कानपुर में 25 साल की गर्भवती महिला की संदिग्ध मौत, बगीचे में मिला शव

कानपुर में गर्भवती रेनू की मौत: बगीचे में मिला शव, DNA जांच से खुलेंगे राज
कानपुर में 25 वर्षीय गर्भवती रेनू की संदिग्ध मौत से हड़कंप। बगीचे में मिला शव, दो हिरासत में।
कानपुर /29 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
Top Summary: कानपुर के घाटमपुर-पतारा क्षेत्र में 25 वर्षीय रेनू सोनकर का शव अगस्त 2026 में एक बगीचे में मिला था। पोस्टमार्टम में उसके करीब छह महीने की गर्भवती होने की पुष्टि हुई। पुलिस जांच में दो पुरुषों से उसके संपर्क की बात सामने आई और दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। मामले में डीएनए जांच समेत आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
कानपुर के पतारा इलाके में एक बगीचे में मिला 25 वर्षीय गर्भवती युवती का शव कई सवाल छोड़ गया। जिस रेनू सोनकर की मौत ने परिवार और इलाके को झकझोर दिया, उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसे लेकर पुलिस ने मोबाइल रिकॉर्ड, बयानों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। शुरुआत में मामला संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का था, लेकिन जांच के दौरान कहानी में कई परतें जुड़ती चली गईं।
रेनू सोनकर, पतारा निवासी राजेंद्र सोनकर की बेटी थी। रिपोर्टों के अनुसार उसका शव तिलसड़ा रोड पर शराब ठेके से करीब 500 मीटर दूर एक बगीचे में मिला था। सूचना मिलने के बाद पुलिस के साथ फोरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड भी मौके पर पहुंचा। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, जहां रेनू के करीब छह महीने की गर्भवती होने की पुष्टि हुई।
बगीचे में कैसे मिला रेनू का शव?
रिपोर्टों के मुताबिक रेनू का शव सुबह बगीचे में मिला था। घटनास्थल की परिस्थितियों को देखते हुए परिवार की ओर से हत्या की आशंका जताई गई और पुलिस से जांच की मांग की गई। शुरुआती जांच में पुलिस ने आसपास के क्षेत्र, मोबाइल फोन और रेनू के संपर्क में रहने वाले लोगों के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की।
घटना की जांच में रेनू के मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी CDR महत्वपूर्ण कड़ी बनी। पुलिस को पता चला कि उसकी दो लोगों से लगातार बातचीत होती थी। इनमें फतेहपुर के जहानाबाद थाना क्षेत्र के नरैनी गांव निवासी 28 वर्षीय प्रांजुल पाल और पतारा निवासी अरविंद उर्फ गोले पांडेय शामिल थे। घटना से एक रात पहले भी दोनों से रेनू की बातचीत हुई थी।
पुलिस जांच में सामने आए दो नाम
पुलिस के अनुसार प्रांजुल पाल से रेनू की करीब दो वर्ष से बातचीत थी। पूछताछ में प्रांजुल ने कथित तौर पर बताया कि एक परिचित के माध्यम से उसे रेनू का मोबाइल नंबर मिला था। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत और मुलाकातें होने लगी थीं।
रिपोर्टों के मुताबिक घटना से पहले रेनू ने प्रांजुल को फोन किया था और अस्पताल जाने की बात कहते हुए रुपये की जरूरत बताई थी। पुलिस ने इन बयानों और कॉल रिकॉर्ड को जांच का हिस्सा बनाया। हालांकि, किसी व्यक्ति के बयान को अंतिम सत्य मानने के बजाय पुलिस मामले में दूसरे साक्ष्यों से भी उसका मिलान कर रही थी।
गोले पांडेय की भूमिका को लेकर पुलिस ने क्या पाया?
जांच आगे बढ़ने पर गोले पांडेय का नाम भी सामने आया। पुलिस के अनुसार रेनू के परिवार से उसका पुराना परिचय था और रेनू के पिता उसके यहां बटाईदार के रूप में काम करते थे। रिपोर्टों में रेनू और गोले के बीच कई वर्षों से संबंध होने की बात पुलिस जांच के हवाले से कही गई है।
पुलिस के अनुसार गोले ने पूछताछ में बताया कि रेनू ने दवा खाने की जानकारी दी थी। इसके बाद वह उसके पास पहुंचा और उसे पहले एक निजी अस्पताल ले गया। वहां से उसे कानपुर के एलएलआर अस्पताल ले जाने की बात सामने आई, जहां डॉक्टरों ने रेनू को मृत घोषित कर दिया। इन दावों की पुष्टि का अंतिम आधार जांच और उपलब्ध चिकित्सकीय व फोरेंसिक साक्ष्य होंगे।
अस्पताल से शव बगीचे तक कैसे पहुंचा?
पुलिस जांच के अनुसार रेनू की मौत के बाद शव को निजी एंबुलेंस से पतारा लाया गया और एक बगीचे में छोड़ दिया गया। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में गोले ने इस बारे में जानकारी दी। यही बिंदु जांच में महत्वपूर्ण माना गया, क्योंकि शव अस्पताल में मिलने के बजाय बाद में बगीचे में पाया गया।
उपलब्ध रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि अस्पताल ले जाने से पहले रेनू की मांग में सिंदूर लगाया गया, बिंदी लगाई गई और पैरों में बिछिया पहनाई गई थी। पुलिस के अनुसार इसका उद्देश्य अस्पताल में उसकी पहचान और वैवाहिक स्थिति को लेकर भ्रम पैदा करना हो सकता था। यह पुलिस जांच में सामने आया दावा है, जिसका अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।
रेनू की गर्भावस्था ने मामले को और गंभीर बनाया
रेनू की गर्भावस्था इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक बन गई। पोस्टमार्टम में करीब छह महीने की गर्भावस्था की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने यह पता लगाने की कोशिश की कि गर्भस्थ शिशु का जैविक पिता कौन था।
इसी उद्देश्य से पुलिस ने दोनों आरोपितों के डीएनए नमूने लिए। पोस्टमार्टम के दौरान गर्भस्थ शिशु से संबंधित नमूना भी सुरक्षित किए जाने की जानकारी सामने आई है। डीएनए जांच से जैविक पिता की पहचान के संबंध में तथ्य सामने आ सकते हैं, लेकिन यह जांच अपने आप रेनू की मृत्यु का कारण या किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी साबित नहीं करती।
रेनू के आखिरी दिनों को लेकर भी सवाल
पुलिस जांच से जुड़ी रिपोर्टों में यह बात भी सामने आई कि रेनू कुछ समय से अपने परिवार से अलग रह रही थी। रिपोर्टों के मुताबिक वह 11 जुलाई को घर से निकली थी और बाद में अलग-अलग जगहों पर रहने की स्थिति में पहुंच गई थी। कुछ रिपोर्टों में झकरकटी बस स्टैंड और कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर रात गुजारने की बात कही गई है।
यह पहलू मामले को केवल एक संदिग्ध मौत की जांच तक सीमित नहीं रखता, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि गर्भावस्था के दौरान रेनू किन परिस्थितियों से गुजर रही थी और उसे परिवार या परिचितों से किस तरह की सहायता मिल रही थी। इन परिस्थितियों की वास्तविकता पुलिस की जांच और संबंधित लोगों के बयानों से स्पष्ट होनी है।
दोनों आरोपित गिरफ्तार, जांच अभी भी महत्वपूर्ण चरण में
मामले की शुरुआती जांच में पुलिस ने दोनों पुरुषों के खिलाफ हत्या से संबंधित मुकदमा दर्ज किया। पहले प्रांजुल पाल को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और बाद में गोले पांडेय को भी गिरफ्तार किया गया। बाद की रिपोर्ट के अनुसार दोनों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। एसीपी कृष्णकांत यादव के हवाले से बताया गया कि मामले में आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।
इस पूरे मामले में सबसे जरूरी बात यह है कि पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप, आरोपितों के बयान और अदालत में साबित तथ्य अलग-अलग स्तर की बातें हैं। रेनू की मौत वास्तव में किस कारण हुई, उसकी मौत से पहले क्या हुआ और इसमें किसी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी बनती है या नहीं—इन सवालों का अंतिम उत्तर जांच, फोरेंसिक रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएगा।
निष्कर्ष: कानपुर के पतारा क्षेत्र में रेनू सोनकर की मौत का मामला कई महत्वपूर्ण सवालों से जुड़ा है। शव का बगीचे में मिलना, गर्भावस्था की पुष्टि, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, अस्पताल से जुड़े घटनाक्रम और दोनों आरोपितों के डीएनए नमूने—ये सभी जांच के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। मामले की आगे की जांच और डीएनए रिपोर्ट से कई तथ्य स्पष्ट होने की उम्मीद है।