करनाल में बॉस के फर्जी मैसेज पर आरटीजीएस से ट्रांसफर हुए एक करोड़ रुपये, 1930 की तत्परता से बची पूरी रकम

करनाल में बॉस के फर्जी मैसेज पर आरटीजीएस से ट्रांसफर हुए एक करोड़ रुपये, 1930 की तत्परता से बची पूरी रकम

फर्जी व्हाट्सऐप नंबर से ज्वेलरी शोरूम कर्मचारियों को मालिक का नाम और फोटो भेजा गया था। इसके बाद आरटीजीएस से एक करोड़ रुपये का भुगतान करवा दिया गया। हरियाणा पुलिस की साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 की त्वरित कार्रवाई से करनाल में एक करोड़ रुपये की साइबर ठगी की पूरी राशि जालसाजों के हाथों में जाने से बच गई।

साइबर अपराधियों ने बॉस स्कैम का इस्तेमाल किया। उन्होंने करनाल के एक ज्वेलरी शोरूम के कर्मचारियों को शोरूम मालिक के नाम और फोटो वाले फर्जी व्हाट्सऐप नंबर से संदेश भेजा। उन्होंने एक बैंक खाते में एक करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के निर्देश दिए। कर्मचारियों ने संदेश को वास्तविक समझकर आरटीजीएस के माध्यम से रकम ट्रांसफर कर दी। फर्जीवाड़े का पता चलते ही पीड़ित पक्ष ने तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद बैंक फॉलो-अप टीम ने संबंधित बैंकिंग चैनल के साथ तत्काल समन्वय कर कार्रवाई शुरू की और पूरी रकम सुरक्षित करा ली।

पुलिस अधीक्षक साइबर मयंक गुप्ता ने दी पूरी जानकारी

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पुलिस अधीक्षक साइबर मयंक गुप्ता के अनुसार, 15 सितंबर 2026 को शाम 7:48 बजे ममता बंसल, सेक्टर-13, करनाल ने 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता और उनके पति विकास का करनाल के नेहरू प्लेस में ज्वेलरी शोरूम है। कर्मचारियों को एक व्हाट्सऐप नंबर से संदेश मिला। इस नंबर पर शोरूम मालिक विकास का नाम और फोटो लगी हुई थी। संदेश में एक बैंक खाते में एक करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए थे। नाम और फोटो देखकर कर्मचारियों ने संदेश को वास्तविक मान लिया। उन्होंने आरटीजीएस के जरिए रकम भेज दी।

बैंक से एसएमएस मिलने पर हुआ खुलासे का पता

शाम करीब 5:56 बजे ममता बंसल को बैंक खाते से एक करोड़ रुपये कटने का एसएमएस मिला। उन्होंने तत्काल शोरूम में फोन कर लेन-देन की जानकारी ली। बातचीत में सामने आया कि इतनी बड़ी रकम ट्रांसफर करने का मालिक की ओर से कोई निर्देश नहीं दिया गया था। इसके बाद स्पष्ट हुआ कि साइबर अपराधियों ने मालिक के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर फर्जी व्हाट्सऐप नंबर बनाया था। उन्होंने कर्मचारियों को भ्रमित कर ट्रांजैक्शन कराया।

1930 हेल्पलाइन की त्वरित कार्रवाई

फ्रॉड का पता चलते ही पीड़ित पक्ष ने बिना देरी किए 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होते ही हेल्पलाइन की बैंक फॉलो-अप टीम ने संबंधित बैंकिंग चैनल के साथ समन्वय स्थापित किया। टीम ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। टीम की तत्परता और समय पर किए गए बैंक फॉलो-अप के परिणामस्वरूप एक करोड़ रुपये की शत-प्रतिशत राशि जालसाजों के हाथों में जाने से बचा ली गई।

डीजीपी अजय सिंघल ने दी टीम को बधाई

हरियाणा पुलिस के डीजीपी अजय सिंघल ने 1930 की बैंक फॉलो-अप टीम की कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने संबंधित बैंकिंग चैनल के साथ प्रभावी समन्वय की प्रशंसा करते हुए पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध के मामलों में समय सबसे महत्वपूर्ण है। शुरुआती स्तर पर की गई कार्रवाई ठगी की राशि को सुरक्षित कराने में महत्वपूर्ण मदद कर सकती है। उन्होंने आमजन से अपील की कि साइबर फ्रॉड होने पर घबराने या देरी करने के बजाय तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

क्या होता है बॉस स्कैम या सीईओ फ्रॉड

बॉस स्कैम या सीईओ फ्रॉड में जालसाज किसी कंपनी, संस्थान या व्यवसाय के मालिक अथवा वरिष्ठ अधिकारी के नाम और फोटो का इस्तेमाल करते हैं। वे फर्जी व्हाट्सऐप नंबर या प्रोफाइल बनाते हैं। इसके बाद कर्मचारियों को तत्काल पैसा ट्रांसफर करने के निर्देश दिए जाते हैं। कई मामलों में जल्द भुगतान और गोपनीयता बनाए रखने का दबाव बनाया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि कर्मचारी वास्तविक अधिकारी से संपर्क कर निर्देशों का सत्यापन न कर सकें।

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