिदृश्य में संत परंपरा की प्रासंगिकता पर गहन विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में डॉ. जसबीर सिंह, एम.ए. हिंदी के विद्यार्थियों तथा विभाग के सभी शोधार्थियों ने भाग लिया।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड एंड ऑनर्स स्टडीज (आईआईएचएस) के बी.ए. इंग्लिश ऑनर्स की पूर्व छात्राओं सृजा एवं कामना ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए प्रथम प्रयास में यूजीसी-नेट परीक्षा उत्तीर्ण की है। आईआईएचएस की प्राचार्या प्रो. रीटा ने सृजा एवं कामना को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि विद्यार्थियों की सफलता संस्थान के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने दोनों छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
आईआईएचएस की अंग्रेजी विभाग की शिक्षिका डॉ. जिम्मी शर्मा ने भी दोनों छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि प्रथम प्रयास में यूजीसी-नेट उत्तीर्ण करना उनकी मेहनत, लगन और विषय के प्रति समर्पण को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सृजा और कामना की यह उपलब्धि आईआईएचएस के अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायक है। इस अवसर पर प्रो. पूनम कुमारी, प्रो. ऋचा सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (यूआईईटी) में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) यूनिट, जन सहयोग एवं माई भारत के संयुक्त तत्वावधान में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का शुभारंभ यूआईईटी के निदेशक प्रो. (डॉ.) सुनील ढींगरा ने किया। शिविर में विद्यार्थियों एवं स्टाफ सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए कुल 31 यूनिट रक्तदान किया।
इस अवसर पर प्रो. सुनील ढींगरा ने कहा कि रक्तदान सबसे बड़ा दान है और एक यूनिट रक्त से तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि उन्हें रक्तदान जैसे पुनीत कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि रक्तदान को लेकर किसी भी प्रकार का संकोच नहीं करना चाहिए, क्योंकि स्वस्थ व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान सुरक्षित प्रक्रिया है। कुरुक्षेत्र ब्लड बैंक की मेडिकल टीम ने शिविर में रक्त एकत्रित किया। डॉ. राजेश अग्निहोत्री एवं डॉ. पवन दीवान ने रक्तदाताओं को प्रमाण-पत्र एवं बैज देकर सम्मानित किया।
माई भारत की ओर से अनुराग ने कहा कि रक्तदान जैसे सामाजिक एवं पुनीत कार्यों में युवाओं की बढ़-चढ़कर भागीदारी विकसित भारत के संकल्प को मजबूत करती है। जन सहयोग की टीम की ओर से मास्टर जितेंद्र, अंगूरी लाल एवं अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे। संस्थान के राष्ट्रीय सेवा योजना अधिकारी डॉ. मंजीत ने सभी रक्तदाताओं, मेडिकल टीम, सहयोगी संस्थाओं एवं आयोजन में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. मंजीत बोहत, डॉ. सुनील नैन, यूआईईटी निदेशक प्रो. (डॉ.) सुनील ढींगरा, अधीक्षक दीपक शर्मा, रविंद्र तोमर, हरिकेश पपोसा सहित संस्थान के सभी विभागाध्यक्ष, शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।