कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में जन परीक्षा संवाद कार्यशाला का आयोजन, परीक्षा प्रणाली में सुधार पर हुआ मंथन

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में जन परीक्षा संवाद कार्यशाला का आयोजन, परीक्षा प्रणाली में सुधार पर हुआ मंथन

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आईक्यूएसी, परीक्षा शाखा एवं भारतीय शिक्षण मंडल के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को सीनेट हॉल में जन परीक्षा संवाद विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का शुभारंभ वंदेमातरम, भारतीय शिक्षण मंडल के ध्येय श्लोक तथा दीप प्रज्जवल के साथ किया गया। कार्यशाला में परीक्षा व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण, पारदर्शी, विश्वसनीय, समावेशी एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने को लेकर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत करते हुए कहा कि परीक्षा केवल विद्यार्थियों को पास या फेल करने की प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए। यह पता लगाने का माध्यम होनी चाहिए कि विद्यार्थी ने वास्तव में कितना सीखा है।

परीक्षा व्यवस्था में सुधार और मूल्यांकन प्रक्रिया

प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए केवल परीक्षा के अंतिम परिणाम पर ध्यान देने के बजाय पूरी प्रक्रिया का पुनर्मूल्यांकन आवश्यक है। उन्होंने एसेसमेंट और एवोल्यूशन के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि एवोल्यूशन मुख्य रूप से निर्णय देने की प्रक्रिया है, जबकि एसेसमेंट एक निरंतर और सुधारात्मक प्रक्रिया है। उन्होंने बताया कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में वर्तमान में लगभग 30 प्रतिशत आंतरिक और 70 प्रतिशत बाहरी मूल्यांकन की व्यवस्था है तथा इसे धीरे-धीरे 50-50 के अनुपात की ओर ले जाने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीबीसीएस और आउटकम बेस्ड एजुकेशन राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण आधार हैं।

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प्रवेश परीक्षाओं की महत्ता और राष्ट्रीय व्यवस्था

कार्यशाला के मुख्य वक्ता महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेंद्र कुमार अनायत ने कहा कि देश में उच्च शिक्षा के लिए आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षाएं केवल विद्यार्थियों के भविष्य का निर्धारण करने वाली परीक्षाएं नहीं हैं। इनकी विश्वसनीयता और पारदर्शिता का सीधा संबंध देश की शैक्षिक व्यवस्था, सामाजिक गतिशीलता और मानव संसाधन की गुणवत्ता से है। उन्होंने कहा कि आज देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का एक बड़ा हिस्सा कोचिंग संस्कृति के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गया है। उन्होंने कहा कि देश में प्रवेश परीक्षाओं का महत्व लगातार बढ़ रहा है और परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में देखने की आवश्यकता है।

विशिष्ट अतिथि चौधरी देवी लाल यूनिवर्सिटी, सिरसा तथा गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी हिसार के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा, अंक और प्रमाणपत्र प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्रवान, सक्षम, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए फाइव-सी करेक्टर, क्रिएटिविटी, कम्पीटेंस, कम्पेशन और कानशियसनेस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। भारतीय शिक्षण मंडल के क्षेत्रीय मंत्री गणपति तेती ने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल का उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से भारत को महान और विकसित राष्ट्र बनाना है। कार्यक्रम के दौरान पांच विषयगत सत्रों में गहन मंथन हुआ और कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने आइडिया आफ भारत पुस्तक का विमोचन किया।

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