कैथल की मंडियों में बिना बोली खरीदे गए धान का उठान अटका, 1509 के भाव में आई गिरावट

कैथल जिले की अनाज मंडियों में पीआर धान की आवक लगातार बढ़ती जा रही है। मंडियों में खरीद और उठान की धीमी रफ्तार ने किसानों और आढ़तियों की परेशानी को काफी बढ़ा दिया है। नई अनाज मंडी में बिना बोली के खरीदे गए धान का एक बड़ा स्टॉक अब पूरी तरह से जमा हो गया है।
- कैथल की नई अनाज मंडी में बिना बोली खरीदे गए धान के एक लाख से अधिक कट्टे पड़े हैं।
- खरीद एजेंसियों के रिकॉर्ड में धान दर्ज न होने के कारण इसका उठान पूरी तरह से अटका हुआ है।
- धान की 1509 किस्म के भाव में शनिवार को 150 से 200 रुपये प्रति क्विंटल तक की गिरावट दर्ज की गई।
मंडियों में जगह की कमी और उठान की समस्या
कैथल की नई अनाज मंडी में एक लाख से अधिक कट्टे पड़े हुए हैं। लेकिन संबंधित खरीद एजेंसियों के आधिकारिक रिकॉर्ड में यह धान दर्ज नहीं किया गया है। इसी मुख्य वजह के कारण इन बोरियों का उठान अभी तक शुरू नहीं हो पा रहा है। मंडी के दोनों शेड और उसके आसपास के सभी स्थानों पर कट्टे पूरी तरह से जमा हो चुके हैं। इस स्थिति के कारण वहां अब नई आवक के लिए जगह काफी कम पड़ने लगी है।
आढ़तियों और मिलर्स ने किसानों से बिना बोली के ही पीआर धान खरीद लिया था। लेकिन संबंधित खरीद एजेंसियों ने इस धान को अभी तक अपने रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया है। इसी वजह से खरीदे गए इस धान का उठान बुरी तरह से अटका हुआ है। मंडी में लगातार आवक में बढ़ोतरी होने के कारण आने वाले दिनों में यह स्थिति और भी अधिक गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है। धान का उठान समय पर न होने के कारण लेबर को भी वहां काम करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किसान नेताओं की मांग और धान की जांच
इस पूरे मामले को लेकर भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बिना बोली के किसानों से एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम भाव पर खरीदे गए पीआर धान की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। किसानों का साफ तौर पर कहना है कि उन्हें सरकारी समर्थन मूल्य के अनुरूप ही पूरा भुगतान मिलना चाहिए। इसके अलावा उनकी यह भी मांग है कि पूरी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता पूरी तरह से बरती जानी चाहिए।
मार्केट कमेटी सचिव नरेंद्र ढुल ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया है कि मंडियों में पहले खरीदे गए पीआर धान की जांच के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी की वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित धान के सभी गेट पास सफलतापूर्वक काट दिए गए हैं। साथ ही इसे आधिकारिक रिकॉर्ड में पूरी तरह से किसानों का धान दर्ज कर लिया गया है।
1509 धान के भाव में गिरावट और उत्पादन
धान की 1509 किस्म के बाजार भाव में शनिवार को भारी गिरावट दर्ज की गई है। दो दिन पहले जहां 1509 धान का अधिकतम भाव करीब 4460 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया था। वहीं शनिवार को इसका अधिकतम भाव घटकर करीब 4200 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास ही रह गया है। बाजार भाव में अचानक 150 से 200 रुपये की कमी आने के कारण किसानों के चेहरों पर भारी मायूसी छा गई है।
हालांकि राहत की बात यह है कि पिछले साल के मुकाबले इस सीजन में 1509 के भाव अभी भी करीब 1300 से 1400 रुपये प्रति क्विंटल अधिक बताए जा रहे हैं। किसानों के अनुसार इस बार 1509 का कुल उत्पादन भी करीब 55 से 60 मन प्रति एकड़ तक दर्ज किया गया है। इसी बेहतर उत्पादन के कारण इस किस्म की फसल से उन्हें अपेक्षाकृत रूप से काफी अच्छी आमदनी प्राप्त हुई है।
पुरानी अनाज मंडी में आवक और जाम की समस्या
पुरानी अनाज मंडी एसोसिएशन के प्रधान श्याम बहादुर खुरानिया ने मीडिया से बातचीत में बताया है कि मंडी में अब तक करीब तीन हजार क्विंटल धान पहुंच चुका है। चूंकि यह पुरानी मंडी शहर के बिल्कुल बीचों-बीच स्थित है। इसलिए धान की आवक में लगातार बढ़ोतरी होने के कारण वहां यातायात और जाम की गंभीर समस्या भी बढ़ सकती है। प्रधान ने सभी संबंधित खरीद एजेंसियों से कड़े शब्दों में मांग की है कि वे मंडी में पहले से पहुंच चुके इस धान का जल्द से जल्द उठान सुनिश्चित करवाएं।