कलायत में सियासी घमासान, तुषार ढांडा का सहारण पर हमला

कलायत में सियासी घमासान: तुषार ढांडा ने सहारण को घेरा
राजकुमार अग्रवाल /18 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
कलायत/कैथल। कलायत विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक विकास सहारण की ओर से अपने दो साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड पेश किए जाने के बाद भाजपा की तरफ से पलटवार किया गया है। भाजपा युवा नेता तुषार ढांडा ने विधायक के दावों पर सवाल उठाते हुए रिपोर्ट कार्ड को आधारहीन बताया।
तुषार ढांडा ने बुधवार को लोक निर्माण विश्राम गृह में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विकास सहारण पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विधायक रिपोर्ट कार्ड पेश करने में “देर से आए, लेकिन दुरुस्त नहीं आए।” उन्होंने विधायक की ओर से रखे गए विकास कार्यों और आंकड़ों को लेकर कई सवाल उठाए तथा पूर्व राज्यमंत्री कमलेश ढांडा के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों का भी उल्लेख किया।
रिपोर्ट कार्ड को लेकर आमने-सामने भाजपा और कांग्रेस
कलायत की राजनीति में यह विवाद उस समय सामने आया, जब कांग्रेस विधायक विकास सहारण ने अपने दो वर्ष के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखा। रिपोर्ट कार्ड के जरिए उन्होंने अपने कार्यकाल में हुए विकास कार्यों और विधानसभा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को सामने रखा था।
विधायक ने भाजपा की पूर्व राज्यमंत्री कमलेश ढांडा को भी विकास कार्यों का “बही-खाता” मिलाने की चुनौती दी थी। इसके बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। भाजपा की ओर से पूर्व राज्यमंत्री कमलेश ढांडा के बचाव में उनके बेटे और भाजपा युवा नेता तुषार ढांडा सामने आए।
तुषार ढांडा ने पत्रकार वार्ता के दौरान विधायक के रिपोर्ट कार्ड में पेश किए गए तथ्यों को चुनौती दी। उन्होंने दावा किया कि रिपोर्ट कार्ड में दिए गए कई तथ्य सही नहीं हैं। हालांकि, इन दावों और जवाबी दावों के बीच विकास कार्यों से जुड़े मूल सरकारी आंकड़े ही यह तय कर सकते हैं कि किस पक्ष का दावा किस हद तक सही है।
तुषार ढांडा बोले- रिपोर्ट कार्ड दुरुस्त नहीं
पत्रकार वार्ता में तुषार ढांडा ने विधायक विकास सहारण पर तीखा राजनीतिक हमला किया। उन्होंने कहा कि विधायक रिपोर्ट कार्ड लेकर देर से आए और रिपोर्ट कार्ड भी दुरुस्त नहीं था।
उन्होंने रिपोर्ट कार्ड में शामिल तथ्यों को आधारहीन बताते हुए कहा कि विधायक की ओर से रखे गए कई दावे सही नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार ढांडा ने यह भी सवाल उठाया कि विधायक को गलत तथ्य पेश करने का इतना भरोसा कहां से आया। उनकी यह टिप्पणी अब कलायत की स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है।
हालांकि, राजनीतिक आरोपों के बीच यह देखना भी जरूरी है कि जिन विकास कार्यों का उल्लेख दोनों पक्ष कर रहे हैं, उनके लिए स्वीकृति, बजट, कार्यादेश और निर्माण पूरा होने की सरकारी स्थिति क्या है। इससे राजनीतिक बयानबाजी से अलग वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
कलायत को उपमंडल बनाने का मुद्दा फिर उठा
तुषार ढांडा ने कलायत को उपमंडल के रूप में विकसित करने के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि कलायत को उपमंडल बनाने का श्रेय भाजपा सरकार को जाता है।
उनके अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के शासनकाल में कलायत को उपमंडल बनाने की घोषणा की गई थी, लेकिन उनके अनुसार उस समय घोषणा को जमीन पर लागू करने की दिशा में अपेक्षित काम नहीं हुआ। इसके बाद भाजपा सरकार के सत्ता में आने पर इस दिशा में ठोस कदम उठाए गए।
यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी क्षेत्र को उपमंडल का दर्जा मिलने के बाद प्रशासनिक ढांचे का विस्तार होता है। इससे लोगों को कई सरकारी सेवाओं और प्रशासनिक कार्यों के लिए दूसरे शहरों पर निर्भरता कम होने की उम्मीद रहती है।
तुषार ढांडा ने इसी प्रशासनिक बदलाव को भाजपा सरकार की उपलब्धियों से जोड़ते हुए कांग्रेस विधायक के रिपोर्ट कार्ड पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कलायत के विकास में भाजपा सरकार के दौरान कई महत्वपूर्ण काम हुए हैं।
2016 की घोषणाओं का भी दिया हवाला
तुषार ढांडा ने वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल की ओर से कलायत के लिए की गई घोषणाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 13 अगस्त 2016 को कलायत के लिए कई विकास योजनाओं की घोषणा की गई थी।
इनमें उपमंडल मुख्यालय भवन के निर्माण का भी उल्लेख किया गया। ढांडा ने कहा कि इसके अलावा क्षेत्र में करोड़ों रुपये की विभिन्न विकास योजनाओं पर काम हुआ और बाद में पूर्व राज्यमंत्री कमलेश ढांडा के कार्यकाल में इन कार्यों को आगे बढ़ाया गया।
उनका कहना था कि विकास कार्य केवल शहर तक सीमित नहीं रहे बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में भी अलग-अलग परियोजनाओं पर काम हुआ। उन्होंने दावा किया कि विधानसभा क्षेत्र के लोगों ने इन कामों को देखा है और जनता विकास कार्यों के आधार पर दोनों सरकारों के कामकाज की तुलना कर सकती है।
हालांकि, इन दावों का स्वतंत्र मूल्यांकन करने के लिए प्रत्येक परियोजना का विभागवार रिकॉर्ड देखना जरूरी होगा। इसमें स्वीकृत राशि, जारी राशि, काम शुरू होने की तारीख और वर्तमान स्थिति जैसे बिंदु महत्वपूर्ण होंगे।
कमलेश ढांडा के कार्यकाल का भी किया बचाव
तुषार ढांडा की पत्रकार वार्ता का एक प्रमुख उद्देश्य पूर्व राज्यमंत्री कमलेश ढांडा के कार्यकाल को लेकर उठे सवालों का जवाब देना भी रहा। विकास सहारण की ओर से पूर्व राज्यमंत्री को विकास कार्यों का बही-खाता मिलाने की चुनौती दिए जाने के बाद भाजपा की ओर से जवाब सामने आया।
तुषार ढांडा ने कहा कि कलायत में विकास कार्यों का सिलसिला पहले से चल रहा था और उनके अनुसार भाजपा सरकार के दौरान कई योजनाओं को जमीन पर उतारा गया। उन्होंने विशेष रूप से उपमंडल मुख्यालय और अन्य विकास योजनाओं का उल्लेख किया।
उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि कलायत के विकास को केवल मौजूदा विधायक के कार्यकाल से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार क्षेत्र में पहले की सरकारों और जनप्रतिनिधियों के कार्यकाल में शुरू हुई योजनाओं का भी योगदान है।
यही वजह है कि अब कलायत की राजनीति में “किसके कार्यकाल में कितना विकास हुआ” का सवाल राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।
विकास कार्यों का श्रेय लेने की राजनीति
हरियाणा की स्थानीय राजनीति में सड़क, सीवरेज, पेयजल, सरकारी भवन, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा और प्रशासनिक ढांचे से जुड़े काम अक्सर राजनीतिक बहस के केंद्र में रहते हैं। किसी योजना की घोषणा एक सरकार करती है, बजट दूसरी सरकार में जारी हो सकता है और निर्माण तीसरे कार्यकाल में पूरा हो सकता है।
ऐसे में किसी एक परियोजना का पूरा श्रेय किसी एक व्यक्ति या सरकार को देने से पहले उसके पूरे प्रशासनिक इतिहास को देखना जरूरी होता है। योजना कब स्वीकृत हुई, धन कब जारी हुआ, काम कब शुरू हुआ और पूरा कब हुआ—इन सभी सवालों का जवाब सरकारी दस्तावेजों से मिलता है।
कलायत में मौजूदा राजनीतिक विवाद भी इसी बड़े सवाल से जुड़ा दिखाई दे रहा है। कांग्रेस विधायक अपने दो साल के कार्यकाल को सामने रख रहे हैं, जबकि भाजपा नेता क्षेत्र में पहले हुए विकास कार्यों और पिछली सरकार के योगदान को प्रमुखता दे रहे हैं।
इस राजनीतिक बहस के बीच जनता के लिए सबसे उपयोगी जानकारी वही होगी जिसमें दावों के साथ वास्तविक परियोजनाओं और उनके सरकारी रिकॉर्ड को भी सामने रखा जाए।
विधायक के रिपोर्ट कार्ड पर भाजपा का जवाब
विकास सहारण की ओर से पेश रिपोर्ट कार्ड के बाद भाजपा का यह पलटवार स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तुषार ढांडा ने सीधे तौर पर रिपोर्ट कार्ड में शामिल तथ्यों को चुनौती दी है।
उन्होंने कहा कि जनता सच और झूठ के अंतर को समझती है। साथ ही उन्होंने भाजपा सरकार के दौरान हुए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए यह संदेश दिया कि कलायत की विकास यात्रा को केवल मौजूदा विधायक के दो साल के कार्यकाल तक सीमित नहीं किया जा सकता।
दूसरी ओर, कांग्रेस की ओर से रखे गए रिपोर्ट कार्ड का उद्देश्य अपने कार्यकाल में किए गए कार्यों और उपलब्धियों को जनता के सामने रखना था। इसलिए आने वाले दिनों में दोनों दलों की ओर से अपने-अपने आंकड़े और दस्तावेज सामने आने की संभावना बनी हुई है।
राजनीतिक रूप से यह बहस इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों की स्थिति आने वाले समय में स्थानीय राजनीतिक चर्चा का प्रमुख आधार बन सकती है।
कलायत की राजनीति में बढ़ी बयानबाजी
कलायत विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक मुकाबला नया नहीं है। लेकिन रिपोर्ट कार्ड के बाद सामने आए आरोप-प्रत्यारोप ने स्थानीय राजनीति में एक नया मुद्दा जरूर खड़ा कर दिया है।
एक तरफ विधायक विकास सहारण अपने कार्यकाल के काम गिना रहे हैं, वहीं भाजपा नेता तुषार ढांडा पुराने विकास कार्यों और पूर्व राज्यमंत्री कमलेश ढांडा के कार्यकाल को सामने रख रहे हैं।
ऐसे में अब राजनीतिक बहस केवल बयानबाजी तक सीमित रहने के बजाय विकास के आंकड़ों पर पहुंच सकती है। यदि दोनों पक्ष परियोजनावार विवरण जनता के सामने रखते हैं, तो यह स्पष्ट करना आसान होगा कि कौन-सा काम कब स्वीकृत हुआ और किस सरकार के कार्यकाल में पूरा हुआ।
स्थानीय स्तर पर ऐसी जानकारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विकास योजनाओं का सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है।
जनता के सामने अब असली सवाल क्या है?
कलायत में जारी राजनीतिक बहस के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि विधानसभा क्षेत्र में वास्तव में कितने विकास कार्य हुए और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है।
यदि किसी सड़क की बात हो रही है तो उसकी लंबाई, लागत और निर्माण एजेंसी की जानकारी सामने आनी चाहिए। यदि सरकारी भवन की बात है तो उसकी स्वीकृति और निर्माण की स्थिति बताई जानी चाहिए। इसी तरह ग्रामीण विकास योजनाओं के लिए भी गांववार और विभागवार आंकड़े सामने रखे जा सकते हैं।
इससे राजनीतिक आरोपों से अलग एक तथ्यात्मक तस्वीर सामने आएगी। जनता यह भी समझ सकेगी कि कौन-सी योजना पुरानी है, कौन-सी नई है और किस योजना पर अभी काम चल रहा है।
राजनीतिक दलों के लिए भी यह मौका है कि वे केवल आरोप-प्रत्यारोप के बजाय दस्तावेज और आंकड़ों के साथ अपनी बात रखें।
तुषार ढांडा के बयान से गरमाई सियासत
बुधवार को लोक निर्माण विश्राम गृह में हुई पत्रकार वार्ता के बाद कलायत में राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। तुषार ढांडा के “देर से आए, दुरुस्त नहीं आए” वाले बयान ने विधायक के रिपोर्ट कार्ड पर भाजपा की प्रतिक्रिया को स्पष्ट कर दिया है।
उन्होंने कांग्रेस विधायक के दावों को चुनौती देते हुए भाजपा सरकार और पूर्व राज्यमंत्री कमलेश ढांडा के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों को सामने रखा। खास तौर पर उन्होंने कलायत को उपमंडल के रूप में विकसित करने और 2016 में घोषित विकास योजनाओं का उल्लेख किया।
अब देखना यह होगा कि कांग्रेस विधायक या उनकी ओर से कोई प्रतिनिधि भाजपा के इन आरोपों का क्या जवाब देता है। यदि दोनों पक्ष अपने-अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज सामने रखते हैं, तो कलायत के विकास कार्यों को लेकर चल रही राजनीतिक बहस और अधिक स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल इतना साफ है कि कलायत में विकास कार्यों को लेकर राजनीतिक मुकाबला तेज हो गया है और दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमे जनता के सामने अपने-अपने कार्यकाल का हिसाब रखने की तैयारी में दिखाई दे रहे हैं।
कलायत में विधायक विकास सहारण के दो वर्ष के रिपोर्ट कार्ड के बाद भाजपा युवा नेता तुषार ढांडा का पलटवार स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। ढांडा ने रिपोर्ट कार्ड के तथ्यों को चुनौती दी और कहा कि विधायक रिपोर्ट कार्ड पेश करने में देर से आए, लेकिन रिपोर्ट दुरुस्त नहीं थी।
उन्होंने भाजपा सरकार के दौरान कलायत में हुए विकास कार्यों, उपमंडल मुख्यालय और 2016 की विकास घोषणाओं का उल्लेख करते हुए पूर्व राज्यमंत्री कमलेश ढांडा के कार्यकाल का बचाव किया।
अब इस राजनीतिक विवाद का अगला चरण आंकड़ों और दस्तावेजों पर निर्भर करेगा। कांग्रेस विधायक अपने रिपोर्ट कार्ड में बताए गए कार्यों का विवरण सामने रख सकते हैं, जबकि भाजपा पहले की परियोजनाओं का हिसाब पेश कर सकती है।
कलायत की जनता के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही होगी कि राजनीतिक दावों के साथ वास्तविक विकास कार्यों का रिकॉर्ड भी सामने आए। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन-सी योजना कब शुरू हुई, किसने उसे मंजूरी दी, किस सरकार में धन जारी हुआ और वर्तमान में उसकी स्थिति क्या है।
फिलहाल कलायत में “रिपोर्ट कार्ड” को लेकर शुरू हुई यह राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है।
स्रोत: उपलब्ध स्थानीय रिपोर्टों में तुषार ढांडा की पत्रकार वार्ता और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों का विवरण प्रकाशित हुआ है। इन आरोपों को खबर में संबंधित पक्ष के बयान के रूप में प्रस्तुत किया गया है, स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के रूप में नहीं।