कैथल में संत सत्यानंद महाराज के जन्मदिवस पर साईं की रसोई ने लगाया विशाल भंडारा

संत सत्यानंद जी महाराज के जन्मदिवस के अवसर पर कैथल में साईं की रसोई संस्था द्वारा एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। यह आयोजन रविवार को कैथल के शहीद स्मारक के सामने स्थित हनुमान मंदिर के बाहर किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं और राहगीरों को बड़ी श्रद्धा और भाव के साथ बाबा का प्रसाद वितरित किया गया। इस खबर से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- संत सत्यानंद जी महाराज के जन्मदिवस पर हुआ भंडारा
- हनुमान मंदिर के बाहर किया गया प्रसाद वितरण
- संस्था द्वारा जरूरतमंदों की लगातार की जाती है सेवा
मानवता की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा
साईं बाबा के परम भक्त और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के प्रतीक अंबाला वाले संत सत्यानंद जी महाराज के जन्मदिवस के उपलक्ष್ಯ में यह कार्यक्रम हुआ। संस्था की अध्यक्ष प्रिया ठकराल ने इस अवसर पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि साईं बाबा और संत सत्यानंद जी महाराज का संदेश हमेशा से यही रहा है कि मानवता की सेवा भगवान की पूजा से भी बढ़कर है। इसी संदेश को अपने जीवन में अपनाते हुए साईं की रसोई संस्था लंबे समय से जरूरतमंद और गरीब लोगों की लगातार सेवा कर रही है।
जरूरतमंद बच्चों के लिए संस्था के कार्य
प्रिया ठकराल ने जानकारी देते हुए बताया कि संस्था द्वारा समय-समय पर बड़े भंडारे आयोजित किए जाते हैं। इसके साथ ही झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले जरूरतमंद बच्चों को किताबें, कपड़े और मिठाइयां बांटी जाती हैं। त्योहारों के अवसर पर इन बच्चों को पटाखे, रंग और अन्य सामग्री भी वितरित की जाती है। इसका उद्देश्य यह होता है कि गरीब बच्चे भी आम लोगों की तरह त्योहारों की खुशियां मना सकें। उन्होंने यह भी बताया कि संस्था द्वारा अब हर वीरवार दोपहर को हनुमान मंदिर के बाहर विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है।
छोटी बेटी नायरा ने भी की भंडारे में सेवा
इस विशेष अवसर पर प्रिया ठकराल की छोटी बेटी नायरा ने भी भंडारे में अपनी सेवा दी। नायरा ने इस मौके पर कहा कि सेवा परमो धर्म है और हम सभी को साईं बाबा के बताए हुए मार्ग पर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें हमेशा जरूरतमंदों की सहायता करनी चाहिए।
संत सत्यानंद जी महाराज की शिक्षाएं
प्रिया ठकराल ने आगे बताया कि अंबाला वाले संत सत्यानंद जी महाराज ने हमेशा लोगों को कई अच्छी बातें सिखाई हैं। उन्होंने लोगों को साईं बाबा के बताए मार्ग पर चलने की शिक्षा दी है। इसके साथ ही उन्होंने हमेशा मानवता की सेवा करने और किसी भी जीव-जंतु का दिल न दुखाने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में जरूरतमंद और बेसहारा लोगों की सहायता के लिए हमेशा आगे आना चाहिए।