कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में विधिक सहायता कार्यशाला और एचसीएस मॉक इंटरव्यू का आयोजन

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में विधिक सहायता कार्यशाला और एचसीएस मॉक इंटरव्यू का आयोजन

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में हाल ही में दो महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। इन कार्यक्रमों में विधिक सहायता कार्यशाला और एचसीएस मॉक इंटरव्यू शामिल हैं, जिनमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कानूनी अधिकारों के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के गुर सीखे।

  • कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ द्वारा यूनिवर्सिटी सीनियर सेकेंडरी मॉडल स्कूल में एक दिवसीय विधिक सहायता कार्यशाला का आयोजन किया गया।
  • कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में सामान्य एवं विधिक जागरूकता उत्पन्न करना था।
  • महात्मा गांधी अखिल भारतीय सेवा प्रशिक्षण संस्थान के निर्देशन में हरियाणा सिविल सेवा के लिए तीन दिवसीय मॉक इंटरव्यू कार्यक्रम का दूसरा दिन आयोजित हुआ।

विधिक सहायता कार्यशाला में विद्यार्थियों को मिली कानूनी जानकारी

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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा के कुशल मार्गदर्शन में इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ द्वारा यूनिवर्सिटी सीनियर सेकेंडरी मॉडल स्कूल, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में एक दिवसीय विधिक सहायता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ के निदेशक प्रो. (डॉ.) अमित लूदरी ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में सामान्य एवं विधिक जागरूकता उत्पन्न करना है।

विद्यार्थियों को उनके अधिकारों, कानूनी दायित्वों और समसामयिक सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक किया गया। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, बच्चों के अधिकार, महिला सशक्तिकरण, कन्या भ्रूण हत्या, कानूनी अधिकार एवं अन्य सामाजिक एवं विधिक विषयों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई।

कार्यक्रम का संचालन विधि संस्थान की लीगल एड कैंप की संयोजिका एसोसिएट प्रो. कृष्णा अग्रवाल द्वारा किया गया। उन्होंने विधिक सहायता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विधिक सहायता प्रत्येक व्यक्ति को न्याय तक पहुँच सुनिश्चित करने तथा अपने अधिकारों, कर्तव्यों एवं कानूनी दायित्वों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

कार्यक्रम में सहायक प्रोफेसर डॉ. शालू अग्रवाल एवं डॉ. सुमित कुमार भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की देखरेख उपाध्यक्ष डॉ. सुनीता दलाल एवं उप-प्रधानाचार्य श्री प्रवीण कुमार द्वारा की गई। कार्यशाला में इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ के 30 से अधिक विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जबकि विद्यालय के लगभग 200 विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।

कार्यक्रम का मंच संचालन हिमांशी एवं जेशिका द्वारा किया गया। इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ के विद्यार्थियों द्वारा कन्या भ्रूण हत्या, महिला सशक्तिकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं कानूनी अधिकार, बच्चों के अधिकार तथा अन्य सामाजिक एवं विधिक जागरूकता से संबंधित विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए गए।

कार्यशाला का विशेष आकर्षण पाक्सो अधिनियम यानी लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम पर आधारित नुक्कड़ नाटक और लघु नाटिका रही। कार्यक्रम के अंत में डॉ. सुमित कुमार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।

एचसीएस मॉक इंटरव्यू के द्वितीय दिवस विशेषज्ञों ने परखी प्रतिभा

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में महात्मा गांधी अखिल भारतीय सेवा प्रशिक्षण संस्थान के निर्देशन में हरियाणा सिविल सेवा के लिए आयोजित तीन दिवसीय मॉक इंटरव्यू कार्यक्रम के दूसरे दिन विद्यार्थियों का विशेषज्ञों द्वारा साक्षात्कार लिया गया।

प्रातः कालीन सत्र की अध्यक्षता प्रो. भगवान सिंह चौधरी जो जियोफिजिक्स विभाग से हैं ने की तथा सायं कालीन सत्र की अध्यक्षता सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी रोशन लाल सैनी ने की। इस दौरान प्रो. आर.के. मोदगिल, डॉ. रमेश सिरोही, डॉ. धर्मबीर, डॉ. राजरतन, डॉ. कुलदीप मेंहदीरत्ता तथा दृष्टि आईएएस, नई दिल्ली के आमंत्रित विशेषज्ञ धनंजय कुमार एवं केवल कृष्ण ने विद्यार्थियों से प्रश्न पूछे।

विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों से समसामयिक घटनाक्रम, सामान्य अध्ययन, शैक्षणिक विषयों एवं व्यक्तिगत पृष्ठभूमि से संबंधित प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के आत्मविश्वास, उत्तर देने की शैली, तार्किक सोच, निर्णय लेने की क्षमता एवं परिस्थितियों के अनुरूप प्रतिक्रिया का आकलन करते हुए आवश्यक सुधार के लिए व्यक्तिगत सुझाव दिए।

डॉ. धर्मबीर ने कहा कि संस्थान विद्यार्थियों को सिविल सेवाओं एवं अन्य प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन उपलब्ध करवाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि मॉक इंटरव्यू विद्यार्थियों को वास्तविक साक्षात्कार का अनुभव प्रदान करने के साथ अपनी कमियों को पहचानकर उनमें सुधार का अवसर देते हैं।

कार्यक्रम में डॉ. परवेश, डॉ. संगीता धीर, भागवंती, रविन्द्र तलाव सहित नॉन-टीचिंग स्टाफ एवं शोधार्थियों का पूरा सहयोग रहा। इस पूरे आयोजन से विद्यार्थियों को अपनी तैयारी को बेहतर करने का बड़ा अवसर मिला है।

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